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    गोल्ड-सिल्वर के बाद कॉपर में आने वाली है 'बड़ी सुपरसाइकिल', AI-EV और पावर ग्रिड की डिमांड से आएगा बूम; है कमाई का मौका?

    Updated: Tue, 26 May 2026 02:31 PM (IST)

    Copper Price Outlook: एचडीएफसी सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के अनुसार, AI, EV और पावर ग्रिड जैसी बढ़ती मांग के कारण कॉपर में एक बड़ी सुपरसाइकिल आने की संभाव ...और पढ़ें

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    AI, EV और पावर ग्रिड की बढ़ती मांग से कॉपर में बड़ी सुपरसाइकिल की उम्मीद: HDFC सिक्योरिटीज रिपोर्ट

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    नई दिल्ली| दुनियाभर में सोने-चांदी की तेज रैली के बाद अब कॉपर को अगला बड़ा कमोडिटी स्टार माना जा रहा है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज (HDFC Securities) की नई रिपोर्ट 'कॉपर: द नेक्स्ट लेग ऑफ द कमोडिटी सुपरसाइकिल' में दावा किया गया है कि आने वाले सालों में कॉपर की कीमतों में बड़ी तेजी (copper price outlook) देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, AI, डेटा सेंटर, EV, पावर ग्रिड और ग्लोबल इलेक्ट्रिफिकेशन जैसी जरूरतें कॉपर की डिमांड को लगातार बढ़ा रही हैं, जबकि सप्लाई कमजोर बनी हुई है।

    MCX पर कहां ट्रेड कर रहा है कॉपर?

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर कॉपर में आज, 26 मई को 0.45 फीसदी की गिरावट (copper price crash) दर्ज हुई और कीमत 6.15 रुपए गिरकर 1,361.30 रुपए प्रति (copper price today) किलोग्राम हो गई। ट्रेडिंग के दौरान इसका हाई लेवल 1,363.90 रुपए और लो लेवल 1,358.20 रुपए रहा। खास बात यह है कि कॉपर ने 29 जनवरी को 1450 के पार जाकर अपना ऑल टाइम हाई बनाया था। लेकिन तब से कॉपर 70 रुपए से भी ज्यादा सस्ता हो गया है।

    गोल्ड ने 60% तो चांदी ने दिया 140% रिटर्न

    रिपोर्ट के अनुसार 2025 में गोल्ड ने 60% से ज्यादा और सिल्वर ने 140% से ज्यादा रिटर्न दिया। वहीं कॉपर भी 40% चढ़ा, लेकिन अभी भी गोल्ड और सिल्वर के मुकाबले मल्टी-डिकेड लो पर ट्रेड कर रहा है। यही वजह है कि बाजार में अब कॉपर की अगली बड़ी रैली की चर्चा तेज हो गई है।

    HDFC सिक्योरिटीज का कहना है कि,

    कमोडिटी और अमेरिकी इक्विटी के बीच वैल्यूएशन गैप 25 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। S&P GSCI कमोडिटी इंडेक्स और S&P 500 का रेशियो करीब 11% पर है, जबकि इसका लॉन्ग टर्म एवरेज करीब 25% रहा है। इतिहास बताता है कि जब भी यह रेशियो इतने नीचे गया, उसके बाद कमोडिटी सेक्टर ने कई साल तक बेहतर प्रदर्शन किया।"

    रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा दौर हार्ड एसेट्स के लिए काफी मजबूत दिख रहा है। लगातार ऊंची महंगाई, बढ़ता अमेरिकी कर्ज, डॉलर की कमजोरी और डि-डॉलराइजेशन जैसी स्थितियां कमोडिटी बाजार को सपोर्ट कर रही हैं। कई इमर्जिंग मार्केट सेंट्रल बैंक अब अमेरिकी ट्रेजरी की जगह गोल्ड और दूसरी कमोडिटी एसेट्स की तरफ बढ़ रहे हैं।

    स्ट्रक्चरल डिमांड है कॉपर की सबसे बड़ी ताकत

    कॉपर की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्ट्रक्चरल डिमांड मानी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक AI डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, पावर ग्रिड अपग्रेड और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में भारी मात्रा में कॉपर की जरूरत होगी। आने वाले दो दशकों में डिफेंस, AI और एनर्जी ट्रांजिशन जैसे सेक्टर कुल कॉपर डिमांड का करीब 45% हिस्सा बन सकते हैं। 2024 में यह आंकड़ा करीब 32% था।

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    दूसरी तरफ सप्लाई लगातार दबाव में है। रिपोर्ट के अनुसार 2015 के बाद दुनिया में कोई बड़ा Tier-1 कॉपर डिस्कवरी नहीं हुआ। चिली जैसे बड़े उत्पादक देशों में भी उत्पादन दबाव में है। पानी की कमी, घटती हाई-ग्रेड खदानें और बढ़ती लागत ने सप्लाई को सीमित कर दिया है। चिली का कॉपर उत्पादन अब लगभग 2003 के स्तर के आसपास पहुंच गया है।

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    कॉपर प्रोडक्शन में इनपुट की कीमत 200% बढ़ी

    रिपोर्ट में सल्फ्यूरिक एसिड की बढ़ती कीमतों को भी बड़ा फैक्टर बताया गया है। कॉपर उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले इस जरूरी इनपुट की कीमत सालभर में 200% से ज्यादा बढ़ चुकी है। इससे खनन कंपनियों की लागत तेजी से बढ़ी है और ग्लोबल सप्लाई पर असर पड़ा है।

    कॉपर टू गोल्ड-सिल्वर रेशियो में क्या है गुंजाइश?

    HDFC Tru ने कॉपर और गोल्ड के रेशियो को भी बड़ा संकेत बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉपर-टू- गोल्ड रेशियो (Copper-to-Gold Ratio) मई 2026 में 0.1% तक गिर गया, जो मल्टी-डिकेड लो है। इतिहास में ऐसे स्तरों के बाद कॉपर ने बेहतर रिटर्न दिए हैं। कॉपर-टू सिल्वर रेशियो (Copper-to-Silver Ratio) भी बेहद निचले स्तर पर है, जिससे संकेत मिलता है कि कॉपर अभी बाकी मेटल्स के मुकाबले पीछे है और इसमें तेजी की गुंजाइश बनी हुई है।

    मिडिल ईस्ट वॉर, अमेरिकी मंदी और कमजोर डिमांड

    हालांकि रिपोर्ट में कुछ जोखिमों का भी जिक्र किया गया है। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने, अमेरिकी मंदी, चीन की कमजोर डिमांड और सप्लाई बढ़ने जैसी स्थितियां कॉपर की तेजी को प्रभावित कर सकती हैं। इंटरनेशनल कॉपर स्टडी ग्रुप के मुताबिक 2026 और 2027 में कॉपर बाजार में सरप्लस भी देखने को मिल सकता है।

    इसके बावजूद HDFC Tru का मानना है कि कॉपर अब पारंपरिक कमोडिटी साइकिल से अलग दिशा में बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार AI, EV और ग्लोबल पावर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी जरूरतें ऐसी डिमांड बना रही हैं, जिसे आसानी से टाला नहीं जा सकता। वहीं नई सप्लाई आने में 5 से 7 साल लग सकते हैं। ऐसे में कॉपर आने वाले समय में अगली बड़ी कमोडिटी थीम बन सकता है।