सोना-चांदी क्रैश, लेकिन क्रूड बिगाड़ेगा आपकी जेब का गणित; सब्जी, साबुन से प्लास्टिक का सामान तक, क्या-क्या होगा महंगा?
Gold Silver Price Crash and Crude Oil Price Hike: बाजार में क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों और सोने-चांदी की गिरावट पर विशेषज्ञ अनुज गुप्ता ने विस्तार से बत ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| पिछले कुछ हफ्तों से मार्केट में घबराहट का माहौल है। एक तरफ मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के चलते क्रूड ऑयल की कीमतें 2022 के बाद के उच्चतम स्तर $122 प्रति बैरल (crude oil price hike) के पार चली गई हैं, तो दूसरी तरफ सोने और चांदी के दाम लगातार नीचे गिर रहे हैं। पिछले एक हफ्ते में सोना ₹2500 से ₹3000 और चांदी करीब ₹7000 तक सस्ती हो चुकी है।
खास बात यह है कि 29 जनवरी के बाद यानी पिछले 90 दिनों में सोना 41 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम से ज्यादा और चांदी करीब 1.70 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक सस्ती (gold silver price crash) हो चुकी है। अब सवाल यह कि आखिर क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा। साथ ही, यह आपकी जेब पर क्या असर डालेगा?
इस पूरे घटनाक्रम पर जागरण बिजनेस ने अपने वीकली शो 'प्रॉफिट की मंडी' रजिस्टर्ड मार्केट एंड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता से खास बातचीत की और हर पहलू को समझा। पढ़ें बातचीत के मुख्य अंश:
सवाल 1. सोने-चांदी में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आ रही है?
अनुज गुप्ता: इसका बड़ा कारण 'क्रूड ऑयल' की तेजी है। क्रूड महंगा होने से महंगाई (Inflation) बढ़ती है, जिससे दुनियाभर के सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ाने या उन्हें ऊंचे स्तर पर रखने पर मजबूर हो जाते हैं। जब बैंक में बेहतर रिटर्न मिलता है, तो निवेशक सोना-चांदी छोड़कर अपना पैसा बैंकों में सुरक्षित करना शुरू कर देते हैं।
सवाल 2. वर्ल्ड बैंक और WGC की रिपोर्ट्स में सोने को लेकर अलग-अलग दावे क्यों हैं?
अनुज गुप्ता: ये रिपोर्ट्स मैक्रो-लेवल के अनुमान हैं। 2025 में सोने-चांदी ने बेहतरीन रिटर्न दिए थे, लेकिन 2026 में तस्वीर बदल गई है। ये रिपोर्ट बताती हैं कि अब सोना 2025 जैसा तूफानी रिटर्न शायद न दे, लेकिन यह लंबी अवधि में स्थिर रहेगा।
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सवाल 3. क्या आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतें और गिरेंगी?
अनुज गुप्ता: जब तक क्रूड ऑयल का दबाव बना रहेगा, सोने में बहुत बड़ी तेजी की उम्मीद कम है। हालांकि, यह बहुत ज्यादा टूटेगा भी नहीं। दिवाली तक सोना दोबारा रफ्तार पकड़ सकता है।
सवाल 4. डिजिटल गोल्ड और ETF की मांग अचानक क्यों बढ़ गई?
अनुज गुप्ता: लोग अब फिजिकल ज्वेलरी के 'मेकिंग चार्ज' और 'जीएसटी' के नुकसान को समझ गए हैं। ज्वेलरी एक डेड एसेट है, जबकि डिजिटल गोल्ड, ईटीएफ और सोवरन गोल्ड बॉन्ड में पारदर्शिता और पूरा रिटर्न मिलता है। इसलिए निवेशक अब डिजिटल माध्यम चुन रहे हैं।
सवाल 5. हाल ही में आरबीआई द्वारा लंदन से लाया गया सोना क्या संकेत देता है?
अनुज गुप्ता: यह घबराने वाली बात नहीं है। यह भारत का ही सोना था जो हमने पहले गिरवी (Pledge) रखा था। अब हमने वह पैसा चुकाकर अपना सोना वापस मंगा लिया है। सेंट्रल बैंक अपनी होल्डिंग्स बढ़ा रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उसे इस्तेमाल कर सकें।
सवाल 6. सोने-चांदी का टारगेट प्राइस क्या हो सकता है? (Gold Silver Forecast)
अनुज गुप्ता: मौजूदा स्थिति में सोना 4,400 डॉलर से 4,800 डॉलर प्रति औंस (₹1.34 लाख से ₹1.46 लाख तक ) के दायरे में रह सकता है। दिवाली तक इसके 5,000-5,200 डॉलर (करीब 1.58 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) तक जाने की उम्मीद है। वहीं चांदी लोएस्ट में 65 डॉलर और हाईएस्ट 85 डॉलर प्रति औंस (₹1.98 लाख से 2.60 लाख रुपए तक) तक पहुंच सकती है।
सवाल 7. चांदी में इतनी भारी गिरावट का कारण क्या है? क्या सोलर पैनल में इसका इस्तेमाल कम हो गया है?
अनुज गुप्ता: चांदी औद्योगिक धातु है। क्रूड महंगा होने से गैस और कोल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे गलाने की लागत (Melting cost) बढ़ गई है। साथ ही, मिडिल ईस्ट के तनाव से शिपमेंट्स अटकी हैं, जिससे सोलर और इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री की डिमांड पर असर पड़ा है।
सवाल 8. क्या मानसून के दौरान सोना-चांदी खरीदना सही रहता है?
अनुज गुप्ता: ऐतिहासिक रूप से मानसून अच्छा रहने पर गांवों में मांग बढ़ती है, जो कीमतों को सहारा देती है। लेकिन इस बार अल-नीनो का असर भी देखना होगा। अगर मानसून बेहतर रहा, तो डिमांड बढ़ेगी।
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सवाल 9. क्रूड ऑयल का $130 तक जाने का डर भारत के लिए कितना बड़ा है?
अनुज गुप्ता: बहुत बड़ा। भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है। क्रूड का भाव $60 से $130 पहुंचना मतलब सीधे-सीधे महंगाई का बढ़ना। माल ढुलाई महंगी होगी तो हर चीज- सब्जी से लेकर साबुन और प्लास्टिक के सामान तक, महंगी हो जाएगी।
सवाल 10. फेड रिजर्व की मीटिंग का क्रूड और गोल्ड से क्या कनेक्शन है?
अनुज गुप्ता: फेड तय करता है कि ब्याज दरें क्या रहेंगी। अगर वे महंगाई कंट्रोल करने के लिए दरें बढ़ाते हैं, तो निवेशक सोना बेचकर बैंक में पैसा लगाते हैं। क्रूड का बढ़ना महंगाई बढ़ाता है, जो सीधे तौर पर फेड को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर करता है।
घबराएं नहीं, समझदारी से निवेश करें
अनुज गुप्ता के अनुसार, यह गिरावट एक अवसर भी है। इतिहास गवाह है कि 2008 और 2020 जैसी कठिन स्थितियों में जिन्होंने धैर्य रखा, उन्हें लंबे समय में अच्छे रिटर्न मिले। यदि आप निवेशक हैं, तो 'डिप' (गिरावट) में खरीदारी करना एक बेहतर रणनीति हो सकती है।
बस ध्यान रहे कि मिडिल ईस्ट की स्थिति पर नजर रखें, क्योंकि क्रूड ऑयल की चाल ही आने वाले दिनों में आपकी रसोई का बजट तय करेगी।
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