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    EPFO का कंपनियों को तोहफा! ₹25,000 सैलरी लिमिट बढ़ाने का फैसला टला; करोड़ों कर्मचारियों पर पड़ेगा ये असर

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 10:08 AM (IST)

    EPFO Wage Ceiling Rules:  ईपीएफओ की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने के प्रस्ताव पर सरकार का बड़ा फैसला आया है। ...और पढ़ें

    EPFO Wage Ceiling Rules

    EPFO Wage Ceiling Rules

    HighLights

    1. ईपीएफओ वेतन सीमा ₹25,000 करने का प्रस्ताव स्थगित।

    2. कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ।

    3. सरकार ने व्यापक आर्थिक असर आकलन के लिए रोका।

    नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ी बड़ी अपडेट सामने आई है। सरकार द्वारा EPF के तहत वेतन सीमा (Wage Ceiling) को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 का प्रस्ताव फिलहाल रोक दिया गया है। यानी जिस फैसले से लाखों कर्मचारियों को PF और पेंशन का फायदा मिलने की उम्मीद थी, वह अभी ठंडे बस्ते में चला गया है।

    क्या है पूरा मामला?

    अभी Employees' Provident Fund Organisation यानी ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, ₹15,000 की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए PF योगदान अनिवार्य होता है। इससे ऊपर सैलेरी वालों के लिए यह वैकल्पिक हो जाता है।

    सरकार इस सीमा को बढ़ाकर ₹25,000 करने पर विचार कर रही थी, ताकि ज्यादा कर्मचारियों को EPF के दायरे में लाया जा सके। लेकिन ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रस्ताव को फिलहाल होल्ड पर रख दिया गया है और इस पर कोई तुरंत फैसला नहीं होगा।

    क्यों टल गया फैसला?

    सुत्रों के मुताबिक, इस फैसले को टालने के पीछे कई वजहें हैं:

    1. कंपनियों पर बढ़ने वाला अतिरिक्त वित्तीय बोझ
    2. कर्मचारियों की इन-हैंड सैलेरी में संभावित कटौती
    3. व्यापक आर्थिक असर का आकलन अभी बाकी है।
    यही कारण है कि सरकार ने फिलहाल इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से रोक दिया है।


    अगर यह बदलाव लागू होता तो क्या होता?

    अगर ₹25,000 की नई सीमा लागू हो जाती तो,

    1. ज्यादा कर्मचारी EPF और पेंशन स्कीम में शामिल होते
    2. रिटायरमेंट सेविंग्स बढ़ती
    3. लेकिन सैलेरी से PF कटौती बढ़ाने से हाथ में आने वाला पैसा कम हो सकता था।

    फिलहाल EPFO की वेतन सीमा ₹15,000 ही बनी हुई है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछली बार यह सीमा 2014 में बढ़ाई गई थी और तब से अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    आगे क्या उम्मीद?

    विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज नहीं कर रही है, बल्कि सही समय और आर्थिक परिस्थितियों का इंतजार कर रही है। आने वाले समय में इस पर फिर से चर्चा हो सकती है।

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