Gold Silver Price: सोना-चांदी ₹15000 तक सस्ता! खरीदें या नहीं, एक्सपर्ट ने क्या दिए टारगेट? 15 सवालों में Inside Story
Gold Silver Prediction: सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जिसमें एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने इसके कारणों और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला है। उन ...और पढ़ें
नई दिल्ली| सोने-चांदी के दिन लद गए हैं। ऐसा हम नहीं- बल्कि आंकड़े कह रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों से सोना-चांदी निवेशकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे। आमतौर पर युद्ध या वैश्विक तनाव बढ़ने पर इन दोनों की कीमतों में तेजी आ जाती है। लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग है। मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है, फिर भी सोना-चांदी लगातार दबाव (gold silver price crash) में हैं। एक तरफ अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा बदल रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और फेडरल रिजर्व से जुड़े बयान निवेशकों की रणनीति बिगाड़ रहे हैं।
पिछले हफ्ते कितना सस्ता हुआ सोना-चांदी?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंप पर शुक्रवार, 10 जुलाई को अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1,43,478 रुपए (gold price today) प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। जबकि चांदी 2,22,664 रुपए (silver price today) प्रति किलोग्राम पर क्लोज हुई। पिछले कारोबारी हफ्ते की बात करें पर सोना 3000 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 15000 रुपए प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर गिरावट क्यों आ रही है? क्या अभी खरीदारी करनी चाहिए? आगे कीमतें कहां तक जा सकती हैं? और क्या यह गिरावट निवेश का मौका है या खतरे की घंटी? आने वाले दिनों में सोने-चांदी के दाम कहां तक गिर सकते हैं?
इन सभी सवालों के जवाब दिए सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एंड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने। उन्होंने जागरण बिजनेस के वीकली शो 'प्रॉफिट की मंडी' में सोने-चांदी के साथ-साथ क्रूड-ऑयल की कीमतों पर अपनी राय रखी। उन्होंने क्लियर किया कि आने वाले दिनों में क्रूड के दाम बढ़ने से भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है या नहीं? पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:
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सवाल 1: सोने-चांदी में इतनी बड़ी गिरावट आखिर क्यों आ रही है?
अनुज गुप्ता: इस समय बाजार पूरी तरह खबरों और बयानों के आधार पर चल रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का कोई बयान आता है तो बाजार तुरंत प्रतिक्रिया देता है। वहीं अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की टिप्पणियां भी कीमतों को तेजी से ऊपर-नीचे कर रही हैं। अभी बाजार किसी एक ट्रेंड पर नहीं बल्कि स्टेटमेंट बाय स्टेटमेंट चल रहा है। इसलिए एक दिन तेजी आती है तो अगले ही दिन बड़ी गिरावट देखने को मिल जाती है।
सवाल 2: मिडिल ईस्ट में युद्ध चल रहा है, फिर भी सोना-चांदी महंगे क्यों नहीं हो रहे?
अनुज गुप्ता: आमतौर पर युद्ध के समय निवेशक सुरक्षित निवेश यानी गोल्ड की तरफ भागते हैं। लेकिन इस बार हालात अलग हैं। बाजार अब केवल युद्ध नहीं देख रहा, बल्कि यह भी देख रहा है कि अमेरिका का फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों पर क्या फैसला लेगा। इसके अलावा युद्ध की खबरें भी तेजी से बदल रही हैं। कभी युद्ध तेज होता है तो कभी संघर्ष विराम की खबर आ जाती है। यही वजह है कि सुरक्षित निवेश की मांग लगातार मजबूत नहीं बन पा रही और कीमतों में स्थायी तेजी देखने को नहीं मिल रही।
सवाल 3: क्या फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें अभी सबसे बड़ा फैक्टर बन गई हैं?
अनुज गुप्ता: हां। फिलहाल सबसे ज्यादा नजर फेडरल रिजर्व की अगली रणनीति पर है। अगर अमेरिका ब्याज दरें बढ़ाता है तो डॉलर मजबूत होता है और सोने पर दबाव बढ़ता है। वहीं अगर ब्याज दरें स्थिर रहती हैं या कटौती के संकेत मिलते हैं तो सोने को सहारा मिल सकता है। अभी निवेशकों को सबसे ज्यादा अमेरिकी डेटा और फेड की मीटिंग पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि आने वाले महीनों की दिशा वहीं से तय होगी।
सवाल 4: क्या अभी सोने और चांदी में गिरावट खत्म होने वाली है?
अनुज गुप्ता: अभी उतार-चढ़ाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि बड़ी गिरावट का एक हिस्सा आ चुका है और बाजार अब मजबूत सपोर्ट जोन के आसपास पहुंच रहा है। अगर फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर बहुत सख्त रुख नहीं अपनाता तो यहां से बाजार को कुछ सहारा मिल सकता है। लेकिन निवेशकों को अभी भी जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है क्योंकि बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
सवाल 5: क्या आगे सोने-चांदी में और गिरावट आ सकती है?
अनुज गुप्ता: संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर फेडरल रिजर्व के फैसले बाजार की उम्मीदों के खिलाफ आते हैं या डॉलर और मजबूत होता है तो सोना-चांदी में एक और दौर की गिरावट देखने को मिल सकती है। अब डाउनसाइड पहले की तुलना में सीमित हो सकती है, क्योंकि काफी करेक्शन पहले ही हो चुका है।
सवाल 6: क्या अभी सोना खरीदना चाहिए या थोड़ा इंतजार करना बेहतर रहेगा?
अनुज गुप्ता: अगर आपकी जरूरत शादी, त्योहार या गहने खरीदने की है तो मौजूदा स्तर पर खरीदारी की जा सकती है। लेकिन अगर निवेश के नजरिए से खरीदना चाहते हैं तो पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रहेगा। हर गिरावट पर थोड़ी-थोड़ी खरीदारी करें। इससे अगर कीमतें और नीचे आती हैं तो औसत लागत कम हो जाएगी और लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ेगी।
सवाल 7: आने वाले महीनों में सोने का टारगेट प्राइस क्या हो सकता है?
अनुज गुप्ता: अगर इंटरनेशनल मार्केट की बात करें तो 3,950 डॉलर और 3,800 डॉलर प्रति औंस का स्तर गोल्ड के लिए मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं घरेलू बाजार यानी MCX में अगर कीमतें ₹1.20 लाख से ₹1.25 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास आती हैं, तो इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छा खरीदारी का मौका माना जा सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कीमतें निश्चित रूप से वहीं तक जाएंगी। बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व, डॉलर इंडेक्स और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी।
सवाल 8: चांदी कहां तक गिर सकती है और खरीदारी का सही लेवल क्या माना जा रहा है?
अनुज गुप्ता: चांदी में उतार-चढ़ाव सोने से भी ज्यादा देखने को मिल रहा है। इंटरनेशनल मार्केट में 50 से 55 डॉलर प्रति औंस का दायरा मजबूत सपोर्ट बन सकता है। अगर कोई निवेशक पहले ऊंचे भाव पर खरीद चुका है, तो इन स्तरों पर धीरे-धीरे एवरेजिंग की जा सकती है। वहीं जो पहली बार निवेश करना चाहते हैं, वे भी एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी कर सकते हैं।
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सवाल 9: MCX में तेजी और सर्राफा बाजार में गिरावट क्यों दिखी?
अनुज गुप्ता: यह सवाल कई लोगों के मन में है। आखिर ऐसा कैसे हुआ कि इंटरनेशनल मार्केट और MCX में तेजी रही, लेकिन दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना करीब ₹1,000 और चांदी करीब ₹8,000 तक सस्ती हो गई?
इसकी सबसे बड़ी वजह फिजिकल डिमांड की कमी रही। युद्ध और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बढ़ने के बाद कई लोगों ने अपना पुराना सोना और चांदी बेच दिया। इससे सर्राफा बाजार में सप्लाई बढ़ गई और स्थानीय कीमतों पर दबाव आ गया। दूसरी ओर, फ्यूचर्स मार्केट में अलग तरह की ट्रेडिंग चल रही थी। इसी वजह से दोनों बाजारों में अंतर देखने को मिला।
सवाल 10: जिन्होंने रिकॉर्ड ऊंचे भाव पर सोना-चांदी खरीदा था, वे अब क्या करें?
अनुज गुप्ता: जब सोना करीब ₹1.83 लाख और चांदी करीब ₹4.20 लाख के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, तब काफी लोगों ने FOMO यानी तेजी छूट जाने के डर में खरीदारी की थी।
अब सवाल यह है कि क्या नुकसान में बेच देना चाहिए? अगर आपने फिजिकल गोल्ड या सिल्वर खरीदा है तो घबराकर बेचने की जरूरत नहीं है। यदि आपके पास अतिरिक्त निवेश की क्षमता है तो गिरावट में थोड़ी-थोड़ी खरीदारी करके औसत लागत कम की जा सकती है। लेकिन अगर नया निवेश संभव नहीं है, तो फिलहाल वेट एंड वॉच की रणनीति बेहतर मानी जा रही है।
सवाल 11: इस महीने किन तारीखों पर सबसे ज्यादा नजर रखनी चाहिए?
अनुज गुप्ता: कमोडिटी मार्केट के लिए इस महीने दो घटनाएं बेहद अहम मानी जा रही हैं-
- अमेरिका के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े
- फेडरल रिजर्व की बैठक
इन दोनों घटनाओं से यह संकेत मिलेगा कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर क्या रणनीति रहने वाली है। अगर फेड का रुख सख्त रहता है तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं नरम संकेत मिलने पर कीमतों को सहारा मिल सकता है।
सवाल 12: अमेरिका के रोजगार और महंगाई के आंकड़ों से भारत में सोने-चांदी के दाम क्यों बदल जाते हैं?
अनुज गुप्ता: यह सवाल लगभग हर निवेशक पूछता है। असल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। जब अमेरिका से रोजगार, महंगाई या ब्याज दरों से जुड़े मजबूत आंकड़े आते हैं, तो डॉलर मजबूत हो सकता है। मजबूत डॉलर का मतलब होता है कि सोना दूसरे देशों के खरीदारों के लिए महंगा हो जाता है, जिससे उसकी मांग घट सकती है। यही वजह है कि अमेरिकी डेटा आने के कुछ मिनटों के भीतर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें बदल जाती हैं और उसका असर भारत के बाजारों पर भी दिखाई देता है।
सवाल 13: अगर क्रूड ऑयल महंगा हुआ तो क्या भारत में पेट्रोल-डीजल भी महंगा हो जाएगा?
अनुज गुप्ता: फिलहाल इसकी संभावना कम दिखाई दे रही है। जब तक ब्रेंट क्रूड 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहता है, तब तक भारत पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा।
हालांकि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई प्रभावित होती है, तो क्रूड में तेज उछाल आ सकता है। ऐसी स्थिति में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल बाजार यह मानकर चल रहा है कि वैश्विक सप्लाई सामान्य रहती है तो सरकार को ईंधन की कीमतों में बड़ा बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सवाल 14: अगर क्रूड ऑयल सस्ता रहता है तो क्या पेट्रोल-डीजल के दाम घट सकते हैं?
अनुज गुप्ता: इस सवाल का जवाब 'हां' है, लेकिन तुरंत नहीं। भारत ने पिछले कुछ महीनों में ऊंचे भाव पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा था। इसलिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की औसत खरीद लागत अभी भी ज्यादा है।
अगर अगले दो-तीन महीने तक क्रूड 60 से 80 डॉलर प्रति बैरल के बीच बना रहता है, तो कंपनियों की लागत कम होगी। ऐसे में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है। यानी सिर्फ एक-दो दिन की गिरावट से नहीं, बल्कि लंबे समय तक सस्ते क्रूड से आम लोगों को फायदा मिलेगा।
सवाल 15: क्या अभी क्रूड ऑयल में निवेश या ट्रेडिंग का मौका है?
अनुज गुप्ता: मौजूदा स्तर पर क्रूड में ज्यादा गिरावट की संभावना कम दिखाई देती है। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है तो कीमतें दोबारा तेजी पकड़ सकती हैं। निकट भविष्य में क्रूड 70 से 90 डॉलर प्रति बैरल की रेंज में कारोबार कर सकता है। अगर हालात बिगड़ते हैं तो 75-80 डॉलर का स्तर जल्दी देखने को मिल सकता है। हालांकि, क्रूड ऑयल निवेश की नहीं, ट्रेडिंग की कमोडिटी है। फिजिकल रूप से कच्चा तेल खरीदकर रखना संभव नहीं है। इसलिए अगर कोई निवेशक इसमें अवसर तलाशना चाहता है तो MCX फ्यूचर्स या कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट के जरिए ही ट्रेडिंग करनी चाहिए। बिना अनुभव के इसमें पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।
अनुज गुप्ता की सलाह है कि गोल्ड-सिल्वर में इस वक्त उतार-चढ़ाव काफी ज्यादा है। अगर आपका उद्देश्य शादी, त्योहार या घरेलू जरूरत है तो मौजूदा स्तर पर धीरे-धीरे खरीदारी की जा सकती है। लेकिन अगर निवेश करना चाहते हैं तो एकमुश्त रकम लगाने से बचें। हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा निवेश करें। इससे औसत खरीद मूल्य कम होगा और बाजार में अचानक आने वाली गिरावट का असर भी सीमित रहेगा।