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    Rice Procurement: देश में चावल की बंपर खरीद, 5 करोड़ टन पहुंचा आंकड़ा, क्या है सरकारी स्टॉक का हाल?

    Updated: Wed, 06 May 2026 05:47 PM (IST)

    भारत ने अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच 50 मिलियन टन चावल की रिकॉर्ड खरीद की है, जो पिछले साल से 6% अधिक है। सरकार इस बढ़े हुए स्टॉक को इथेनॉल उत्प ...और पढ़ें

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    5 करोड़ टन हुई चावल की सरकारी खरीद (AI Image)

    नई दिल्ली| भारत ने चावल की खरीद के मामले में नई ऊंचाई हासिल की है। अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच सरकार ने करीब 50 मिलियन टन चावल खरीद की है जो पिछले साल के मुकाबले 6% अधिक है। ये आंकड़े बताते हैं कि इस साल सरकार ने किसानों से बड़ी मात्रा में फसल की खरीद की है। इस बार सर्दियों की फसल का भी बड़ा योगदान रहा है, जिसमें करीब 1.21 मिलियन टन चावल की खरीद शामिल है।

    ये रहा खरीद का आंकड़ा

    सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए कुल 56.66 मिलियन टन चावल खरीदने का लक्ष्य रखा है। हालांकि इसमें खरीफ के 487 लाख टन और रबी के 79.60 लाख टन का दोनों सीजन की फसलों को शामिल किया गया है। अब तक के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल के अंत तक लगभग 49.86 मिलियन टन चावल खरीदा जा चुका है। इस खरीद के साथ किसानों को सीधा फायदा पहुंचा है, क्योंकि उनकी उपज का सही दाम मिल है।

    भंडारण बढ़ने से नई चुनौती

    50 मिलियन टन चावल खरीद हुई, जो इस वक्त तक पिछले साल के मुकाबले 6 फीसदी अधिक रही। इस बार चावल की खरीद में अलग-अलग राज्यों का योगदान रहा है। अधिक मात्रा में चावल की खरीद से सरकारी स्टॉक काफी मजबूत हुआ है। वहीं कृषि मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 में खरीफ सीजन में चावल का उत्पादन रिकॉर्ड 123.93 मिलियन टन तक भी पहुंच सकता है। अब इस स्टॉक को संभालना और सही जगह पर इस्तेमाल करना भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।

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    सरकार डिस्टिलरी को दे रही चावल

    सरकार पिछले कुछ समय से इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। आपको बता दें कि इथेनॉल बनाने में गन्ना, मक्का और चावल का इस्तेमाल होता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चावल के सरप्लस स्टॉक को मैनेज करने के लिए सरकार चावल की बिक्री पर भी जोर दे रही है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2025-26 के दौरान सरकार ने पहले ही रिकॉर्ड 10.8 मिलियन टन चावल बेचा है, जिसमें से 5.2 मिलियन टन चावल इथेनॉल बनाने के लिए डिस्टिलरी को दिया गया है।
    इसके अलावा राज्यों को चावल की अधिक से अधिक बिक्री का प्रयास किया जा सकता है और ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के माध्यम से भी चावल बेचने पर जोर दिया जा सकता है।

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