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    Gold Fair Value: क्या ₹1 लाख है सोने का सही भाव, यहां पहुंचने की कितनी संभावना? IAGP कैलकुलेशन से समझें

    Updated: Sat, 28 Mar 2026 02:02 PM (IST)

    सोने में गिरावट के बीच क्या कीमतें ₹1 लाख तक पहुंचने की संभावना है। इस पर कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया ने अपनी राय रखी और 'इंफ्लेशन एडजस्टेड गोल्ड प्रा ...और पढ़ें

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    सोने की कीमतों में हाल के दिनों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

    नई दिल्ली। 'नहीं यार, सोने का भाव एक लाख रुपये ही सही है, और देखना गोल्ड इस प्राइस पर आएगा।' इन दिनों गोल्ड में जारी गिरावट से भाव को लेकर लोग कई तरह के आकलन कर रहे हैं। लोगों को लगता है कि सोने (Gold Prices) में जबरदस्त तेजी आने के बाद अब एक अच्छा फॉल देखने को मिल रहा है। लेकिन, सवाल है कि क्या वाकई सोना ((Gold Crash) गिरावट के दौर में एक लाख रुपये के स्तर तक पहुंच सकता है। अगर ऐसा हुआ तो लोगों को खरीदारी का एक अच्छा मौका मिलेगा। इस सवाल को लेकर जागरण बिजनेस ने कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया से बात की।

    उन्होंने सोने में तेजी और गिरावट के कारण व महंगाई के हिसाब से गोल्ड प्राइस के कैलकुलेशन के बारे में विस्तार से समझाया है। आइये आपको बताते हैं कि अजय केडिया के अनुसार, गोल्ड की फेयर वैल्यू क्या है और मौजूदा स्तर से सोने में और कितनी गिरावट आ सकती है?

    क्या सोने की कीमतें और गिरेंगी?

    अजय केडिया ने कहा कि सोने के भाव में तेजी और मंदी के लिए अभी सबसे बड़ा फैक्टर ईरान-अमेरिका युद्ध, बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों में कटौती की संभावना है। अगर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो यह सोने के लिए बहुत नेगेटिव होगा और कीमतें गिरेंगी। इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी की प्रबल संभावना है क्योंकि टैरिफ और युद्ध के चलते अमेरिका में महंगाई तेजी से बढ़ी है इसलिए फेड, पॉलिसी रेट कम करने का रिस्क नहीं लेगा बल्कि दरें बढ़ा भी सकता है।

    चूंकि, राष्ट्रपति ट्रंप पहले से फेड चेयरमैन जिरोम पॉवेल पर पॉलिसी रेट कट करने का दबाव डाल रहे हैं, साथ ही उन्होंने नए फेड चेयरमैन के नाम का एलान भी कर दिया है। ऐसे में अगर इंटरेस्ट रेट कम होते हैं तो सोने में तेजी आ सकती है।

    महंगाई के हिसाब से गोल्ड प्राइस?

    मार्केट एक्सपर्ट अजय केडिया ने कहा गोल्ड के प्राइस का सबसे फेयर कैलकुलेशन एक खास पद्धति से होता है, जिसे 'इंफ्लेशन एडजेस्टेड गोल्ड प्राइस' कहा जाता है। इसका मतलब है सोने की वह कीमत, जिसमें समय के साथ बढ़ी हुई महंगाई के असर को जोड़कर उसकी 'फेयर वैल्यू' निकाली गई हो।

    उन्होंने 2 उदाहरण देते हुए समझाया कि साल 2000 में इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड की कीमत 270 डॉलर प्रति औंस थी। लेकिन, 2000 से 2011 के बीच 2000 डॉलर पर औंस पर पहुंच गई। दरअसल, इस अवधि में महंगाई तेजी से बढ़ी और इसी के चलते सोना भी तेजी से भागा। वहीं, 2022 के बाद 2026 तक गोल्ड प्राइस 5600 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया। इस अवधि में सोने में तेजी लाने वाले सारे फैक्टर्स एक साथ देखने को मिले। इनमें कोरोना महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, जियोपॉलिटिकल टेंशन, सेंट्रल बैंक की बायिंग, डी-डॉलराइजेशन, गोल्ड ईटीएफ में बढ़ता इन्वेस्टमेंट और हाल के वर्षों में ब्याज दरों में कटौती शामिल हैं।

    टाइम करेक्शन में चला गया गोल्ड

    अजय केडिया की मानें तो पिछले 4 साल में जिन अहम कारणों से सोने के भाव में तेजी आई है, वे सारे फैक्टर्स अब मैच्योर हो गए हैं। इस वजह से सोना टाइम करेक्शन में चला गया है। ऐसे में अहम सोने में अगले 6 महीनों तक एक दायरे में कारोबार देखेंगे और इसके बाद ही तेजी की संभावना होगी। हालांकि, ईरान-अमेरिका युद्ध पर स्पष्टता मिलने के बाद ही सोने की चाल को लेकर कोई स्पष्टता सामने आएगी।

    क्या 1 लाख रुपये है सोने का सही भाव?

    आखिरी में सबसे अहम सवाल का जवाब, क्या 1 लाख रुपये प्रति दस ग्राम सोने का सही भाव है। इस पर अजय केडिया ने कहा कि इंफ्लेशन एडजेस्टेड गोल्ड प्राइस के हिसाब से देखें तो गोल्ड अभी जिस प्राइस पर ट्रेड कर रहा है वह बिल्कुल फेयर है। उन्होंने कहा कि 1 लाख 15 हजार से एक लाख 20 हजार का भाव, सोने के लिए एक अहम सपोर्ट होगा। वहीं, ऊपर की ओर 1 लाख 65 हजार का लेवल गोल्ड के लिए बड़ा रेजिस्टेंस होगा।