ईरान-US पीस डील की आहट से कच्चे तेल में नरमी, $100 से नीचे आया क्रूड; होर्मुज नाकेबंदी ने बिगाड़ रखा है तेल का खेल
ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 5% से अधिक की गिरावट ला दी है। WTI क्रूड 90 ...और पढ़ें
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ईरान-अमेरिका शांति समझौते की उम्मीदों से तेल सस्ता
HighLights
ईरान-अमेरिका शांति समझौते की उम्मीदों से तेल सस्ता।
कच्चे तेल की कीमतों में 5% से अधिक गिरावट।
हॉर्मुज स्ट्रेट खुलने से आपूर्ति सुधरेगी, भारत को लाभ।
नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते (US Iran Peace Deal) की उम्मीदों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को नीचे ला दिया है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच निवेशकों को अब यह भरोसा मिलने लगा है कि हालात और ज्यादा नहीं बिगड़ेंगे। इसी वजह से तेल बाजार में दबाव देखने को मिला और इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट (Crude Oil Crash) दर्ज की गई।
गुरुवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं ब्रेंट क्रूड भी 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। हालांकि शुरुआती कारोबार में दोनों बेंचमार्क में हल्की रिकवरी भी देखने को मिली, लेकिन बाजार का रुख अभी भी कमजोर बना हुआ है। कुछ दिन पहले तक तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
क्यों गिरे कच्चे तेल के दाम
तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावना मानी जा रही है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि अमेरिका के साथ दोबारा युद्ध होने की संभावना कम है, हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर कोई हमला होता है तो ईरान जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि वह ईरान के साथ समझौते को लेकर जल्दबाजी में नहीं हैं, लेकिन उनका लक्ष्य एक बेहतर और स्थायी युद्धविराम समझौता करना है।
ट्रंप ने कहा कि वह किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनका फैसला सिर्फ अमेरिका नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए है।
हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान-अमेरिका में तनाव
हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। यह समुद्री रास्ता दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। पिछले तीन महीनों से यह मार्ग बंद होने की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है और किसी एक देश का इस पर नियंत्रण नहीं होना चाहिए।
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गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई की थी, जिसके बाद ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट पर सख्ती बढ़ा दी थी। इसके बाद से वैश्विक बाजार में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी। हालांकि अब शांति वार्ता की उम्मीदों ने निवेशकों को राहत दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाता है और हॉर्मुज स्ट्रेट दोबारा पूरी तरह खुल जाता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट देखने (Crude Price May Crash) को मिल सकती है। इसका फायदा भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को भी मिलेगा, क्योंकि सस्ता कच्चा तेल पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम कर सकता है।
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