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    अब व्यापारियों की पेमेंट और विवादों का झटपट होगा निपटारा, राज्यसभा में पास हुआ MSME बिल

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 08:40 PM (IST)

    राज्यसभा ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026 पारित कर दिया है, जिसका उद्देश्य MSME के भुगतान में देरी और विवादों का तेजी से निपटा ...और पढ़ें

    MSME Bill राज्यसभा में पारित

    MSME Bill राज्यसभा में पारित

    HighLights

    1. MSME बिल 2026 राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित।

    2. भुगतान में देरी और विवादों का तेजी से होगा समाधान।

    3. खरीदारों को 50% राशि जमा करने का निर्देश संभव।

    नई दिल्ली| MSMEs की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक भुगतान में देरी है। अधिकांश सप्लायर्स और बायर्स के बीच भुगतान से जुड़े वाद-विवाद और अन्य तरह की समस्याएं आती रहती हैं। अब इस समस्या का सामना करने वाले उद्यमियों को खुशखबरी मिली है। राज्यसभा ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026 पारित कर दिया। इसका उद्देश्य भुगतान में देरी से जुड़े विवादों के समाधान में तेजी लाना और लघु एवं मध्यम उद्यमों के नकदी प्रवाह को बेहतर बनाना है।

    ध्वनि मत से पारित इस विधेयक का उद्देश्य विवाद समाधान के लिए समयसीमा निर्धारित करके, समझौतों और की वसूली को आसान बनाना है। इसके साथ ही इस क्षेत्र संबंधी बाधाओं को दूर करके सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को भुगतान में देरी से होने वाले भुगतानों को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे को मजबूत करना है।

    बिल पारित होने के बाद MSME को मिली ये सुविधा

    इसके प्रमुख प्रावधानों में से एक यह है कि यदि किसी आदेश को चुनौती देने वाला आवेदन छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो न्यायालय खरीदारों को MSME सप्लायर्स को दी गई राशि का कम से कम 50% जमा करने का निर्देश दे सकते हैं। विधेयक पारित होने के तुरंत बाद, उच्च सदन को उस दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। बहस का जवाब देते हुए केंद्रीय लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि प्रस्तावित कानून प्रशासनिक ढांचे और भुगतान तंत्र में सुधार करके इस क्षेत्र द्वारा सामना की जा रही लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान करेगा।

    सप्लायर्स-बायर्स के हितों में संतुलन स्थापित होगा

    केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि मुझे उम्मीद थी कि हमारे विपक्षी सहयोगी इस विधेयक का समर्थन करेंगे, सहयोग करेंगे और इसे पारित करेंगे, लेकिन आज वे इसका विरोध कर रहे हैं... मैं हैरान हूं, लेकिन इसके बावजूद, मैं सदन के समक्ष प्रस्ताव करता हूं कि 2006 के अधिनियम में संशोधन करके इस विधेयक को पारित किया जाए,"। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप रहते हुए MSME और खरीदारों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।

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    MSME का GDP में कितना योगदान?

    " उन्होंने आगे कहा कि सरकार MSME क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। MSME को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए मांझी ने कहा कि यह क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 31%, मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में 36% और एक्सपोर्ट में 41% का योगदान देता है।

    उन्होंने सदन को बताया, “एमएसएमई को वितरित बकाया ऋण, जो 2014-15 में 10 लाख करोड़ रुपये था, आज बढ़कर 38.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जो दर्शाता है कि MSME को लोन फ्लो में लगातार वृद्धि हो रही है।”

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    मंत्री ने आगे कहा कि मंत्रालय “चैंपियन एमएसएमई” के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। यह विधेयक मध्यस्थता समझौतों और मध्यस्थता निर्णयों की वसूली को भू-राजस्व के बकाया के रूप में भी निर्धारित करता है। यह कुछ अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव करता है, जिसमें दोषसिद्धि-आधारित जुर्माने को श्रेणीबद्ध दंडों से प्रतिस्थापित किया जाएगा, जिसमें पहली बार उल्लंघन करने पर चेतावनी भी शामिल है।