म्यूचुअल फंड निवेशकों को SEBI का बड़ा तोहफा, अब आप खुद कर सकेंगे अपना निवेश 'लॉक'; जानें कैसे?
सेबी ने म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए स्वैच्छिक लॉक-इन/डेबिट फ्रीज सुविधा शुरू की है। इसका उद्देश्य ऑनलाइन निवेश की डिजिटल सुरक्षा बढ़ाना है। ...और पढ़ें

सेबी ने शुरू की म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए नई सुरक्षा सुविधा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। भारत के म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) निवेशक अब अपने निवेश में सुरक्षा की एक और दायरा शामिल कर पाएंगे। कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने एक वॉलंटरी लॉक-इन या डेबिट फ्रीज सुविधा शुरू की है, जिससे निवेशक अपने म्यूचुअल फंड फोलियो से किसी भी निकासी या डेबिट को कुछ समय के लिए ब्लॉक कर सकेंगे।
क्या है इस कदम का मकसद?
सेबी के इस कदम का मकसद डिजिटल सिक्योरिटी को बेहतर बनाना है, क्योंकि म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट तेजी से ऑनलाइन होते जा रहे हैं। सेबी के एक सर्कुलर के मुताबिक, नए फ्रेमवर्क के तहत, इन्वेस्टर अपने म्यूचुअल फंड फोलियो को फ्रीज कर सकेंगे, जिससे उस लॉक को हटाने तक कोई भी यूनिट रिडीम, स्विच या डेबिट नहीं हो सकेगी।
किसे-किसे मिलेगी ये सुविधा?
यह सुविधा डीमैट और नॉन-डीमैट दोनों तरह के म्यूचुअल फंड होल्डिंग्स पर मिलेगी, जिसका मतलब है कि इसमें डीमैट अकाउंट में रखे फोलियो के साथ-साथ एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के साथ सीधे मेंटेन किए गए फोलियो भी शामिल हैं।
लॉकिंग सुविधा शुरू में MF सेंट्रल के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी, जो एक इंटरऑपरेबल डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसका इस्तेमाल निवेशक अलग-अलग फंड हाउस में म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन और सर्विस रिक्वेस्ट को मैनेज करने के लिए करते हैं।
कब से लागू होगी ये सुविधा?
रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट (RTAs) प्लेटफॉर्म के जरिए इस फीचर को चालू करेंगे, जिससे इन्वेस्टर जरूरत पड़ने पर फ्रीज किए गए म्यूचुअल फंड को एक्टिवेट या डीएक्टिवेट कर सकेंगे। ये नई सुविधा 30 अप्रैल से लागू होगी।
KYC प्रोसेस होना जरूरी
इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए, इन्वेस्टर को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी, जैसे कि फोलियो KYC कम्प्लायंट होना चाहिए और एक वैलिड ईमेल ID और मोबाइल नंबर से लिंक होना चाहिए, जिसका इस्तेमाल ऑथेंटिकेशन और लॉकिंग और अनलॉकिंग प्रोसेस से जुड़ी बातचीत के लिए किया जाएगा।
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