Gold Silver Price Crash: सोना-चांदी में भारी गिरावट क्यों, खरीदें या रुकें? क्या होंगे टारगेट प्राइस, एक्सपर्ट से समझें
Gold Silver Price Today: देश में सोना-चांदी की कीमतों में पिछले एक हफ्ते में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञ अनुज गुप्ता ने गिरावट के कारणों (पीएम ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| देश में सोना-चांदी के दामों में पिछले एक हफ्ते में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। सोना करीब ₹2700 तक सस्ता हो गया, जबकि चांदी में ₹8100 से ज्यादा की बड़ी गिरावट (gold silver price crash) दर्ज की गई। ऐसे में आम खरीदार, निवेशक और ज्वैलरी खरीदने वाले लोग परेशान हैं कि आखिर ये गिरावट क्यों आ रही है? क्या आगे और गिरावट आएगी? या फिर यही खरीदारी का सही मौका है?
इसे लेकर जागरण बिजनेस के वीकली शो 'प्रॉफिट की मंडी' में सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एंड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता (Anuj Gupta Gold Silver Price Prediction) से खास बातचीत की। जिसमें उन्होंने सोने-चांदी में गिरावट, भविष्य के टारगेट प्राइस से लेकर निवेश की तरीके तक बताए। तो चलिए 10 सवालों में समझते हैं पूरी खबर। लेकिन उससे पहले समझते हैं सोने-चांदी के ताजा रेट क्या हैं?
MCX पर कहां पहुंचे सोने-चांदी के ताजा रेट?
शुक्रवार, 22 मई यानी कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन सोना 1,58,679 रुपए प्रति 10 ग्राम पर क्लोज (gold price today) हुआ। सोमवार, 18 अप्रैल को सोना 1,60,790 रुपए प्रति 10 ग्राम के लेवल पर ओपन हुआ था। इस हिसाब से एक हफ्ते में सोना 2686 रुपए सस्ता (gold price crash) हो गया।
वहीं 18 अप्रैल को चांदी 2,80,000 रुपए (silver price today) प्रति किलोग्राम पर ओपन हुई और 22 मई को 2,71,846 रुपए के लेवल पर क्लोज हुई। यानी एक हफ्ते में चांदी ₹8154 सस्ती (silver price crash) हो गई। अब बात करते हैं सोने-चांदी के आउटलुक की, कि आने वाले दिनों सोने-चांदी की चाल कैसी रहने वाली है?
सवाल 1: सोने-चांदी में अचानक इतनी बड़ी गिरावट क्यों आ रही है?
अनुज गुप्ता: देखिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हाल ही में देशवासियों से अपील की थी कि वे कुछ समय के लिए सोना न खरीदें। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Reserve) को बचाना और मजबूत करना है। पिछले साल हमारा काफी फॉरेन रिजर्व सोने के आयात (Import) में खर्च हुआ था। पीएम की इस अपील के बाद भारत में सोने के इंपोर्ट में कमी आने की संभावना बढ़ी है। चूंकि भारत दुनिया में सोने का बहुत बड़ा खरीदार है, इसलिए हमारी मांग घटने की उम्मीद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसके भाव टूट रहे हैं।
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सवाल 2: क्या केवल पीएम मोदी की अपील ही एकमात्र वजह है या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कोई खेल चल रहा है?
अनुज गुप्ता: नहीं, केवल यही एक वजह नहीं है। इसके पीछे वैश्विक आर्थिक कारण भी हैं। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक, जैसे अमेरिका का फेडरल रिजर्व (US Fed), बैंक ऑफ जापान और खुद हमारा आरबीआई (RBI), इस समय बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। अमेरिका में ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ने की 70% तक आशंका जताई जा रही है। जब भी अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो लोग सोने से पैसा निकालकर बैंकों या सरकारी बॉन्ड्स में लगाने लगते हैं। इसी मॉनिटरी टाइटनिंग के डर से इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी पर भारी दबाव है।
सवाल 3: सोमवार को जो सोना-चांदी ऊंचे स्तर पर थे, वे आज कहां पहुंचे? जरा आंकड़ों का गणित समझाइए।
अनुज गुप्ता: बाजार में इस समय काफी उतार-चढ़ाव है। अगर हम हालिया आंकड़ों को देखें, तो कारोबारी सत्र के पहले दिन घरेलू बाजार (MCX) पर सोना करीब 1,62,000 के ऊंचे स्तरों के आसपास देखा जा रहा था, जो अब गिरकर लगभग 1,59,000 के स्तर पर आ गया है। वहीं चांदी की बात करें तो सोमवार को यह करीब 2,99,000 के आसपास थी और अब करीब ₹25,000 की बड़ी गिरावट के साथ 2,72,000 के स्तर के आसपास आ चुकी है। इंटरनेशनल मार्केट (Comex) में भी सोना 4,500 के आसपास कारोबार कर रहा है।
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सवाल 4: एक आम खरीदार के लिए सबसे जरूरी सवाल- आने वाले दिनों में सोने और चांदी का शॉर्ट टर्म टारगेट प्राइस क्या हो सकता है?
अनुज गुप्ता: मौजूदा हालात को देखते हुए साफ है कि बाजार में डिमांड बहुत कमजोर है। फिलहाल कोई शादियों का सीजन नहीं है और न ही कोई बड़ा त्योहार है। ऊपर से सरकार जो बॉन्ड बेच रही है, उससे बॉन्ड यील्ड बढ़ गई है और निवेशकों का रुझान वहां शिफ्ट हो रहा है। इन सब बातों को देखते हुए शॉर्ट टर्म में सोने-चांदी में और नरमी आ सकती है। सोना ₹1,57,000 से ₹1,55,000 तक जा सकता है और चांदी ₹2,65,000 से ₹2,60,000 तक फिसल सकती है।
सवाल 5: जिन्होंने जनवरी या उसके बाद महंगे रेट पर सोना-चांदी खरीद लिया था और अब नुकसान में हैं, उन्हें क्या करना चाहिए? क्या वे अपना सोना बेच दें?
अनुज गुप्ता: मैं पैनिक में आकर सोना बेचने के बिल्कुल भी फेवर में नहीं हूं। निवेशकों को मेरी यही सलाह है कि वे अपने सोने-चांदी को होल्ड रखें, यानी बेचें नहीं। अगर आप इतिहास उठाकर देखेंगे, तो जब भी कोई बड़ी वैश्विक मंदी या युद्ध (जैसे 2008 का संकट या 2020 का कोरोना काल) आया है, उसके बाद सोने ने हमेशा बहुत तगड़ा रिटर्न दिया है। यह मौजूदा गिरावट शॉर्ट टर्म है, लॉन्ग टर्म में सोने का भविष्य सुरक्षित है। थोड़ा धैर्य रखें, अच्छे रिटर्न जरूर मिलेंगे।
सवाल 6: जो लोग इस गिरावट में नया सोना या चांदी खरीदना चाहते हैं, उनके लिए आपकी क्या सलाह है?
अनुज गुप्ता: जो लोग पिछली तेजी में खरीदारी करने से चूक गए थे, उनके लिए यह गिरावट एक बेहतरीन मौका (Down Opportunity) लेकर आई है। लेकिन ध्यान रहे, सारा पैसा एक साथ न लगाएं। मेरी सलाह होगी कि आप थोड़ा सा इंतजार करें और जैसे-जैसे कीमतों में और गिरावट आए, वैसे-वैसे छोटी-छोटी क्वांटिटी में सोना-चांदी अपने पोर्टफोलियो में जोड़ते जाएं। टुकड़ों में की गई खरीदारी हमेशा फायदेमंद रहती है।
सवाल 7: बाजार में एक तरफ सोना-चांदी गिर रहे हैं, लेकिन कॉपर, जिंक, एल्युमिनियम जैसे बेस मेटल्स उछल रहे हैं। ऐसा क्यों?
अनुज गुप्ता: यह बहुत ही दिलचस्प बात है। बेस मेटल्स पूरी तरह से इंडस्ट्रियल डिमांड पर चलते हैं। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें न काटने और क्रूड ऑयल में आई हालिया गिरावट से यह उम्मीद जगी है कि औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इसके अलावा, युद्ध खत्म होने की स्थिति में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए मेटल्स की जरूरत सबसे पहले होगी। डिफेंस सेक्टर में भी इनकी भारी मांग है। यही वजह है कि कॉपर जैसी चीजें ₹1,350 के पार ट्रेड कर रही हैं।
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सवाल 8: क्या आम निवेशकों को इस समय सोने-चांदी को छोड़कर बेस मेटल्स (जैसे कॉपर, निकल, जिंक) में निवेश कर देना चाहिए?
अनुज गुप्ता: देखिए, यह सोचना बिल्कुल गलत है कि तांबा या कोई और बेस मेटल अगला सोना बन जाएगा। दोनों बिल्कुल अलग चीजें हैं। सोना-चांदी एक एसेट क्लास हैं, जिनमें समय के साथ वैल्यू कम (Depreciation) नहीं होती। आज लिया गया सोना 10 साल बाद भी कीमती रहेगा। लेकिन बेस मेटल्स इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट हैं, ये सिर्फ शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग या हेजिंग के लिए ठीक हैं, लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए नहीं। चूंकि भारत में अभी बेस मेटल्स के ईटीएफ (ETF) भी उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए आम खरीदार को इनसे दूर रहकर सोने-चांदी पर ही भरोसा जताना चाहिए। अगर निवेश करना ही है, तो आप शेयर बाजार में मौजूद हिंदुस्तान जिंक या हिंदुस्तान कॉपर जैसी कंपनियों के स्टॉक्स खरीद सकते हैं।
सवाल 9: कच्चे तेल (Crude Oil) में भी पिछले कुछ दिनों में भारी गिरावट आई है, इसका हमारी जेब और सोने पर क्या असर पड़ेगा?
अनुज गुप्ता: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बयान (ईरान से बातचीत सकारात्मक दौर में होने) के बाद कच्चे तेल में 7 से 8% की गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड $105 और डब्ल्यूटीआई $100 के आसपास आ गया है। जब क्रूड सस्ता होता है, तो महंगाई कम होती है। अब कनेक्शन समझिए- जब महंगाई बढ़ती है, तो उसे रोकने के लिए सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं, जिससे लोग सोने से पैसा निकालकर बैंकों में डाल देते हैं और सोना गिर जाता है। लेकिन अगर सेंट्रल बैंक ब्याज दरें नहीं बढ़ाएंगे, तो क्रूड और गोल्ड एक ही दिशा में चलेंगे। फिलहाल क्रूड के गिरने से आने वाले 4-5 महीनों में यह $80 तक आ सकता है, जिससे बाजार में स्थिरता आएगी।
सवाल 10: आम जनता के लिए इस पूरी स्थिति का लब्बोलुआब क्या है? आरबीआई (RBI) का इस पर क्या स्टैंड हो सकता है?
अनुज गुप्ता: आम जनता के लिए सीधी बात यह है कि अभी सोने-चांदी के भाव बहुत ज्यादा बढ़ने के आसार नहीं हैं, बल्कि थोड़ी और गिरावट आ सकती है। जहां तक आरबीआई का सवाल है, तो हमारा देश काफी हद तक डॉलर की मांग और विदेशी मुद्रा भंडार पर निर्भर करता है। आरबीआई पहले यह देखेगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और दुनिया के अन्य बड़े केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर क्या कदम उठाते हैं। उसी के बाद आरबीआई भारतीय बाजार को संभालने के लिए कोई फैसला लेगा।
सर्राफा बाजार का हाल: ग्राहकों के लिए तरस रहे हैं ज्वैलर्स
इधर, दिल्ली सराफा बाजार के अध्यक्ष योगेश सिंघल ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि पीएम मोदी की अपील के बाद बाजारों में पूरी तरह सन्नाटा छाया हुआ है। सर्राफा बाजार पिछले 6 महीनों से मंदी झेल रहा था, लेकिन विदेशी मुद्रा बचाने की इस अपील के बाद ज्वैलरी इंडस्ट्री के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कारीगर और कर्मचारी खाली बैठे हैं। ग्राहकों का बजट बिगड़ने के कारण बाजार में 18 कैरेट या 9 कैरेट की नई ज्वैलरी की भी मांग नहीं आ रही है। एसोसिएशन ने सरकार को गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को नए सिरे से प्रभावी बनाने का लिखित प्रस्ताव भेजा है, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी बच सके और घरेलू ज्वेलरी व्यापार भी चलता रहे।
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