सर्च करे
Home

Trending

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Gold Demand: टैक्स हुआ भारी, सोने पर पड़ी मार करारी! 15% इंपोर्ट टैक्स से बाजार में हाहाकार, 70% घटी डिमांड

    Updated: Sat, 30 May 2026 04:03 PM (IST)

    Gold Demand: भारत में सोने पर आयात शुल्क 15% बढ़ने के बाद इसकी मांग में 70% की भारी गिरावट आई है। बढ़ती महंगाई और ऊँची कीमतों के कारण उपभोक्ता नई खरीद ...और पढ़ें

    preferred source google
    News Article Hero Image

    देश में सोने की मांग 70% घटी

    HighLights

    1. सोने पर 15% आयात शुल्क लागू हुआ।

    2. देश में सोने की मांग 70% घटी।

    3. महंगाई, ऊंची कीमतों से खरीद प्रभावित हुई।

    नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में कई दिनों से गिरावट का दौर जारी है। मध्य पूर्व संघर्ष की वजह से देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने की कोशिश जारी है। इसी कड़ी में पीएम मोदी ने देशवासियों से सोना ना खरीदने की अपील की थी। इसके साथ ही सरकार ने सोने पर आयात शुल्क (Import Duty On Gold) को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। इसकी वजह से सोने की मांग में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ज्वेलरी उद्योग से जुड़े संगठनों के अनुसार, टैक्स बढ़ने के बाद देशभर में सोने की मांग करीब 70 फीसदी तक घट गई है।

    ज्वेलरी उद्योग के अनुमान बताते हैं कि 27 मई को समाप्त हुए पखवाड़े में देश में सोने की मांग घटकर (Gold Demand Decline) लगभग 7.5 टन रह गई। पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 25 टन थी। सोने की खरीदारी में आई इस बड़ी गिरावट ने ज्वेलर्स और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।

    सोने की डिमांड में भारी गिरावट

    केंद्र की मोदी सरकार ने 13 मई से सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty On Gold) बढ़ाने का फैसला लागू किया था। इसके बाद GST को जोड़कर सोने पर कुल कर भार 9.18% से बढ़कर 18.45% तक पहुंच गया है। इंपोर्ट ड्यूटी की लागत का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ा है, जिससे लोग सोने की खरीद से दूरी बना रहे हैं।

    इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, देशभर के ज्वेलर्स से मिल रही रिपोर्टों में मांग में तेज गिरावट की पुष्टि हुई है। खासतौर पर असंगठित क्षेत्र, जो देश के लगभग 65 फीसदी स्वर्ण कारोबार का हिस्सा है, इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।

    खबरें और भी

    IBJA के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा, "पूरे भारत के जौहरियों से मिल रही रिपोर्टों से पता चलता है कि आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद मांग में 70 प्रतिशत की गिरावट आई है।"

    क्यों घटी सोने की डिमांड?

    भारत में सोने की घटती डिमांड को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि केवल इंपोर्ट ड्यूटी ही मांग घटने की वजह नहीं है। ईंधन और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने भी लोगों की क्रय शक्ति को प्रभावित किया है। बढ़ती महंगाई के बीच लोग सोने जैसी वैकल्पिक और महंगी खरीदारी को फिलहाल टाल रहे हैं।

    सोने की ऊंची कीमतों ने भी ग्राहकों का रुझान बदल दिया है। वर्तमान में 999 शुद्धता वाला सोना मुंबई के स्पॉट मार्केट में करीब 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। ऐसे में ग्राहक भारी और महंगे आभूषणों के बजाय हल्के वजन तथा कम कैरेट वाली ज्वेलरी खरीदना पसंद कर रहे हैं।

    दक्षिण भारत, जिसे देश के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता क्षेत्रों में गिना जाता है, वहां भी मांग में कमजोरी देखने को मिल रही है। ज्वेलर्स का कहना है कि ग्राहक अब अपने बजट के भीतर ही खरीदारी कर रहे हैं और अतिरिक्त खर्च से बच रहे हैं।

    ज्वेलरी खरीदने वालों की संख्या घटी और सोने को बेचने वालों की बढ़ी

    एक दिलचस्प बदलाव यह भी देखने को मिल रहा है कि नई ज्वेलरी खरीदने वालों की संख्या घट रही है, जबकि पुराने सोने को बेचने वालों की संख्या बढ़ रही है। कई ग्राहक बढ़ी हुई कीमतों का फायदा उठाकर पुराने गहने बेचकर नकदी जुटा रहे हैं।

    वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिसर्च हेड कविता चाको ने बताया, "घोषणा के तुरंत बाद बड़ी रिटेल चेन में शुरू में कुछ घबराहट भरी खरीदारी देखने को मिली, क्योंकि कीमतें बदलने से पहले ही उपभोक्ता खरीदारी करने के लिए उमड़ पड़े थे।"

    हालांकि बड़े ज्वेलरी ब्रांडों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम देखने को मिला है, क्योंकि उनके पास पर्याप्त स्टॉक और शादी-ब्याह से जुड़ी मांग का सहारा है। लेकिन छोटे और मध्यम स्तर के ज्वेलर्स के सामने बिक्री और मुनाफे दोनों को लेकर चुनौती बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की कीमतें ऊंची बनी रहीं और उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव जारी रहा, तो 2026 की दूसरी तिमाही में भी सोने की मांग कमजोर रह सकती है। ऐसे में आने वाले महीनों में स्वर्ण बाजार की दिशा काफी हद तक कीमतों और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

    यह भी पढ़ें- 'मेड इन इंडिया' का अपमान और एक ताले से किस्मत खोल अंग्रेज से लिया बदला; ऐसे खड़ा किया ₹37294 करोड़ का साम्राज्य