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    चीनी की स्टॉक लिमिट तय होने से बिगड़ जाएंगे चीनी कारोबारियों और रीसेल के हालात? NFCSF ने उठाई केंद्र सरकार से मांग

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 02:47 PM (IST)

    सरकार द्वारा चीनी के स्टॉक लिमिट तय करने के बाद NFCSF ने इसकी समीक्षा की मांग की है। उनका मानना है कि यह फैसला पूर्वोत्तर राज्यों में आपूर्ति और चीनी ...और पढ़ें

    NFCSF ने केंद्र सरकार से चीनी की स्टॉक लिमिट में फिर विचार करने का आग्रह किया है।

    NFCSF ने केंद्र सरकार से चीनी की स्टॉक लिमिट में फिर विचार करने का आग्रह किया है।

    HighLights

    1. सरकार ने चीनी की स्टॉक लिमिट तय की।

    2. NFCSF ने इस फैसले की समीक्षा की मांग की।

    3. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर नकारात्मक प्रभाव की आशंका।

    नई दिल्ली| भारत में इन दिनों चीनी लगातार चर्चा में है। पहले भारत सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक लगाई थी। उसके बाद चीनी के स्टॉक लिमिट की घोषणा की। सरकार के इस फैसले के बाद से नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) ने चीनी के स्टॉक होल्डिंग लिमिट की समीक्षा करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि चीनी को स्टोर करने की नई सीमा लागू होने से चीनी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और चीनी पर आधारित मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स के संचालन पर भी बुरा असर पड़ सकता है।

    सरकार ने लगाई चीनी स्टॉक लिमिट पर लगाम

    केंद्र सरकार ने चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी को रोकने और घरेलू सप्लाई को नियंत्रित रखने के लिए चीनी कारोबारियों और डीलर्स के लिए भंडारण की लिमिट (Sugar Stock Limit) तय कर दी है। अब कोई भी चीनी डीलर 4000 क्विंटल से अधिक चीनी नहीं रख सकता है। इसके अलावा किसी भी समय पर 30 दिन से अधिक का चीनी भंडार मौजूद नहीं होना चाहिए। केंद्र सरकार का ये आदेश देशभर में 1 अगस्त 2026 से लागू है।

    सरकार के इस फैसले के बाद NFCSF का मानना है कि नई सीमा लागू होने से पूर्वोत्तर राज्यों में चीनी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और चीनी पर आधारितमैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स बुरी तरह से प्रभावित होंगे।

    मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्सस पर दिखेगा बुरा असर

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक NFCSF ने शुगर (कंट्रोल) ऑर्डर, 2025 में “डीलर” की विस्तारित परिभाषा पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें अब चीनी को कच्चे माल के रूप में उपयोग करने वाले प्रोसेसर और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स को भी शामिल किया है। महासंघ ने कहा कि कन्फेक्शनरी, बिस्कुट, पेय पदार्थ, दवा और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियां चीनी का उपयोग केवल अपने उत्पादन के लिए करती हैं, न कि व्यापार या रीसेल (Resale) के लिए। ऐसे उद्योगों पर भी वही भंडारण सीमा लागू करने से उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं।

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    नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जो उद्योग केवल अपने उत्पादन (Captive consumption) के लिए चीनी का उपयोग करते हैं, उन्हें भंडारण सीमा से छूट दी जाए, या उनके लिए अलग और उपयुक्त भंडारण सीमा निर्धारित की जाए।

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