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    Gold Silver Price Crash: गोल्ड-सिल्वर में गिरावट और क्रूड में उबाल, खरीदने का है सही समय? एक्सपर्ट ने दिया टारगेट

    Updated: Sun, 03 May 2026 04:34 PM (IST)

    Gold Silver Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट पर विशेषज्ञ अनुज गुप्ता ने महंगाई और कच्चे तेल के बढ़ते दाम जैसे कारणों पर प्रकाश ड ...और पढ़ें

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली| सोने और चांदी की कीमतों में पिछले कुछ समय से जारी गिरावट ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। एक तरफ वर्ल्ड बैंक, गोल्डमैन सैक्स और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट्स ने सोने के भविष्य को लेकर बड़े दावे किए हैं, तो दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच क्रूड ऑयल आसमान छूने लगा है। खास बात यह है कि 29 जनवरी के बाद यानी पिछले 90 दिनों में सोना 41 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम से ज्यादा और चांदी करीब 1.70 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक सस्ती (gold silver price crash) हो चुकी है।

    अब सवाल यह है कि आखिर सोने-चांदी में यह गिरावट क्यों है? क्या क्रूड का बढ़ता भाव आपकी जेब पर भारी पड़ेगा? ऐसे ही सवालों के जवाब जानने के लिए जागरण बिजनेस ने अपने वीकली शो प्रॉफिट की मंडी में बात की सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एंड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता से। जिसमें उन्होंने 12 सवालों में पूरा कंफ्यूजन दूर किया और सोने-चांदी का टारगेट प्राइस भी दिया। साथ ही, खरीदने का सही समय भी बताया। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

    सवाल 1. सोने और चांदी में पिछले एक हफ्ते में भारी गिरावट क्यों देखी जा रही है?

    अनुज गुप्ता: गिरावट की मुख्य वजह इन्फ्लेशनरी प्रेशर है। क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने से पूरी दुनिया के सेंट्रल बैंक्स पर महंगाई का दबाव बढ़ गया है। इसके चलते ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है, जिससे निवेशक गोल्ड-सिल्वर से पैसा निकालकर बैंकों में जमा कर रहे हैं।

    सवाल 2. वर्ल्ड बैंक और अन्य संस्थाओं की रिपोर्ट का मार्केट पर क्या असर पड़ रहा है?

    अनुज गुप्ता: ये रिपोर्ट्स मैक्रो-लेवल व्यू देती हैं। 2025 में गोल्ड-सिल्वर ने शानदार रिटर्न दिए थे, लेकिन 2026 की शुरुआत से तस्वीर अलग है। ये रिपोर्ट्स बताती हैं कि सोने में अब 2025 जैसे रिटर्न मिलने की संभावना कम है और बाजार में स्थिरता या थोड़ा दबाव रह सकता है।

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    सवाल 3. क्रूड ऑयल का दाम 120 डॉलर के पार जाने का भारतीय इकॉनमी पर क्या असर है?

    अनुज गुप्ता: भारत अपनी ज़रूरत का 80% क्रूड इंपोर्ट करता है। जब हम महंगा तेल खरीदेंगे, तो महंगाई बढ़ना तय है। इसका असर ट्रांसपोर्टेशन, मैन्युफैक्चरिंग और अंततः आम जनता की रोजमर्रा की चीजों पर पड़ता है।

    सवाल 4. क्या सोने-चांदी में यह गिरावट आगे भी जारी रहेगी?

    अनुज गुप्ता: शॉर्ट टर्म में दबाव रह सकता है, लेकिन हम लॉन्ग टर्म यानी दिवाली तक सकारात्मक हैं। जैसे ही जिओपॉलिटिकल तनाव कम होगा और क्रूड के दाम स्थिर होंगे, सोने में दोबारा तेजी देखने को मिलेगी।

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    सवाल 5. क्या फिजिकल गोल्ड की जगह डिजिटल गोल्ड में निवेश बेहतर है?

    अनुज गुप्ता: बिल्कुल। फिजिकल ज्वैलरी में मेकिंग चार्जेस और जीएसटी के कारण आप पहले दिन ही नुकसान में होते हैं। वहीं, डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ईटीएफ (ETF) में कोई मिलावट का डर नहीं है और मेकिंग चार्जेस भी नहीं लगते, इसलिए यह निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प है।

    सवाल 6. RBI ने जो लंदन से 104000 किलोग्राम सोना भारत मंगाया है, उसका क्या मतलब है?

    अनुज गुप्ता: यह बहुत सामान्य प्रक्रिया है। हमने पहले फंड की जरूरत के लिए सोना गिरवी (Pledge) रखा था। अब हमने वह पैसा चुका दिया है, तो वह गोल्ड वापस आ गया है। सेंट्रल बैंक्स हमेशा अपने पास गोल्ड होल्डिंग्स बढ़ाना चाहते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उसे इस्तेमाल किया जा सके।

    सवाल 7. सोने-चांदी का टारगेट प्राइस क्या हो सकता है? (Gold Silver Forecast)

    अनुज गुप्ता: मौजूदा स्थिति में सोना 4,400 डॉलर से 4,800 डॉलर प्रति औंस (₹1.34 लाख से ₹1.46 लाख तक ) के दायरे में रह सकता है। दिवाली तक इसके 5,000-5,200 डॉलर (करीब 1.58 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम) तक जाने की उम्मीद है। वहीं चांदी लोएस्ट में 65 डॉलर और हाईएस्ट 85 डॉलर प्रति औंस (₹1.98 लाख से 2.60 लाख रुपए तक) तक पहुंच सकती है।

    सवाल 8. चांदी के दाम गिरने की सबसे बड़ी वजह क्या है?

    अनुज गुप्ता: चांदी का बड़ा इस्तेमाल इंडस्ट्रीज (सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स) में होता है। क्रूड महंगा होने से एनर्जी कॉस्ट बढ़ गई है, जिससे औद्योगिक डिमांड कम हुई है। साथ ही, चांदी सोने की चाल को भी फॉलो करती है, जिससे इसमें बड़ी गिरावट आई है।

    सवाल 9. क्या मानसून का सोने-चांदी की मांग पर कोई असर पड़ता है?

    अनुज गुप्ता: जी हां, ग्रामीण इलाकों में मानसून का सीधा संबंध मांग से होता है। अगर मानसून अच्छा रहा और फसलें अच्छी हुईं, तो ग्रामीण इलाकों से चांदी की डिमांड बढ़ेगी।

    सवाल 10. क्रूड का महंगा होना गैस सिलिंडरों पर कैसे असर डाल रहा है?

    अनुज गुप्ता: क्रूड से ही गैस का डिस्टिलेशन होता है। जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो सप्लाई चेन प्रभावित होती है। डिमांड-सप्लाई के असंतुलन के कारण कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ जाते हैं।

    सवाल 11. प्लास्टिक और अन्य दैनिक उत्पादों पर क्रूड का कितना असर पड़ता है?

    अनुज गुप्ता: हमारी जिंदगी का 90-95% प्लास्टिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद है। ब्रश से लेकर साबुन तक, जो भी पेट्रोकेमिकल से बनता है, क्रूड महंगा होने पर उन सभी की कीमतों में इजाफा होना तय है।

    सवाल 12. निवेशकों के लिए अभी क्या सलाह है?

    अनुज गुप्ता: यह गिरावट एक अवसर है। 2008 या 2020 की तरह, जो निवेशक इस 'डिप' (गिरावट) में खरीदारी करेंगे, उन्हें आने वाले समय में अच्छे रिटर्न मिलेंगे। घबराने के बजाय अनुशासित निवेश जारी रखें।

    अनुज गुप्ता का मानना है कि भले ही शॉर्ट टर्म में महंगाई और उतार-चढ़ाव निवेशकों को डरा रहे हों, लेकिन लंबी अवधि के लिए सोने में निवेश अभी भी सुरक्षित माना जा रहा है। हालांकि, क्रूड के बढ़ते दाम आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ा सकते हैं।

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