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    EPS Scheme 2026: 20 दिन में सेटलमेंट, पीएफ निकासी के नियम और ज्यादा पेंशन; 6 प्वाइंट में जानिए क्या-क्या बदल गया

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 12:45 PM (IST)

    कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) 2026 के तहत EPFO ने नए नियम लागू किए हैं, जिनमें पेंशन निकासी, हायर पेंशन और क्लेम सेटलमेंट में बदलाव शामिल हैं। अब पीएफ का ...और पढ़ें

    EPS Scheme 2026: 20 दिन में सेटलमेंट, पीएफ निकासी के नियम और ज्यादा पेंशन; 6 प्वाइंट में जानिए क्या-क्या बदल गया

    EPS Scheme 2026: 20 दिन में सेटलमेंट, पीएफ निकासी के नियम और ज्यादा पेंशन; 6 प्वाइंट में जानिए क्या-क्या बदल गया

    HighLights

    1. पेंशन का पैसा निकालने के लिए 36 महीने का इंतजार।

    2. हायर पेंशन विकल्प को अब कानूनी मान्यता मिली।

    3. पेंशन क्लेम 20 दिनों में निपटाना होगा अनिवार्य।

    नई दिल्ली। क्या आप भी नौकरी करते हैं और हर महीने अपनी सैलरी से पीएफ कटवाते हैं? अगल हां, तो ये खबर आपके लिए है। EPFO ने हाल ही में कई सारे नए नियम लागू किए हैं, जो कर्मचारियों के लिए समझना बेहद जरूरी है। नए नियमों को 'कर्मचारी पेंशन योजना (EPS), 2026' के नाम से 'Social Security Code, 2020' के तहत लागू किया गया है।

    नए नियमों को बनाने में पेशनधारकों का तो ध्यान रखा ही गया, साथ ही कुछ नियमों को पहले से सख्त भी बनाया गया है। आइए आपको बताते हैं कि कर्मचारी पेंशन योजना (EPS), 2026 में क्या-क्या बदला है और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा।

    क्या है कर्मचारी पेंशन योजना (EPS)?

    EPS (Employees' Pension Scheme) यानी कर्मचारी पेंशन योजना, EPFO द्वारा चलाई जाने वाली एक सोशल सिक्योरिटी स्कीम है। इसका मेन फोकस प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु में रिटायर होने के बाद नियमित मासिक पेंशन (Regular Monthly Pension) और उनके परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।

    किसे मिलता है EPS-95 फायदा?

    EPS-95 का फायदा वो सभी कर्मचारी उठा सकते हैं जो ऐसी कंपनियों या फैक्ट्रियों में काम करते हैं जहां ईपीएफ (EPF) लागू होता है। इसमें वो लोग भी शामिल हैं जो पहले की फैमिली पेंशन स्कीम, 1971 का हिस्सा थे या जो 1 अप्रैल 1993 से 15 नवंबर 1995 के बीच इसके सदस्य बने। आमतौर पर, कोई भी कर्मचारी 58 साल की उम्र होने तक इस पेंशन स्कीम का सदस्य बना रह सकता है।

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    EPS 2026 में क्या-क्या बदला?

    1. पेंशन का पैसा बीच में निकालना हुआ मुश्किल
    पहले नियम थोड़े आसान थे, लेकिन अब सरकार चाहती है कि आप रिटायरमेंट के लिए फंड बचाकर रखें। नए नियम के हिसाब से, नौकरी छोड़ने के तुरंत बाद आप EPS का पैसा (Withdrawal Benefit) नहीं निकाल पाएंगे। इसके लिए आपको 36 महीने का वेटिंग पीरियड पूरा करना होगा। या फिर 58 साल के होने का इंतजार करना होगा। जो भी पहले होगा, उस हिसाब से ही आप पैसा निकाल पाएंगे।

    2. एक बार ही करना होगा रजिस्ट्रेशन
    अगर आप पहले से ही ईपीएफओ के मेंबर हैं, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। नए नियमों के तहत पुराने सभी सदस्यों की सदस्यता बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी। आपको नए सिरे से कोई फॉर्म नहीं भरना होगा।

    3. ज्यादा पेंशन को मिली कानूनी मंजूरी
    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चर्चा में रही 'हायर पेंशन' (ज्यादा पेंशन का विकल्प) को अब नए कानून में साफ तौर पर शामिल कर लिया गया है। जिन कर्मचारियों ने ज्यादा पेंशन का विकल्प चुना है, उन्हें अब और ज्यादा कानूनी सुरक्षा और स्पष्टता मिलेगी।

    4. 20 दिनों में होगा सेटलमेंट
    अब पीएफ ऑफिस की मनमानी नहीं चलेगी। नए नियम के मुताबिक, पेंशन के क्लेम को 20 दिनों के भीतर निपटाना जरूरी होगा। अगर अधिकारी तय समय में क्लेम सेटल नहीं करते हैं, तो उनकी जवाबदेही तय होगी और देरी होने पर ब्याज भी देना पड़ सकता है।

    5. पेनाल्टी का नया नियम
    कंपनी द्वारा पीएफ या पेंशन का पैसा देरी से जमा करने पर जो पेनाल्टी लगती है, उसके नियमों को अब 'EPF स्कीम, 2026' के बराबर कर दिया गया है। इससे पूरे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी।

    6. ऐसे निकलेगा पेंशन का हिसाब
    पेंशन की रकम तय करने का तरीका पहले जैसा ही रखा गया है। आपकी पेंशन कितनी बनेगी, इसका हिसाब नौकरी छोड़ने या रिटायर होने से ठीक पहले के 60 महीनों (5 साल) की औसत सैलरी के आधार पर लगाया जाएगा।

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