Gold Reserves: भारतीय घरों में कितना सोना, दुनिया में भारत किस नंबर पर?
Gold Reserves India: यह लेख भारत के सोने के भंडार का विस्तृत विश्लेषण करता है, जिसमें आरबीआई, खदानों और घरों में मौजूद सोने की मात्रा शामिल है। यह बता ...और पढ़ें

भारतीय घरों में कितना सोना, दुनिया में भारत किस नंबर पर? ये आंकड़ा आपको चौंका देगा!

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नई दिल्ली| दुनियाभर के बाजारों और अर्थव्यवस्थाओं में जब भी हलचल होती है, तो सबकी नजरें एक ही चीज पर टिक जाती हैं। वो है- सोना, जो सिर्फ गहना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त का सबसे भरोसेमंद साथी है। भारत के संदर्भ में यह बात और भी गहरी हो जाती है, क्योंकि यहां सोना घरेलू बचत और संस्कृति का अटूट हिस्सा है। दिवाली, धनतेरस और अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya 2026) जैसे मौकों पर इसकी खरीदारी में जोरदार उछाल देखने को मिलता है।
मिडिल ईस्ट वॉर के बाद भारी गिरावट
हाल के हफ्तों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी से मिडिल ईस्ट में शुरू हुए तनाव के बाद सोने की कीमतों में 10% से ज्यादा की गिरावट आई है। इस बीच कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने भी एक आर्टिकल में भारत में सोने की संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि,
"भारत में पोटेंशियल तो बहुत है, लेकिन प्रोडक्शन अब भी बेहद कम है।"
भारत के पास आखिर कितना सोना है?
बीबीसी से बात करते हुए IIM अहमदाबाद के 'इंडिया गोल्ड पॉलिसी सेंटर' की प्रमुख प्रोफेसर सुंदरावल्ली नारायणस्वामी ने भंडार को तीन मुख्य हिस्सों में बांटकर समझाया।
- RBI का भंडार: प्रोफेसर नारायणस्वामी के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI gold reserves) के पास आधिकारिक तौर पर करीब 800 से 820 टन सोना है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के फरवरी 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि यह भंडार अब 880 टन तक पहुंच चुका है।
- खदानों में मौजूद सोना: भारत में करीब 518.23 मिलियन टन सोने का अयस्क (Gold Ore) मौजूद है। लेकिन प्रोफेसर सुंदरावल्ली स्पष्ट करती हैं कि यह शुद्ध सोना नहीं है। इसमें से केवल 500-600 टन असली सोना ही निकाला जा सकता है।
- घरों में जमा सोना: भारत की असली ताकत लोगों के घरों में है। अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास 25,000 से 27,000 टन सोना (India household gold) जमा है।
"भारत में हर साल 600-700 टन सोना आयात होता है और निर्यात न के बराबर है, यही वजह है कि यह सोना घरों में जमा होता जा रहा है।"
- प्रोफेसर सुंदरावल्ली नारायणस्वामी
गोल्ड रिजर्व में भारत का स्थान: हमसे आगे कौन?
आधिकारिक सरकारी भंडार (Official Gold Reserves) के मामले में भारत दुनिया में 9वें स्थान पर आता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, ये देश भारत से आगे हैं:
| देश/संस्था | सोने का भंडार |
| अमेरिका | 8,133 टन |
| जर्मनी | 3,350 टन |
| IMF (संस्था) | 2,814 टन |
| चीन | 2,298 टन |
| इटली | 2,452 टन |
| फ्रांस | 2,437 टन |
| रूस | 2,332 टन |
| स्विट्ज़रलैंड | 1,040 टन |
| भारत | 880 टन |
| जापान | 846 टन |
घरेलू भंडार: जीडीपी का 88% हिस्सा सोने में
भारतीय घरों में मौजूद सोने की वैल्यू चौंकाने वाली है। मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीयों के पास करीब 3.8 ट्रिलियन डॉलर का सोना है, जो देश की कुल जीडीपी का लगभग 88.8% है। एसोचैम का मानना है कि यह करीब 24,000 टन है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।
MMTC-PAMP इंडिया के MD और CEO समित गुहा ने बताया कि सोने की खपत के तरीके बदल रहे हैं। उन्होंने कुछ अहम फैक्ट्स साझा किए। जैसे-
- खपत में बदलाव: 2025 में 710.9 टन सोने की खपत हुई, जो 2024 (802.8 टन) के मुकाबले मात्रा में 11% कम है।
- रिकॉर्ड वैल्यू: मात्रा भले कम हुई हो, लेकिन रुपयों के मामले में मांग 30% बढ़कर 7,51,490 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
- निवेश की तरफ रुझान: लोग अब गहनों के बजाय बार यानी ब्रिक्स और सिक्कों में निवेश कर रहे हैं। गहनों की मांग 24% गिरी है, जबकि सिक्कों की मांग 17% बढ़ी है।
भारत में खनन कम क्यों है?
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना बाहर से मंगवाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ के विजिटिंग प्रोफेसर संतोष मल्होत्रा के अनुसार, खनन एक बेहद खर्चीला काम है। इसके लिए भारी निवेश और उन्नत तकनीक चाहिए, जिसमें सरकार और निजी कंपनियां फिलहाल पीछे हैं।
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खनन में क्या-क्या चुनौतियां?
- महंगी खोज: सोने की खदानें ढूंढना जोखिम भरा है।
- कम गुणवत्ता: भारत के अयस्क में प्रति टन केवल 1-3 ग्राम सोना निकलता है, जो इसे घाटे का सौदा बनाता है।
- आंकड़े: 2023-24 में भारत ने सिर्फ 1.6 टन सोना निकाला, जबकि चीन ने अकेले 375 टन उत्पादन किया।
सोना हमारी अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है। चूंकि भारत सोने का बड़ा आयातक (Importer) है, इसलिए जब भी वैश्विक बाजार में सोने के दाम बढ़ते हैं, तो भारतीय रुपये पर दबाव आता है और उसकी कीमत गिर जाती है।
भारत के लिए सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि एक आर्थिक सुरक्षा कवच है जो सरकारी तिजोरियों से ज्यादा आम आदमी की अलमारी में धड़कता है।
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