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    Gold Price Crash: सेंट्रल बैंक की रिकॉर्ड खरीदी, गोल्ड रिजर्व भी 35 साल के हाई पर; फिरभी क्यों गिर रहा सोना? 2 वजह

    Updated: Sat, 28 Mar 2026 09:42 PM (IST)

    Gold Targe Price 2026: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सोने के बाजार में उतार-चढ़ाव है। सेंट्रल बैंक रिकॉर्ड सोना खरीद रहे हैं, जिससे ग्लोबल रिजर्व 35 साल के उ ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली| मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच गोल्ड मार्केट इस समय बड़े उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ सेंट्रल बैंक रिकॉर्ड खरीदारी कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कीमतों में तेज गिरावट (gold silver price crash) ने निवेशकों को उलझन में डाल दिया है।

    केडिया एडवाइजरी के ताजा स्वॉट एनालिसिस (SWOT Analysis) से साफ है कि गोल्ड में लॉन्ग टर्म में मजबूती दिखा रहा है, लेकिन शॉर्ट टर्म में दबाव बना हुआ है।

    800 टन गोल्ड की हो सकती है खरीदारी

    सबसे पहले बात स्ट्रेंथ की करें तो सेंट्रल बैंकों का गोल्ड पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है। ग्लोबल गोल्ड रिजर्व (global gold reserve) अब तक कुल का 30% तक पहुंच गया है, जो 1991 के बाद सबसे ज्यादा है। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि इस साल करीब 800 टन गोल्ड की खरीदारी हो सकती है, जो सालाना माइन प्रोडक्शन का 26% है। अब समझते हैं किन दो वजहों से गिरावट आ रही है?

    पहली वजह- कॉमेक्स की इन्वेंटरी 32% तक टूटी

    वैश्विक बाजार कॉमेक्स पर इन्वेंटरी करीब 32% तक गिर चुकी है, जिससे सप्लाई टाइट हो रही है। BRICS देशों के पास 2300 टन से ज्यादा रिजर्व है, जो लॉन्ग टर्म में कीमतों को सपोर्ट देता है। लेकिन कमजोरियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    दूसरी वजह- फेड की रेट कट की संभावना खत्म

    गोल्ड की कीमतों (gold price) में एक हफ्ते में 10.5% की बड़ी गिरावट आई, जो 1983 के बाद सबसे खराब प्रदर्शन है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 2026 में रेट कट की संभावना लगभग खत्म कर दी है और ब्याज दरें 3.75% के आसपास बनी हुई हैं। तुर्की ने सिर्फ दो हफ्तों में 58.4 टन गोल्ड बेच दिया, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ी। साथ ही, कमोडिटी ETFs से 11 अरब डॉलर की निकासी भी हुई है।

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    चढ़ा तो ₹2 लाख तक पहुंच सकते हैं दाम

    अब अवसर की बात करें तो अगर गोल्ड 4,578 डॉलर के ऊपर निकलता है, तो शॉर्ट कवरिंग से तेज उछाल आ सकता है। बैंक ऑफ कोरिया की ईटीएफ में एंट्री से नई लिक्विडिटी आ सकती है।मिडिल ईस्ट तनाव अगर बढ़ता है तो 'वॉर प्रीमियम' वापस आ सकता है। बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए 6,000 डॉलर प्रति औंस (भारतीय करेंसी में करीब 2 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) (gold target price 2026) का लॉन्ग टर्म टारगेट अभी भी बना हुआ है।

    गिरा तो ₹1.17 लाख हो सकती है कीमत

    हालांकि खतरे भी कम नहीं हैं। अगर गोल्ड 4,066 डॉलर के नीचे टिकता है तो कीमतें 3,500 डॉलर (भारतीय करेंसी में करीब 1.17 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) (gold price target 2026) तक फिसल सकती हैं।

    पोलैंड जैसे देश गोल्ड बेच सकते हैं, जिससे सप्लाई बढ़ेगी। लगातार महंगा तेल और मजबूत डॉलर भी गोल्ड पर दबाव डाल सकते हैं। भारत जैसे बाजारों में ज्यादा वोलैटिलिटी से ज्वैलरी डिमांड प्रभावित हो सकती है।

    कुल मिलाकर, गोल्ड का फंडामेंटल मजबूत है, लेकिन मौजूदा समय में बाजार पूरी तरह ग्लोबल इकोनॉमी, ब्याज दरों और जियोपॉलिटिक्स पर निर्भर है। निवेशकों के लिए सलाह यही है कि जल्दबाजी से बचें और बड़े मूव के लिए अहम लेवल्स पर नजर रखें।