कपास से 11% इंपोर्ट ड्यूटी हटाने का प्लान कर रही सरकार, किसने उठाई मांग और किसे मिलेगा फायदा?
सरकार कपास पर लगने वाले 11% आयात शुल्क को हटाने पर विचार कर रही है। यह कदम कपड़ा उद्योग की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करेगा और लाखों रोजगारों ...और पढ़ें
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कपास से 11 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की तैयारी में सरकार
HighLights
कपास पर 11% आयात शुल्क हटाने पर विचार।
कपड़ा उद्योग को कच्चे कपास की कमी से राहत।
लाखों रोजगारों और निर्यात को मिलेगा बढ़ावा।
नई दिल्ली| गारमेंट और टेक्सटाइल इंडस्ट्री की ओर से लंबे समय से कपास से आयात शुल्क हटाने की मांग की जा रही है। अब सरकार की ओर से ये शुल्क हटाया जा सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि इस मामले की बातचीत अपने अंतिम चरण में है। बता दें कि भारत सरकार विदेश से आयात (Import) किए जाने वाले कपास पर 11 प्रतिशत ड्यूटी लगाती है, जिसके चलते घरेलू उद्योंग की लागत बढ़ती है।
क्यों उठी आयात शुल्क हटाने की मांग?
टेक्सटाइल इंडस्ट्री के सामने इस समय कच्चे कपास की भारी कमी है, ऊपर से इसकी बढ़ी हुई कीमतों से कपड़ा उद्योग दबाव में है। आंकड़े बताते हैं कि चालू वर्ष में देश के कपड़ा उद्योग को लगभग 337 लाख गांठ कपास की जरूरत होने का अनुमान है (कपास की एक गांठ= 170 किलोग्राम)। जबकि मांग की तुलना में साल 2025-26 के सीजन में देश में सिर्फ 292.15 लाख गांठ कपास आने की ही संभावना है। इस तरह मांग और सप्लाई के बीच करीब 45 लाख गांठ का बड़ा गैप नजर आता है।
इस कमी को पूरा करने के लिए इंपोर्टेड कपास का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन आयात किए जाने वाले कपास में 11 फीसदी ड्यूटी लगाए जाने की वजह से उसकी कीमत बढ़ती है जिससे गारमेंट इंडस्ट्री की कॉस्ट में इजाफा होता है।
मंत्रालयों के बीच चर्चा जारी
कॉटन से इंपोर्ट ड्यूटी हटाए जाने का मामला दो मंत्रालयों के बीच फंसा है। कपड़ा मंत्रालय और कृषि मंत्रालय की अलग-अलग राय है। इसी मांग पर फिलहाल वित्त, कपड़ा और कृषि मंत्रालय आपस में विचार-विमर्श कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार बातचीत लगभग अंतिम चरण तक पहुंच गई है और किसी भी वक्त ड्यूटी हटाने का फैसला लिया जा सकता है।
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उपराष्ट्रपति से भी हुई मुलाकात
कपास से आयात शुल्क हटाने को लेकर हाल ही में, कपड़ा उद्योग के प्रतिनिधियों और निर्यातकों के एक दल ने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन से भी मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से कपास के आयात पर लगने वाले 11 प्रतिशत शुल्क को हटाने की अपील की।
करोड़ों लोगों को रोजगार देता है कपड़ा उद्योग
कपास पर लगाई जाने वाली इंपोर्ट ड्यूटी से कपड़ा उद्योग पर दबाव बढ़ रहा है। बता दें कि टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है, PIB के आंकड़ों के अनुसार 4.5 करोड़ लोग टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़े हैं। ऐसे में आयात शुल्क के चलते निर्यात में गिरावट घरेलू इंडस्ट्री के लिए चिंता की बात है।
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