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    10 लाख टन चना दाल खरीदने की तैयारी में सरकार, आखिर क्यों पड़ी बफर स्टॉक बनाने की जरूरत, बढ़ेंगी कीमतें?

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 04:16 PM (IST)

    भारत सरकार अल नीनो के कारण दालों की संभावित कमी से निपटने के लिए 10 लाख टन चना दाल का बफर स्टॉक बनाने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य आवश्यक खाद्या ...और पढ़ें

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    चने का बफर स्टॉक बनाने की तैयारी में सरकार, खरीदेगी 10 लाख टन चना दाल

    नई दिल्ली| भारत सरकार देश में दालों की आपूर्ति में कमी की संभावना से निपटने के लिए 10 लाख टन (mt) चना दाल खरीदने की योजना बना रही है, ताकि पर्याप्त बफर स्टॉक तैयार किया जा सके। इस साल सामान्य से कम मानसून के पूर्वानुमान और अल नीनो की संभावना के चलते जरूरी खाद्यान्नों की कीमतों को स्थिर रखने और मूल्य अस्थिरता को रोकने के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।

    अल नीनो एक ऐसी मौसम संबंधी घटना है जो सूखे के जोखिम को बढ़ाती है और फसल की पैदावार को कम करती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश सामान्य से लगभग 8% कम रहने का अनुमान लगाया है, और यह भी कहा है कि अल नीनो विकसित हो सकता है।

    कीमतें स्थिर रखने का प्रयास

    एक अधिकारी ने मीडिया से बातचीत कर बताया कि खरीद अभियान मौजूदा मूल्य समर्थन तंत्र (Price Support Mechanism) के तहत चलाया जाएगा, जिसमें एजेंसियां किसानों से खरीददारी करेंगी ताकि कृषि बाजार मूल्यों को समर्थन मिले और खुदरा कीमतों में स्थिरता बनी रहे,”

    पर्याप्त बफर स्टॉक बनाने का प्रयास

    वित्त वर्ष 2026 में भारत का चना उत्पादन 6.2% बढ़कर 11.8 मिलियन टन हो गया, जबकि उपज 1.6% बढ़कर 1,238 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई। “चना और पीली मटर पर आयात शुल्क के कारण इस फसल वर्ष में पिछले वर्ष की तुलना में चना उत्पादन में तेजी से सुधार हुआ है। अधिकारी ने कहा कि “इससे घरेलू कीमतों को समर्थन मिला है और बुवाई में वृद्धि हुई है। हम आने वाले महीनों में कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त स्टॉक बनाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं”। कम और अनियमित बारिश से चने की फसल कम हो सकती है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं और खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है।

    बफर स्टॉक पर एक्सपर्ट्स का मत

    IMD के पूर्व महानिदेशक के.जे. रमेश ने मीडिया से कहा “यह अच्छी बात है कि सरकार ने चरणबद्ध तरीके से कदम उठाना शुरू कर दिया है। दलहन और तिलहन मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर फसलें हैं और अनियमित वर्षा से प्रभावित हो सकती हैं।”
    वहीं आनंद ग्रामीण प्रबंधन संस्थान के प्रोफेसर और सहकारी बैंकिंग एवं वित्त स्कूल के डीन राकेश अरावतिया ने कहा, “19 अप्रैल तक चना दाल की कीमत 183.37 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जो एक दिन पहले के 187.47 रुपये से लगभग 4.7% कम है। इससे घरेलू कीमतों को समर्थन मिला है...”

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