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    शादी हो गई, बच्चा हो गया? चलो अब ले लेते हैं हेल्थ इंश्योरेंस; आपके लिए जल्दी पॉलिसी लेना क्यों जरूरी, जानें 5 फायदे

    By Anand RoyEdited By: Ankit Kumar Katiyar
    Updated: Tue, 31 Mar 2026 03:43 PM (IST)

    Best Time to Buy Health Insurance: 'अभी तो मैं फिट हूं, मुझे इंश्योरेंस की क्या जरूरत?' अगर आप भी इसी भ्रम में हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए है। इसमें जन ...और पढ़ें

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    जल्दी शुरुआत, पक्की सुरक्षा: क्यों स्वास्थ्य बीमा को टालना ठीक नहीं

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली| भारत में आज भी एक अजीब सा ट्रेंड (Health Insurance India) देखने को मिलता है। लोग डॉक्टर के पास तब जाते हैं, जब दर्द बर्दाश्त से बाहर हो जाता है। और हेल्थ इंश्योरेंस तब लेते हैं- जब अस्पताल का बिल बजट से बाहर होने लगता है। अक्सर लोग बीमा को अपनी 'टू-डू लिस्ट' में सबसे नीचे रखते हैं। शादी हो गई? चलो अब बीमा ले लेते हैं। बच्चा होने वाला है? अब पॉलिसी देखनी चाहिए। माता-पिता की तबीयत बिगड़ी? अब कवर की याद आती है।

    लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीमा लेने के लिए किसी "खास मौके" या "बुढ़ापे" का इंतज़ार करना आपकी जेब और सेहत दोनों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है? खासकर युवाओं (Health Insurance for Youngsters) के लिए, जो यह सोचते हैं कि "अभी तो मैं फिट हूं, मुझे क्या ज़रूरत," उनके लिए यह सोच एक बहुत बड़ी वित्तीय गलती साबित हो सकती है।

    बदलता समय और बढ़ती चुनौतियां

    पिछले 10 सालों में मेडिकल सेक्टर की दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है। अब सिर्फ हार्ट सर्जरी या कैंसर का इलाज ही महंगा नहीं है, बल्कि एक सामान्य वायरल बुखार के लिए अस्पताल में भर्ती होना, एमआरआई (MRI) कराना या किसी बड़े स्पेशलिस्ट से सलाह लेना भी आपके महीने भर के बजट को हिला सकता है।

    आजकल की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल ने बीमारियों का गणित बदल दिया है। जो बीमारियां पहले 50-60 की उम्र में होती थीं, वे अब 25-30 साल के युवाओं को अपनी चपेट में ले रही हैं।

    ऐसे में यह सोचना कि "मैं अभी जवान हूं," आपको जोखिम के करीब ले जाता है। भारत में कामकाजी आबादी का करीब 70% हिस्सा आज भी बिना किसी हेल्थ इंश्योरेंस के है। यह एक बहुत बड़ा 'प्रोटेक्शन गैप' है, जिसका सबसे ज्यादा शिकार युवा पीढ़ी हो रही है।

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    जल्दी शुरुआत: आपकी जेब के लिए क्यों है फायदेमंद? (Health Insurance Benefits 2026)

    हेल्थ इंश्योरेंस की दुनिया का एक सीधा सा नियम है: जितनी कम उम्र, उतना कम प्रीमियम। जब आप 20 या 25 की उम्र में पॉलिसी लेते हैं, तो इंश्योरेंस कंपनी आपको 'लो रिस्क' कैटेगरी में रखती है। आप स्वस्थ होते हैं, बीमार होने की संभावना कम होती है, इसलिए आपको बहुत कम खर्च में एक बड़ा कवर मिल जाता है।

    इसके विपरीत, अगर आप 40 की उम्र के बाद बीमा लेते हैं, तो प्रीमियम की राशि काफी बढ़ जाती है। इतना ही नहीं, अगर आपको पहले से कोई बीमारी (जैसे डायबिटीज या बीपी) है, तो कंपनियां आपसे 'लोडिंग चार्ज' के नाम पर अतिरिक्त पैसा वसूलती हैं। यानी, देरी करने का मतलब है- ज्यादा पैसा और कम फायदे।

    वेटिंग पीरियड का 'सीक्रेट' गणित

    हेल्थ इंश्योरेंस में सबसे पेचीदा चीज़ होती है- वेटिंग पीरियड (Waiting Period in Health Insurance)। ज्यादातर पॉलिसियों में पहले से मौजूद बीमारियों (Pre-existing diseases) के लिए 2 से 4 साल का वेटिंग पीरियड होता है।

    • जल्दी लेने का फायदा: अगर आप फिट रहते हुए पॉलिसी लेते हैं, तो आपका वेटिंग पीरियड आपके स्वस्थ दिनों में ही कट जाता है। जब आपको भविष्य में वाकई इलाज की ज़रूरत पड़ती है, तब आपकी पॉलिसी पूरी तरह 'मैच्योर' हो चुकी होती है और आपको एक रुपया भी अपनी जेब से नहीं देना पड़ता।
    • देरी का नुकसान: अगर आप तब बीमा लेते हैं जब बीमारी दस्तक दे चुकी हो, तो आपको कवर के लिए 3 साल इंतज़ार करना पड़ सकता है। सोचिए, बीमारी आज है और बीमा 3 साल बाद काम आएगा। ऐसी स्थिति में इंश्योरेंस का क्या फायदा?

    सिर्फ अस्पताल का बिल नहीं, उससे भी कहीं ज्यादा

    आज का हेल्थ इंश्योरेंस सिर्फ बेड और दवाइयों तक सीमित नहीं है। अगर आप इसे लंबे समय तक बनाए रखते हैं, तो आपको कई एक्स्ट्रा बेनेफिट्स मिलते हैं:

    • नो-क्लेम बोनस (NCB): अगर आप साल भर क्लेम नहीं लेते, तो अगले साल आपका कवर बिना किसी अतिरिक्त प्रीमियम के बढ़ जाता है।
    • फ्री हेल्थ चेक-अप: कई कंपनियां हर साल फ्री बॉडी चेक-अप की सुविधा देती हैं।
    • वेलनेस रिवॉर्ड्स: फिट रहने, रोज़ टहलने या जिम जाने पर भी अब कंपनियां प्रीमियम में छूट या रिवॉर्ड पॉइंट्स देती हैं।
    • टैक्स सेविंग: इनकम टैक्स की धारा 80D के तहत आपको प्रीमियम पर टैक्स की छूट मिलती है, जो आपकी सेविंग्स को बढ़ाता है।

    इंश्योरेंस: सुरक्षा कवच या वित्तीय निवेश?

    हेल्थ इंश्योरेंस को अब एक खर्च की तरह नहीं, बल्कि एक फाइनेंशियल एसेट (वित्तीय संपत्ति) की तरह देखा जाना चाहिए। यह आपको अचानक आने वाले लाखों रुपये के खर्च से बचाता है, जिससे आपकी सालों की जमा-पूंजी सुरक्षित रहती है।

    सरकार भी अब इसे बढ़ावा दे रही है। हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को जीएसटी (GST) के दायरे से बाहर रखने के सुझावों और सुलभ नियमों ने इसे मध्यम वर्ग के लिए और आसान बना दिया है।

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    आपातकाल से पहले की तैयारी

    बीमा होने का सबसे बड़ा मानसिक फायदा यह है कि आप अपनी सेहत को लेकर ज्यादा जागरूक हो जाते हैं। जब आपको पता होता है कि आपके पास कवर है, तो आप छोटी बीमारियों को नज़रअंदाज़ नहीं करते और समय रहते जांच करवाते हैं। यह व्यवहार आपको बड़ी बीमारियों से बचाता है।

    बढ़ती महंगाई और अनिश्चित जीवनशैली के इस दौर में हेल्थ इंश्योरेंस को टालना, अपनी मेहनत की कमाई को जोखिम में डालना है। जल्दी शुरुआत करना सिर्फ समझदारी नहीं, बल्कि आपके परिवार के सुरक्षित भविष्य की नींव है।

    याद रखिए, बीमा तब खरीदा जाना चाहिए जब आपको उसकी ज़रूरत न हो, क्योंकि जब ज़रूरत पड़ती है, तब शायद आपको वह मनचाही शर्तों पर न मिले।

    (लेखक- आनंद रॉय, जनरल इंश्योरेंस काउंसिल की एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य और स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के एमडी एवं सीईओ हैं।)