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    ईरान संकट के बीच MSME और एयरलाइंस को मोदी सरकार का ₹2.55 लाख करोड़ का तोहफा, इमरजेंसी क्रेडिट स्कीम 5.0 को मंजूरी

    Updated: Tue, 05 May 2026 07:39 PM (IST)

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2.55 लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम 5.0 को मंजूरी दी है। यह य ...और पढ़ें

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    MSME को सरकार की बड़ी सौगात, 255000 करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम 5.0 को मंजूरी

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 255000 करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम 5.0 (Emergency Credit Line Guarantee Scheme) को मंजूरी दे दी है। इसमें 5000 करोड़ रुपये एंयरलाइंस के लिए हैं। इस योजना का उद्देश्य 2.55 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त लोन प्रवाह को संभव बनाना और व्यवसायों को अल्पकालिक तरलता संबंधी चुनौतियों से निपटने में सहायता प्रदान करना है।

    इस स्कीम का मकसद, पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए, योग्य कर्जदारों को किसी भी छोटी अवधि की लिक्विडिटी की कमी से निपटने में मदद करने के लिए दी गई अतिरिक्त क्रेडिट सुविधा के तहत डिफॉल्ट होने वाली रकम के लिए, नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) द्वारा सदस्य ऋण देने वाली संस्थाओं (MLIs) को MSMEs के लिए 100% और गैर-MSMEs के साथ-साथ एयरलाइन सेक्टर के लिए 90% क्रेडिट गारंटी कवरेज देना है।

    क्या हैं Emergency Credit Line Guarantee Scheme 5.0 की विशेषता?

    योग्य उधारकर्ता (Eligible Borrowers): वे MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) और गैर-MSME जिनकी पहले से वर्किंग कैपिटल (कामकाजी पूंजी) लिमिट चल रही है। साथ ही, वे पैसेंजर एयरलाइंस जिन पर 31 मार्च 2026 तक क्रेडिट सुविधा (लोन) बकाया है। शर्त यह है कि उनके बैंक खाते 'स्टैंडर्ड' श्रेणी में होने चाहिए (यानी वे डिफॉल्टर नहीं होने चाहिए)।

    गारंटी कवरेज (Guarantee Coverage): MSME के लिए 100% कवर, और गैर-MSME व एयरलाइन सेक्टर के लिए 90% कवर।

    गारंटी फीस (Guarantee Fee): शून्य (कोई फीस नहीं)।

    आर्थिक मदद की सीमा (Quantum of Support): वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4 FY 26) के दौरान इस्तेमाल की गई अधिकतम वर्किंग कैपिटल का 20% तक अतिरिक्त लोन मिलेगा (जिसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये है)।

    एयरलाइंस के लिए यह 100% तक होगा (जिसकी अधिकतम सीमा 1,500 करोड़ रुपये प्रति उधारकर्ता है, जिसके लिए कुछ खास शर्तें माननी होंगी)।

    एक्सपर्ट्स ने किया स्वागत

    सरकार के इस कदम का एक्सपर्ट्स ने स्वागत किया है। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (AEPC) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में घोषित 'आपातकालीन ऋण रेखा गारंटी योजना' (ECLGS) 5.0 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा दी गई मंजूरी का स्वागत किया है, और इसे पश्चिम एशिया संकट के बीच व्यवसायों को सहायता प्रदान करने की दिशा में एक 'समयोचित कदम' बताया है।

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    AEPC के चेयरमैन डॉ. ए. शक्तिवेल ने कहा: "ECLGS 5.0, MSME निर्यातकों को ज़रूरी लिक्विडिटी सहायता देगा, जिससे इस मुश्किल दौर में उत्पादन जारी रखने, रोजगार बचाने और सप्लाई चेन बनाए रखने में मदद मिलेगी। 100% गारंटी और जीरो फीस से क्रेडिट पाना और भी आसान हो जाएगा।"

    Emergency Credit Line Guarantee Scheme: कब तक चुका सकते हैं लोन?

    MSME और गैर-MSME के लिए (एयरलाइन सेक्टर को छोड़कर): लोन की पहली किस्त मिलने की तारीख से 5 साल तक। इसमें 1 साल का मोरेटोरियम (छूट की अवधि, जिसमें EMI नहीं देनी होती) शामिल है।

    एयरलाइन सेक्टर के लिए: लोन की पहली किस्त मिलने की तारीख से 7 साल तक। इसमें 2 साल का मोरेटोरियम शामिल है।

    गारंटी कवर की अवधि (Tenure of Guarantee Cover): गारंटी की अधिकतम अवधि बिल्कुल लोन की अवधि के बराबर ही होगी।

    कब तक के लिए है योजना

    यह योजना NCGTC द्वारा इन दिशानिर्देशों के जारी होने की तारीख से लेकर 31 मार्च 2027 तक मंजूर किए गए सभी लोन पर लागू होगी।

    ईरान संकट से पैदा हुई चुनौतियों से निपटने में मिलेगी मदद

    Emergency Credit Line Guarantee Scheme 5.0 का मकसद कारोबारों को पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से पैदा हुई चुनौतियों से निपटने में मदद करना है।

    इसके अलावा, इससे कारोबारों को अपने कामकाज जारी रखने, रोजगार बचाने और सप्लाई चेन को बनाए रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

    प्रस्तावित क्रेडिट गारंटी योजना कारोबारों, खासकर MSME और एयरलाइन सेक्टर की मदद करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल की जरूरतें बैंक और वित्तीय संस्थानों (FIs) द्वारा पूरी की जा सकें। समय पर लिक्विडिटी (नकदी) उपलब्ध कराकर, यह योजना कारोबारों को सहारा देगी और रोज़गार के नुकसान को रोकेगी। यह बिना किसी रुकावट के घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा देगी और पूरे इकोसिस्टम की मजबूती को बनाए रखेगी।

    Source- PIB

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