Middle East का युद्ध जो-जो ना करवाए, ग्लोबल मार्केट में तेजी से बढ़ने लगे चावल के दाम, वैश्विक स्टॉक में भी गिरावट
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमतें भू-राजनीतिक संकट, मौसम और उर्वरक उपलब्धता की चिंताओं के कारण बढ़ने की संभावना है, जिससे एक दशक बाद मांग-आपूर्त ...और पढ़ें

चावल की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी (AI Image)
HighLights
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमतें बढ़ने की संभावना।
भू-राजनीतिक संकट और उर्वरक उपलब्धता पर चिंताएं बढ़ीं।
वैश्विक चावल उत्पादन और स्टॉक में गिरावट का अनुमान।
नई दिल्ली| अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चावल की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है, क्योंकि एक दशक से अधिक समय बाद मांग और आपूर्ति का संतुलन घाटे की ओर झुकता दिख रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक भू-राजनीतिक संकट के कारण मौसम और उर्वरक (fertilizer) की उपलब्धता को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं।
रिसर्च एजेंसी BMI ने कहा कि, “हम उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाली तिमाहियों में चावल की कीमतों में तेजी बनी रहेगी। वर्ष 2026 में औसत कीमत 11.7 डॉलर से 12.5 डॉलर प्रति cwt (45.36 किलोग्राम) के बीच रह सकती है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच मौसम से जुड़े जोखिम और उर्वरकों की लागत और उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं।”
वैश्विक चावल स्टॉक में कमी का अनुमान
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने पिछले हफ्ते अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2026-27 (सितंबर-अगस्त) में वैश्विक चावल उत्पादन 2025-26 के 537.8 मिलियन टन (mt) से घटकर लगभग 5 मिलियन टन कम होने का अनुमान है। USDA के अनुसार, उत्पादन में सबसे बड़ी गिरावट भारत (2 मिलियन टन), म्यांमार/बर्मा (1 मिलियन टन) और अमेरिका (1 मिलियन टन) में देखने को मिल सकती है।
वहीं वैश्विक चावल स्टॉक 3.6 मिलियन टन घटकर 192.7 मिलियन टन रहने का अनुमान है। भारत, कंबोडिया, इंडोनेशिया और अमेरिका में सबसे अधिक गिरावट देखी जा सकती है।
दक्षिण एशिया में चावल की डिमांड बढ़ी
चावल के स्टॉक में कमी के अनुमान के बीच दुनिया में चावल की खपत 3.8 मिलियन टन बढ़कर 541.4 मिलियन टन होने का अनुमान है। इसका कारण दक्षिण एशिया, खासकर भारत, और उप-सहारा अफ्रीका में बढ़ती मांग है, क्योंकि चावल वहां का प्रमुख खाद्य बना हुआ है।
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स्टॉक में कमी के बीच चीन का दबदबा
एक ओर जहां वैश्विक चावल स्टॉक 3.6 मिलियन टन घटकर 192.7 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया जा रहा है तो नहीं इसके विपरीत, चीन में चावल का स्टॉक 3 मिलियन टन बढ़कर 108 मिलियन टन होने का अनुमान है, जो दुनिया के कुल स्टॉक का 56 प्रतिशत होगा।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की इकाई एग्रीकल्चरल मार्केटिंग इंफॉर्मेशन सिस्टम (AMIS) ने कहा कि फिलहाल वैश्विक चावल कीमतें अधिकतर स्थिर हैं, क्योंकि शिपिंग बाधाओं के बीच मांग कमजोर बनी हुई है। AMIS ने कहा, “भारत की निर्यात दरें स्थिर हैं क्योंकि बाजार में मांग धीमी है।”
चावल की कीमत में तेज उछाल
थाईलैंड राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, 6 मई से 13 मई के बीच चावल की कीमतों में लगभग 20 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी हुई। वियतनाम ने 1 अप्रैल के बाद से अपनी कीमतों में 60 डॉलर प्रति टन की बढ़ोतरी की है, जबकि भारत और पाकिस्तान में यह बढ़ोतरी 10 डॉलर प्रति टन से कम रही।
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BMI ने कहा, “हमने 2026 के लिए CBOT में सूचीबद्ध सेकंड-मंथ राइस फ्यूचर्स की औसत कीमत का अनुमान 11.2 डॉलर प्रति cwt से बढ़ाकर 11.9 डॉलर प्रति cwt कर दिया है। वैश्विक सप्लाई को लेकर सकारात्मकता 2025 के अंत के बाद कम होने की संभावना के चलते 2026 की शुरुआत में चावल कीमतों में तेजी देखी गई। जनवरी में औसत कीमत 10.7 डॉलर, फरवरी में 11 डॉलर और मार्च में 11.4 डॉलर प्रति cwt रही।”
अप्रैल में कीमतों में थोड़ी गिरावट आई और यह 11.3 डॉलर प्रति cwt तक फिसल गई, क्योंकि वैश्विक स्टॉक मजबूत रहने की उम्मीद से सप्लाई को लेकर भरोसा बढ़ा। हालांकि, मई की शुरुआत में कीमतें फिर मजबूत हुईं और 8 मई को 12.2 डॉलर प्रति cwt पर बंद हुईं।
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