4.5 करोड़ रोजगार देने वाला सेक्टर घाटे में, सरकार के 2 मंत्रालयों के अलग-अलग मत; कपास से इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग तेज,
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने कच्चे कपास पर 11% आयात शुल्क हटाने की मांग की है, जिससे उत्पादन लागत घट सके और निर्यात में आई गिराव ...और पढ़ें
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कपास से इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग (AI Image)
नई दिल्ली| कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने एक बार फिर सरकार से कच्चे कपास पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को हटाने की मांग की है। घेरज़ी (Gherzi) और ICAC की संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कच्चे कपास पर लगने वाले 11 प्रतिशत आयात शुल्क को हटा दिया जाता है तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार से सस्ती कीमत पर कपास मिलेगा जिसके बाद ना सिर्फ प्रोडक्शन की लागत घटेगी बल्कि भारत का ग्लोबल कॉम्पटीशन भी मजबूत होगा।
एक्सपोर्ट में गिरावट से घरेलू इंडस्ट्री को खतरा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर (रेडीमेड गारमेंट इंडस्ट्री) के एक्सपोर्ट में वित्त वर्ष 2026 में 2.2 फीसदी की गिरावट देखी गई है, जिसके बाद यह घटकर 35.79 अरब डॉलर पर आ गया है। यह सेक्टर देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है, PIB के आंकड़ों के अनुसार 4.5 करोड़ लोग टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़े हैं। ऐसे में आयात शुल्क के चलते निर्यात में गिरावट घरेलू इंडस्ट्री के लिए चिंता की बात है।
2 मंत्रालयों के अलग-अलग मत
इस पूरे मामले में कृषि मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय के अलग-अलग मत देखने को मिले हैं। कपड़ा मंत्रालय इम्पोर्ट ड्यूटी हटाने के पक्ष में है, ताकि कपड़ा उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा मिल सके। मंत्रालय का मानना है कि इससे टेक्सटाइल इंडस्ट्री को ग्लोबल कॉम्पटीशन में मजबूती मिलेगी। वहीं कृषि मंत्रालय इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति नहीं दे रहा है।
किसानों पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े, यह सुनिश्चित करने के लिए उद्योग जगत और किसान समूहों के साथ इस मामले पर बातचीत जारी है।
इंडस्ट्री ने दिए मूल्य स्थिरता के सुझाव
गेर्ज़ी कंसल्टिंग कंपनी और अंतर्राष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (ICAC) द्वारा संयुक्त की संयुक्त रिपोर्ट में कपास बाजार को स्थिर रखने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि नवंबर से मार्च के दौरान खरीदी जाने वाली कपास के लिए, पीक सीजन के दौरान कार्यशील पूंजी (Working Capital) की समस्या को कम करने के लिए कपास मूल्य स्थिरीकरण निधि (Price Stabilisation Fund) जैसी योजना बनानी चाहिए। जिसमें 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जा सकती है ताकि मिलों को कार्यशील पूंजी की दिक्कत न हो।
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सरकार ने बनाया 5-F का प्लान
जहां एक ओर कपड़ा उद्योग की ओर से इंपोर्ट पर लगाई जाने वाली 11 परसेंट की ड्यूटी को हटाने की मांग की जा रही है वहीं भारतीय कपास के लिए लिए सरकार ने 5-F प्लान के तहत काम शुरू किया है। हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने देश में कपास का उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कपास उत्पादकता मिशन को मंजूरी दे दी है। ये मिशन अगले 5 साल (2026-27 से 2030-31) तक लागू किया जाएगा।
ये भी पढ़ें: केंद्रीय कैबिनेट के ताबड़तोड़ फैसले, 32 लाख कपास किसानों और 5 करोड़ गन्ना किसानों के लिए बड़ा ऐलान
बता दें कि कपास कांति मिशन सरकार के 5-F विजन के तहत लागू होगा। इसका मतलब है खेत से रेशा, रेशे से कारखाने, कारखाने से फैशन और फैशन से विदेश तक। वहीं सरकार का मानना है कि इस मिशन से ना सिर्फ देश के 32 लाख किसानों को फायदा मिलेगा बल्कि इंटरनेशनल टेक्सटाइल मार्केट में भी भारत की प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी। फिलहाल टेक्सटाइल इंडस्ट्री कपास पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को खत्म करने की मांग कर रही है।
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