समय से पहले लोन चुकाने पर बैंक नहीं वसूल सकेंगे प्री पेमेंट चार्ज, MSME को RBI की बड़ी राहत; 11 सवालों में सबकुछ
RBI ने छोटे और मध्यम व्यापारियों को बड़ी राहत दी है, अब बैंक MSME लोन के समय से पहले भुगतान पर प्री-पेमेंट चार्ज नहीं वसूल सकते। FISME के अनिल भारद्वा ...और पढ़ें
HighLights
माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज से प्री-पेमेंट चार्ज नहीं।
फ्लोटिंग रेट लोन पर यह नियम सभी बैंकों पर लागू।
'की फैक्ट शीट' और 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' महत्वपूर्ण।
नई दिल्ली| अगर आप छोटे या मध्यम व्यापारी हैं, और बिजनेस लोन (Business Loan) लिया है या लेने की सोच रहे हैं तो ये खबर आपके लिए। अगर MSME समय से पहले लोन चुकाते हैं तो बैंक प्री पेमेंट चार्जेस लगाते हैं, जिससे आप जैसे छोटे उद्यमियों को लोन चुकाने पर फोरक्लोजर के नाम पर लाखों रुपये चुकाने पड़ सकते हैं।
अब सवाल यह है कि आखिर इन चार्जेस से कैसे बचा जाए? इन चार्जेस को लेकर RBI के नियम क्या कहते हैं? आपके मन में उठ रहे ऐसे ही तमाम सवालों को लेकर जागरण बिजनेस ने अपने नए वीकली शो 'MSME बदलाव' में बात की अनिल भारद्वाज से, जो FISME यानी फेडरेशन ऑफ इंडिया माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेस के सेक्रेटरी जनरल हैं। जिसमें उन्होंने पूरा कंफ्यूजन दूर कर दिया।
साथ ही यह भी बताया कि अगर आप समय से पहले लोन चुका देते हैं तो आपको फोरक्लोजर चार्जेस देने की कोई जरूरत नहीं है। 11 सवालों में पेश हैं- बातचीत के मुख्य अंश...
सवाल 1: ये प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर चार्जेस आखिर होते क्या हैं और बैंक इन्हें क्यों वसूलते हैं?
अनिल भारद्वाज: जब कोई MSME लोन लेता है, तो एक एग्रीमेंट होता है। अगर आप तय समय से पहले लोन चुकाना चाहते हैं, तो बैंक इसे अपना नुकसान मानता है (ब्याज का नुकसान)। इसी की भरपाई के लिए बैंक 2% से 4% तक का चार्ज वसूलते हैं। मान लीजिए 1 करोड़ का लोन है, तो बैंक आपसे ₹4 लाख सिर्फ लोन बंद करने के नाम पर मांग लेता है। यह एक तरह की पेनल्टी है जो उद्यमी को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाती है।
सवाल 2: क्या 1 जनवरी 2026 के बाद इन चार्जेस को लेकर कोई बड़ा बदलाव आया है?
अनिल भारद्वाज: बिल्कुल। जनवरी 2026 में RBI गवर्नर के साथ हुई बैठक में यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है कि 'माइक्रो और स्मॉल' एंटरप्राइजेज (Micro & Small Enterprises) से फ्लोटिंग रेट पर लिए गए लोन के लिए कोई भी कमर्शियल बैंक या NBFC प्री-पेमेंट चार्जेस नहीं वसूल सकते। यह नियम अब पूरी तरह प्रभावी है और इसमें किसी भी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए।
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सवाल 3: अगर किसी ने 1 जनवरी 2026 से पहले लोन लिया या चुकाया है, तो क्या उसे भी रियायत मिलेगी?
अनिल भारद्वाज: कानूनन 2 जुलाई 2025 के सर्कुलर के बाद से ही यह राहत मिलनी शुरू हो गई थी। 1 जनवरी 2026 को तो केवल स्पष्टीकरण (Clarification) आया है। इसलिए, अगर उससे पहले भी कोई मामला है और बैंक आपसे अवैध वसूली कर रहा है, तो आप उसे चुनौती दे सकते हैं। पुराने मामलों में भी राहत की गुंजाइश है।
सवाल 4: बैंक अक्सर एग्रीमेंट की बारीक शर्तों का हवाला देते हैं, उनसे कैसे बचें?
अनिल भारद्वाज: अब बैंकों को 'की फैक्ट शीट' (Key Fact Sheet) देना अनिवार्य है। पहले कई पन्नों के डॉक्यूमेंट में शर्तें छिपी होती थीं। अब बैंक को एक ही पेज पर साफ-साफ लिखना होगा कि ब्याज कितना है और अन्य चार्जेस क्या हैं। आपको लोन लेते समय देखना चाहिए कि प्री-पेमेंट वाले कॉलम में 'NIL' (शून्य) लिखा हो।
सवाल 5: क्या NBFC और प्राइवेट बैंक भी इस नियम के दायरे में आते हैं?
अनिल भारद्वाज: हां, RBI के 2 जुलाई 2025 के सर्कुलर में साफ है कि सभी कमर्शियल बैंक, NBFC, सिडबी (SIDBI) और ऑल इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस इस नियम को मानेंगे। केवल कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक और रीजनल रूरल बैंकों को इसमें कुछ छूट है, बाकी बड़े प्राइवेट और सरकारी बैंक फ्री में लोन बंद करने के लिए बाध्य हैं।
सवाल 6: लोन बंद करते समय 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' लेना क्यों जरूरी है?
अनिल भारद्वाज: लोन चुकाने के बाद 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' (NOC) लेना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। यह इस बात का सबूत है कि अब बैंक का आपके एसेट पर कोई हक नहीं है। अगर आप भविष्य में कहीं और से लोन लेना चाहते हैं, तो यह सर्टिफिकेट आपकी क्लीन क्रेडिट हिस्ट्री के लिए जरूरी होगा।
सवाल 7: ये 'नॉन-कंप्लायंस चार्जेस' क्या होते हैं और बैंक इन्हें कब लगाते हैं?
अनिल भारद्वाज: यह बैंकों का एक और हथियार है। अगर आप समय पर इन्वेंटरी रिपोर्ट नहीं देते या छोटी शर्तें भूल जाते हैं, तो बैंक भारी पेनल्टी लगा देते हैं। कानपुर के एक केस में ₹75 लाख तक का बिल थमा दिया गया था। अब 'की फैक्ट शीट' आने से बैंकों को पहले ही बताना होगा कि किस गलती पर कितना चार्ज लगेगा, वे मनमानी नहीं कर पाएंगे।
सवाल 8: अगर बैंक नियम न माने और जबरन पैसे मांगे, तो शिकायत कहां करें?
अनिल भारद्वाज: सबसे पहले बैंक को RBI का 2 जुलाई 2025 का सर्कुलर दिखाएं। अगर फिर भी न माने, तो आप बैंकिंग ओम्बड्समैन (Banking Ombudsman) के पास जा सकते हैं। 1 जुलाई 2026 से ओम्बड्समैन की नई और पारदर्शी स्कीम आ रही है, जो ग्राहकों के लिए ज्यादा मददगार होगी। आप FISME जैसे संगठनों से भी संपर्क कर सकते हैं।
सवाल 9: प्री-पेमेंट चार्जेस हटने से MSME सेक्टर को क्या बड़ा फायदा होगा?
अनिल भारद्वाज: इसका सबसे बड़ा फायदा है 'कंपटीशन'। पहले उद्यमी बैंक की खराब सर्विस के बावजूद स्विच नहीं कर पाता था क्योंकि उसे चार्जेस का डर था। अब अगर आप एक बैंक से खुश नहीं हैं, तो अपना लोन दूसरे बैंक में पोर्ट करा सकते हैं। इससे बैंक अपनी सर्विस सुधारने पर मजबूर होंगे।
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सवाल 10: एक छोटा व्यापारी कितना लोन ले सकता है और बैंक क्या देखते हैं?
अनिल भारद्वाज: लोन की कोई ऊपरी सीमा नहीं है, यह आपके प्रोजेक्ट की वायबिलिटी (Viability) पर निर्भर करता है। बैंक आपकी इनकम, उम्र और प्रोजेक्ट की भविष्य में कमाई की क्षमता देखता है। आमतौर पर माइक्रो और स्मॉल यूनिट्स ₹2 करोड़ से ₹5 करोड़ तक का लोन आसानी से ले लेती हैं।
सवाल 11: नए व्यापारियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में से क्या बेहतर है?
अनिल भारद्वाज: मैन्युफैक्चरिंग में कंपटीशन 'ग्लोबल' है, आपको चीन जैसे देशों के उत्पादों से लड़ना पड़ता है। लेकिन सर्विस सेक्टर (जैसे केक बनाना, कंसल्टिंग, या रिपेयरिंग) में कंपटीशन 'लोकल' होता है। नए उद्यमियों, खासकर महिलाओं के लिए सर्विस सेक्टर में जोखिम कम और मौके ज्यादा हैं।
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