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    कंपनी से मिला 5 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस काफी है? बिजनेसमैन नितिन कामथ ने कहा- इसके भरोसे ना रहें, जानिए क्यों?

    Updated: Thu, 26 Mar 2026 01:47 PM (IST)

    नितिन कामथ ने बताया कि कंपनी द्वारा दिया गया हेल्थ इंश्योरेंस अक्सर अपर्याप्त होता है। उन्होंने व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने की सलाह दी, क्योंकि ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली। आज के वक्त में हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) बहुत जरूरी है, खासकर मिडिल क्लास के लिए यह बहुत मायने रखता है। आमतौर, प्राइवेट कंपनीज में जॉब करने वाले कर्मचारियों को ऑफिस की ओर से मेडिक्लेम पॉलिसी मिलती है लेकिन क्या कॉरपोरेट हेल्थ इंश्योरेंस प्लान पर्याप्त होता है। यह सवाल अक्सर उठाया जाता है क्योंकि इंडिविजुअल और कॉरपोरेट हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में सुविधाओं को लेकर काफी अंतर होते हैं। इस मुद्दे पर देश के मशहूर बिजनेसमैन और ब्रोकिंग फर्म जीरोधा के को-फाउंडर नितिन कामथ ने अपनी राय रखी है।

    दरअसल, कंपनी की ओर दिए जाने वाले हेल्थ इंश्योरेंस प्लान (Insurance Plan Limits) में कुछ लिमिट्स हो सकती हैं, इनमें कवरेज लिमिट, कुछ खास ट्रीटमेंट पर कवरेज नहीं और नौकरी बदलने पर पॉलिसी खोने का जोखिम बना रहता है, इसलिए इन कमियों के कारण कर्मचारियों को गंभीर परिस्थितियों में अपर्याप्त बीमा का सामना करना पड़ सकता है। इन चिंताओं पर रिएक्ट करते हुए, नितिन कामथ ने हाल ही में लोगों से अपील की है कि वे केवल कंपनी की ओर से मिले हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर न रहें।

    कंपनी और इंडिविजुअल पॉलिसी में क्या अंतर?

    नितिन कामथ ने लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के महत्व पर जोर दिया। नितिन कामथ ने कहा, "मुझे सचमुच में हैरानी होती है कि कितने लोग इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं खरीदते क्योंकि वे मानते हैं कि उनकी कंपनी द्वारा दी जाने वाली ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी पर्याप्त है। लेकिन कंपनी, कर्मचारियों को दिए जाने वाले हेल्थ इंश्योरेंस प्लान की लागत पर ज्यादा ध्यान देती है ना कि पॉलिसी से जुड़ी सुविधाओं पर।"

    नितिन कामथ ने कॉरपोरेट हेल्थ इंश्योरेंस प्लान को लेकर उसकी सब-लिमिट पर भी बात कही, और कहा कि ये लिमिट्स कमरे के किराए को सीमित कर सकती हैं, जिससे डॉक्टर की फीस, प्रोसेस चार्जेस और अस्पताल के खर्च जैसे अन्य रिबंरसमेंट में कमी आ सकती है। इसका नतीजा यह होता है कि क्लेम अमाउंट उम्मीद से काफी कम हो सकता है।

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    '5-10 लाख की पॉलिसी पर्याप्त नहीं'

    नितिन कामथ के कहा, "करियर के शुरुआती वर्षों में 5-10 लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर पर्याप्त लग सकता है, लेकिन बाद में यह राशि अपर्याप्त साबित हो सकती है, क्योंकि भारत में मेडिकल इंफ्लेशन करीब 14% वार्षिक होने का अनुमान है। वहीं, कॉर्पोरेट इंश्योरेंस की दरें आमतौर पर स्थिर रहती हैं, जबकि व्यक्तिगत पॉलिसियों को अपग्रेड किया जा सकता है।”

    कामथ ने यह भी बताया कि केवल नियोक्ता द्वारा प्रदान किए गए बीमा पर निर्भर रहने से बाद में जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कॉर्पोरेट समूह पॉलिसी के अंतर्गत कवर होने के दौरान किसी स्वास्थ्य समस्या से ग्रसित हो जाता है और बाद में व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा योजना खरीदने का प्रयास करता है, तो बीमाकर्ता इसे पूर्व-मौजूदा स्थिति मान सकते हैं।

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    नितिन कामथ ने कहा , “ अगर आपके पास कॉरपोरेट और इंडिविजुअल हेल्थ पॉलिसी दोनों हैं तो क्लेम के लिए कॉर्पोरेट पॉलिसी कवर का उपयोग करें, अपनी व्यक्तिगत पॉलिसी का उपयोग ना करें और नो-क्लेम बोनस को बढ़ने दें। लेकिन जब वास्तव में इसकी जरूरत हो, तो आपकी सुरक्षा वही पॉलिसी करती है जो आपके पास है।”