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    EPFO ने बदला 10 साल पुराना नियम, ₹25000 तक की बेसिक सैलरी पर मिलेगी पेंशन; दावा- वित्त मंत्रालय ने दी हरी झंडी

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 04:30 PM (IST)

    EPFO Big Update: मीडिया रिपोर्ट्स में दावा है कि वित्त मंत्रालय ने ईपीएफओ के तहत वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की मं ...और पढ़ें

    epfo पर बड़ा फैसला

    epfo पर बड़ा फैसला

    HighLights

    1. ईपीएफओ वेतन सीमा 15,000 से बढ़कर 25,000 रुपये हुई।

    2. वित्त मंत्रालय ने प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दी, कैबिनेट बाकी।

    3. लाखों कर्मचारियों को पीएफ और पेंशन का सीधा लाभ मिलेगा।

    नई दिल्ली| कर्मचारी भविष्य निधि संगठम (EPFO) से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। वित्त मंत्रालय ने ईपीएफ के तहत अनिवार्य वेतन सीमा (Wage Ceiling) को मौजूदा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। हालांकि, शुरुआत में इस लिमिट को बढ़ाकर 30,000 रुपये करने का प्लान था, लेकिन फिलहाल 25,000 रुपये के प्रस्ताव पर मुहर लगी है। यह नया बदलाव अभी आधिकारिक तौर पर लागू नहीं हुआ है; इसे पूरी तरह से लागू करने के लिए अभी केंद्रीय कैबिनेट (Central Cabinet) की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है। हालांकि, EPFO की तरफ से अभी तक इस बात की की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। 

    क्या हुआ फैसला?

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस बड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा नौकरीपेशा लोगों को ईपीएफ (EPF) और पेंशन योजना के सुरक्षित दायरे में लाना है। ईपीएफओ के मौजूदा नियमों के अनुसार, अभी तक केवल 15,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए ही पीएफ (PF) खाते में योगदान करना अनिवार्य था, जबकि इससे अधिक बेसिक सैलरी वालों के लिए यह नियम स्वैच्छिक (Optional) होता है। अब इस लिमिट के 25,000 रुपये होने से, 25,000 रुपये तक की मंथली बेसिक सैलरी पाने वाले लाखों अतिरिक्त कर्मचारियों के लिए पीएफ कटना अनिवार्य हो जाएगा और उन्हें भविष्य निधि व पेंशन का सीधा लाभ मिल सकेगा।

    नया नियम कब से होगा लागू?

    वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद अब इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट (Central Cabinet) की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। कैबिनेट की मुहर के बाद इसे तुरंत लागू कर दिया जाएगा। कंपनियों को अपने पेरोल (payroll) सिस्टम और कंप्लायंस प्रोसेस में बदलाव करने के लिए सरकार एक ट्रांजिशन पीरियड (transition period) देगी। रिपोर्ट की मानें तो नई EPF सैलरी लिमिट 1 अप्रैल 2027 से लागू की जा सकती है।

    बता दें कि इससे पहले EPFO की वेतन सीमा में आखिरी बार सितंबर 2014 में बदलाव हुआ था, तब इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था।

    इस फैसले से कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

    सैलरी लिमिट बढ़ने से पीएफ (PF) और पेंशन फंड (Pension fund) में योगदान भी बढ़ेगा, जिसका असर कंपनियों और सरकार दोनों पर पड़ेगा। कर्मचारी पेंशन योजना के तहत नियोक्ता (Employer) बेसिक सैलरी का 8.33% हिस्सा जमा करता है, जबकि केंद्र सरकार इसमें 1.16% का योगदान देती है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने EPS के लिए 11,144 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। लिमिट बढ़ने से सरकार का यह वित्तीय बोझ भी बढ़ सकता है।

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    किन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा?

    ऑर्गनाइज्ड प्राइवेट सेक्टर के उन कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है, जो उन कंपनियों में काम करते हैं जहां 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी हैं। 20 से कम कर्मचारियों वाले छोटे संस्थान चाहें तो स्वेच्छा से EPFO से जुड़ सकते हैं, लेकिन उनके लिए यह अनिवार्य नहीं है। केंद्र सरकार के कर्मचारी अलग पेंशन व्यवस्था के तहत आते हैं, इसलिए उन पर ईपीएस (EPS) के ये नियम लागू नहीं होते।

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