Gold Jewellery Sales Crash: सोने की चमक पड़ी फीकी, ज्वैलरी शोरूम्स में 70% तक गिरे ग्राहक; इस एक वजह से आई गिरावट
Gold Jewellery Sales Crash: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी देशों में भारतीय ज्वैलरी शोरूम की बिक्री में 70% तक की भारी गिरावट आई है। मालाबा ...और पढ़ें
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भारतीय शोरूम्स की बिक्री में 70% तक की भारी गिरावट।
नई दिल्ली| अगर आप सोने में निवेश करने या घर की शादी के लिए गहने खरीदने का मन बना रहे हैं, तो खाड़ी देशों (Gulf Countries) से आ रही ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात ने सोने के बाजार की कमर तोड़ दी है।
आलम यह है कि खाड़ी देशों के करीब 2 अरब डॉलर के विशाल ज्वैलरी मार्केट में भारतीय शोरूम्स की बिक्री में 70% तक की भारी गिरावट (Gold Jewellery Sales Crash) दर्ज की गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता है।
खाली पड़े हैं शोरूम, सन्नाटे में बाजार
मालाबार गोल्ड, कल्याण ज्वैलर्स, जॉय अलुक्कास और टाटा के तनिष्क जैसे बड़े भारतीय ब्रांड्स, जिनका खाड़ी देशों में दबदबा है, वहां अब सन्नाटा पसरा है।
मार्च महीने के आंकड़ों ने इंडस्ट्री को चौंका दिया है। पिछले साल के मुकाबले इस साल मार्च में ग्राहकों की संख्या में भारी कमी आई है। हालांकि यूएई (UAE) जैसे बाजारों में दुकानें खुली हैं, लेकिन युद्ध की अनिश्चितता ने लोगों की जेब पर ताला लगा दिया है।
दिग्गज कंपनियों ने क्या कहा?
देश की बड़ी ज्वैलरी कंपनियों ने इस संकट पर अपनी चिंता जाहिर की है:
- टाइटन (तनिष्क): कंपनी के मुताबिक, "यूएई में हमारे स्टोर खुले तो हैं, लेकिन मार्च में ग्राहकों के सेंटिमेंट और सेल्स पर बुरा असर पड़ा है। हालांकि सऊदी अरब जैसे कुछ इलाकों में ईद के दौरान बिक्री ठीक रही, लेकिन विस्तार की योजनाओं को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।"
- जॉय अलुक्कास: समूह के चेयरमैन जॉय अलुक्कास ने बताया, "युद्ध शुरू होने के शुरुआती हफ्ते सबसे खराब थे। अब लोग गहनों के बजाय गोल्ड कॉइन और बार (Bullion) ज्यादा खरीद रहे हैं।"
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
दुबई गोल्ड एंड ज्वैलरी ग्रुप के डायरेक्टर आशीष गर्ग का कहना है कि टूरिस्ट्स के न आने और एशियाई प्रवासियों (Asians) द्वारा खरीदारी टालने से भारतीय चेन पर बुरा असर पड़ा है।
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खाड़ी देशों में भारतीय पकड़ और नुकसान
खाड़ी के ज्वैलरी बाजार में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 50% है। विश्लेषकों के अनुसार,
भारत का गोल्ड और ज्वैलरी सेक्टर अपनी सालाना वैल्यू सेल का 20-25% हिस्सा पश्चिम एशिया से ही हासिल करता है। रिलायंस, डाबर और मैरिको जैसे FMCG ब्रांड्स की तुलना में ज्वैलरी सेक्टर पर इस संकट की मार सबसे ज्यादा पड़ी है।"
अब आगे क्या?
हालात इतने अनिश्चित हैं कि भारतीय ज्वैलरी दिग्गजों ने खाड़ी देशों में नए स्टोर खोलने के प्लान को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है। अब कंपनियां अपना घाटा पूरा करने के लिए अमेरिका और सुदूर पूर्व (Far East) के बाजारों की ओर रुख कर रही हैं।
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