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    केंद्रीय कैबिनेट के ताबड़तोड़ फैसले, 32 लाख कपास किसानों और 5 करोड़ गन्ना किसानों के लिए बड़ा ऐलान

    Updated: Wed, 06 May 2026 10:50 AM (IST)

    केंद्रीय कैबिनेट ने देश में कपास उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए 'कपास कांती' मिशन को मंजूरी दी है, जिससे 32 लाख किसानों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, ...और पढ़ें

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    कपास और गन्ना किसानों के लिए सरकार का बड़ा फैसला

    नई दिल्ली| 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सरकार के ताबड़तोड़ फैसले सामने आए हैं। केंद्रीय कैबिनेट ने देश में कपास का उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कपास कपास उत्पादकता मिशन कपास कांती को मंजूरी दे दी है। ये मिशन अगले 5 साल (2026-27 से 2030-31) तक लागू किया जाएगा।

    इस मिशन के लिए सरकार ने ₹5659.22 करोड़ खर्च करेगी। इसके साथ ही केंद्रीय कैबिनेट ने गन्ना किसानों को भी राहत (Relief to farmers) देते हुए गन्ने के फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस को बढ़ाने का ऐलान किया है।

    32 लाख कपास किसानों को लाभ

    दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस योजना से देश के लगभग 32 लाख कपास किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही साल 2030-31 तक कपास उत्पादन बढ़ाकर 498 लाख गांठ तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है। इससे इंपोर्टेड कपास पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा की बचत करने में भी मदद मिलेगी।

    सरकार का 5-F विजन

    बता दें कि कपास कांति मिशन सरकार के 5-F विजन के तहत लागू होगा। इसका मतलब है खेत से रेशा, रेशे से कारखाने, कारखाने से फैशन और फैशन से विदेश तक। वहीं सरकार का मानना है कि इस मिशन से ना सिर्फ देश के 32 लाख किसानों को फायदा मिलेगा बल्कि इंटरनेशनल टेक्सटाइल मार्केट में भी भारत की प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी। सरकार का फोकस किसान, उद्योग और निर्यात तीनों पर है।

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    5 करोड़ गन्ना किसानों

    कैबिनेट कमेटी ने गन्ना किसानों के हित में फैसला लेते हुए 10.25 फीसदी की बेसिक रिकवरी रेट के लिए ₹365 प्रति क्विंटल FRP को मंजूरी दी है। इससे पहले गन्ने का एफआरपी 355 रुपये प्रति क्विंटल रहा था, यह कीमत 2025-26 के शुगर सीजन (अक्टूबर से सितंबर) के लिए तय की गई थी। FRP 2026-27 सीजन के दौरान गन्ना खरीदने वाली चीनी मिलों के लिए 1 अक्टूबर से लागू होगा जिससे लगभग पांच करोड़ गन्ना किसानों के साथ-साथ चीनी मिलों में कार्यरत लगभग पांच लाख श्रमिकों को लाभ मिलेगा।