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    Jute Stock Limit पर सरकार का बड़ा एक्शन, ट्रेडर्स को मिली डेडलाइन, उद्योग और रोजगार को होगा बड़ा फायदा

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 06:55 PM (IST)

    कच्चे जूट की बढ़ती कीमतों और कमी को देखते हुए सरकार ने व्यापारियों और बेलर्स के लिए स्टॉक सीमा शून्य कर दी है। इस कदम से जमाखोरी रुकेगी, जूट उद्योग को ...और पढ़ें

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    सरकार ने उठाया कच्चा जूट जमा करने वालों के खिलाफ सख्त कदम

    पिछले कई महीनों से कच्चे जूट की कीमत MSP से भी काफी ऊपर चल रही है। जिसके चलते ना सिर्फ जूट उद्योग की लागत बढ़ी है बल्कि मिलों को पर्याप्त कच्चा माल भी नहीं मिल पा रहा है। सरकार ने अब जूट के ट्रेडर्स और बेलर्स के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए स्टॉक लिमिट को घटा कर शून्य कर दिया है। जूट कमिश्नर के नए आदेश के मुताबिक कच्चा जूट जमा करने वालों को अपना सारा जूट स्टॉक जूट मिलों को बेचना होगा.

    जूट स्टॉक करने वालों को मिली डेडलाइन

    सरकार ने कच्चे जूट के स्टॉक में संसोधन करते हुए स्टॉक लिमिट को जीरो कर दिया है, साथ ही मिलों को कच्चा माल बेचने की डेडलाइन भी जारी कर दी है। नए आदेश के बाद जिन बेलर्स के पास बैलिंग प्रेस है और वे जूट कमिश्नर कार्यालय में रजिस्टर्ड हैं उन्हें 5 मई 2026 तक अपना पूरा स्टॉक बेचना होगा, साथ ही 15 मई 2026 तक माल की फिजिकल डिलीवरी भी पूरी करनी होगी। गैर-रजिस्टर्ड बेलर्स और अन्य स्टॉकिस्ट्स पर भी यही नियम लागू रहेगा। हालांकि जूट मिलें/प्रोसेसिंग यूनिट्स को रियायत दी गई है वे अपनी जरूरत के हिसाब से 45 दिनों का स्टॉक रख सकती हैं।

    जमाखोरी के खिलाफ एक्शन

    कच्चे जूट की कीमत बहुत ज्यादा होने जाने और कच्चे माल की उपलब्धता में भारी कमी के चलते सरकार ने स्टॉक लिमिट पर लगाम लगाई है। सरकार ने सभी स्टॉक रखने वाली इकाइयों को हर पखवाड़े (हर 15 दिनों में) अपने जूट स्टॉक की जानकारी जूट स्‍मार्ट (Jute SMART) पोर्टल पर अपडेट करनी होगी। अधिकारियों को जूट स्टॉक का निरीक्षण करने और इस आदेश के उल्लंघन में पाए गए अतिरिक्त स्टॉक को जब्त करने का अधिकार है। आदेश का उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) के तहत कार्रवाई भी की जाएगी।

    जूट उद्योग से जुड़े लोगों को होगा फायदा

    सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ये आदेश जूट की जमाखोरी करने वालों के लिए जारी किया गया है। कच्चे जूट की उपलब्धता में कमी होने से इस उद्योग को खतरा पैदा हो सकता है, साथ ही इससे उद्योग के रोजगार में भी समस्याएं आ सकती हैं। इन उपायों का उद्देश्य जूट की आपूर्ति को स्थिर करना और देश भर के किसानों, निर्माताओं और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है।
    Source: PIB

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