चीन-अमेरिका नहीं, इस मुस्लिम देश ने जनवरी में खरीदा सबसे ज्यादा सोना, रिपोर्ट में खुलासा; बेचने वालों में कौन आगे?
जनवरी में वैश्विक सोने की खरीद में 80% की गिरावट आई, केंद्रीय बैंकों ने केवल 5 टन सोना खरीदा। उज्बेकिस्तान 9 टन सोना खरीदकर सबसे बड़ा खरीदार बना, जबकि ...और पढ़ें
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चीन-अमेरिका नहीं, इस मुस्लिम देश ने जनवरी में खरीदा सबसे ज्यादा सोना, रिपोर्ट में खुलासा; बेचने वालों में कौन आगे?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| वैश्विक बाजार में सोने की खरीद भले ही धीमी पड़ गई हो, लेकिन जनवरी 2026 में कुछ देशों ने अपने गोल्ड रिजर्व में बड़ी बढ़ोतरी की। हैरानी की बात यह है कि चीन, अमेरिका या ब्रिटेन नहीं बल्कि उज्बेकिस्तान जनवरी में सबसे ज्यादा सोना खरीदने वाला देश बना।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने मिलकर सिर्फ 5 टन सोना खरीदा, जबकि 2025 में हर महीने औसतन 27 टन की खरीद हो रही थी। यानी गोल्ड खरीद की रफ्तार में करीब 80% की गिरावट दर्ज की गई।
किन देशों ने खरीदा सोना?
जनवरी में कुल खरीद कम रही, लेकिन कई देशों ने अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाए। इनमें सबसे आगे उज्बेकिस्तान रहा।
| देश | जनवरी में खरीदा सोना |
| उज्बेकिस्तान | 9 टन |
| मलेशिया | 3 टन |
| चेक गणराज्य | सीमित खरीद |
| इंडोनेशिया | सीमित खरीद |
| चीन | लगातार खरीद जारी |
| सर्बिया | सीमित खरीद |
उज्बेकिस्तान ने 9 टन सोना खरीदकर अपना कुल गोल्ड रिजर्व बढ़ाकर 399 टन कर लिया। वहीं चीन ने लगातार 15वें महीने अपने रिजर्व में सोना जोड़ा, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अभी भी गोल्ड रिजर्व बढ़ाने की रणनीति पर कायम है।
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किन देशों ने बेचा सोना?
जनवरी में कुछ देशों ने अपने रिजर्व घटाए भी।
| देश | बेचा गया सोना |
| रूस | 9 टन |
| बुल्गारिया | 2 टन |
रूस का केंद्रीय बैंक जनवरी में सबसे बड़ा नेट सेलर रहा, जबकि बुल्गारिया ने भी 2 टन सोना बेचा।
सेंट्रल बैंकों ने धीमी की सोना खरीद
WGC की एशिया-पैसिफिक सीनियर रिसर्च लीड मारिसा सलीम के मुताबिक,
साल की शुरुआत में सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और मौसमी कारणों की वजह से कई केंद्रीय बैंकों ने फिलहाल खरीद धीमी कर दी। साल की शुरुआत अक्सर कई केंद्रीय बैंकों के लिए शांत अवधि होती है, जिससे खरीद के आंकड़ों पर असर पड़ सकता है।"
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण सोने की कीमतों में तेज उछाल आया है। ऐसे में कई रिजर्व मैनेजर बाजार की स्थिति का आकलन करने के लिए खरीद को कुछ समय के लिए टाल देते हैं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विश्लेषकों के मुताबिक यह गिरावट स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी ब्रेक हो सकती है। 2022 के बाद से कई देश डॉलर पर निर्भरता कम करने और अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाने के लिए लगातार सोना खरीद रहे हैं।
ऐसे में अगर वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता जारी रहती है, तो लंबी अवधि में सोने की कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिल सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक निवेशकों के लिए गिरावट के समय चरणबद्ध निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।
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