नौकरी चली गई फिर भी मिलेगी पेंशन, क्या है Bipartite Settlement; जो बैंक कर्मचारियों के लिए है 'रामबाण'
यह लेख बताता है कि कैसे बैंक कर्मचारी, नौकरी से निकाले जाने के बावजूद, Bipartite Settlement के तहत पेंशन और अन्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं। सुप्रीम कोर् ...और पढ़ें

क्या है Bipartite Settlement?
नई दिल्ली। आज के समय में नौकरी जाना आम बात हो गई है। फिर चाहे वह सरकारी सेक्टर हो या प्राइवेट सेक्टर। नौकरी जाने के बाद कर्मचारी को बहुत से लाभ नहीं मिलते। लेकिन अगर आप एक सरकारी बैंक के कर्मचारी हैं और किसी मारपीट या अन्य लफड़े की वजह से आपको बैंक ने नौकरी से निकाल दिया है। इसके साथ वह आपको पेंशन भी नहीं दे रहा है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि Bipartite Settlement के जरिए आपको पेंशन समेत अन्य लाभ मिलेंगे।
कुछ ऐसा ही मामला एक सरकारी बैंक के क्लर्क के साथ हुआ था। बैंक ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया था। साथ ही साथ उनकी पेंशन भी रोक दी थी। फिर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में फैसला सुनाया कि कर्मचारी Bipartite Settlement के तहत पेंशन पाने का हकदार है। आइए जानते हैं कि आखिर पूरा मामला क्या था।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला एक सरकारी बैंक के कर्मचारी, मिस्टर कुमार से जुड़ा है। साल 1998 में बैंक की शाखा के अंदर एक विवाद के दौरान कुमार और उनके एक सहकर्मी ने एक अधिकारी के साथ मारपीट की। इस घटना के बाद बैंक प्रबंधन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता (gross misconduct) माना।
इसके बाद कुमार को चार्जशीट दी गई और जांच के बाद उन्हें दोषी पाया गया। बैंक ने उन्हें तुरंत नौकरी से हटा दिया। हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया कि उन्हें उनकी सेवा अवधि के अनुसार मिलने वाले अंतिम लाभ (terminal benefits) दिए जाएंगे और यह सजा उनके भविष्य के रोजगार के लिए बाधा नहीं बनेगी।
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सुप्रीम कोर्ट बोला कर्मचारी को पेंशन का अधिकार
कुमार ने इस फैसले को चुनौती दी। मामला पहले लेबर कोर्ट, फिर हाई कोर्ट और अंत में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया और कहा कि कर्मचारी को पेंशन का अधिकार मिल सकता है।
Bipartite Settlement बैंकों और कर्मचारियों के यूनियनों के बीच हुआ एक समझौता है। यह समझौता Industrial Disputes Act के तहत कानूनी मान्यता रखता है और सभी पक्षों पर लागू होता है।
साल 2002 में इस समझौते में एक अहम प्रावधान जोड़ा गया, जिसे Clause 6(b) कहा जाता है। इसके अनुसार: अगर कोई कर्मचारी गंभीर अनुशासनहीनता का दोषी पाया जाता है, तो उसे नौकरी से हटाया जा सकता है। लेकिन उसे पेंशन, ग्रेच्युटी और प्रोविडेंट फंड जैसे रिटायरमेंट लाभ मिल सकते हैं, और यह सजा उसके भविष्य के रोजगार के लिए बाधा नहीं बनेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि यह प्रावधान कानूनी रूप से मान्य है। यानी अगर कर्मचारी ने नियमों के तहत पर्याप्त सेवा की है, तो उसे पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता, भले ही उसे नौकरी से हटा दिया गया हो।
आमतौर पर सरकारी बैंक कर्मचारियों को पेंशन के लिए कम से कम 10 साल की सेवा पूरी करनी होती है। अगर यह शर्त पूरी है, तो Bipartite Settlement के तहत उन्हें पेंशन मिल सकती है।
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