FD पर मिला तगड़ा ब्याज, तो जानें कब लगता है उस पर TDS? एक फॉर्म भरकर बच सकते हैं सीनियर सिटीजन
यह लेख वरिष्ठ नागरिकों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और उस पर लगने वाले TDS नियमों की जानकारी देता है। इसमें बताया गया है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹1 ल ...और पढ़ें

FD पर एक फॉर्म जमाकर टीडीएस बचाया जा सकता है
नई दिल्ली। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) एक कम जोखिम वाला परम्परागत इन्वेस्टमेंट ऑप्शन है, जिसमें आप किसी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन में एक तय समय (अवधि) के लिए एकमुश्त रकम जमा करते हैं। ये सीनियर सिटीजन के लिए ज्यादा बेहतर ऑप्शन माना जाता है, क्योंकि इसमें सेफ्टी ज्यादा होती है। इसमें फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट, गारंटीड रिटर्न, फ्लेक्सिबल अवधि (कुछ दिनों से लेकर कई सालों तक) और इंटरेस्ट पेमेंट के कई ऑप्शन (महीने, साल या मैच्योरिटी पर) मिलते हैं। यह सेविंग्स बढ़ाने का एक सुरक्षित तरीका है, जिसमें लोन या टैक्स सेविंग जैसे एक्स्ट्रा फायदे भी मिलते हैं। मगर इससे मिलने वाले ब्याज पर TDS (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) भी कटता है।
सीनियर सिटीजन को कितने मिले ब्याज पर लगता है TDS?
अगर सीनियर सिटीजन को किसी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज 1 लाख रुपये से ज्यादा हो जाए, तो बैंक द्वारा उस ब्याज पर TDS काटना जरूरी है। सामान्य लोगों के लिए ये लिमिट 1 लाख के बजाय 40000 की है।
याद रखें, TDS कोई एक्स्ट्रा टैक्स नहीं है, बल्कि आप इसे रिफंड के तौर पर वापस पा सकते हैं या अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय अपनी कुल टैक्स देनदारी में इसे शामिल कर सकते हैं।
रिफंड पर ब्याज भी मिल सकता है
अगर आप टैक्स रिफंड के लिए एलिजिबल हैं, तो आप उस रिफंड पर ब्याज के लिए भी एलिजिबल हो सकते हैं। इस पूरे मामले को एक उदाहरण से समझें। अगर किसी सीनियर सिटीजन की इनकम 11 लाख रुपये है, तो उन्हें FY 2025-26 के लिए नए टैक्स रिजीम के तहत सेक्शन 87A टैक्स रिबेट के चलते इनकम टैक्स नहीं देना। सेक्शन 87A टैक्स रिबेट FY 2025-26 के लिए नए टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख रुपये तक की इनकम पर लागू होता है।
यहां 11 लाख के ऊपर 1 लाख का ब्याज कुल टैक्स देनदारी में शामिल किया जा सकता है और 12 लाख तक की आय टैक्स फ्री रहेगी।
ये है दूसरा तरीका
इसके अलावा, एक सीनियर सिटीजन TDS कटौती से बचने के लिए फॉर्म 15H जमा कर सकते हैं। अगर सभी टैक्स कटौतियों और सेक्शन 87A रिबेट का क्लेम करने के बाद उनकी कुल इनकम टैक्सेबल लिमिट से कम है, जो नए टैक्स रिजीम के लिए 12 लाख रुपये या पुराने टैक्स रिजीम के लिए 5 लाख रुपये है, तो टीडीएस कटौती से बचने के लिए फॉर्म जमा कर सकते हैं।
बैंकों के लिए ये नियम मानना जरूरी
बता दें कि 12 लाख रुपये से कम सालाना इनकम पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगता। मगर फिर भी बैंकों और दूसरे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को TDS काटना पड़ता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कानून के मुताबिक, जब इंटरेस्ट/इनकम की रकम एक तय लिमिट से ज्यादा हो जाए, तो उन्हें TDS काटना होता है, सीनियर सिटिजन्स के मामले में यह लिमिट 1 लाख रुपये है।
बैंकों को हर व्यक्ति की टैक्स लायबिलिटी के बारे में पता नहीं होता और जब भी सालाना इंटरेस्ट 1 लाख रुपये से ज्यादा होता है, तो वे TDS काट लेते हैं। इसलिए, बैंकों को बताने के लिए फॉर्म 15H जमा करना बेहतर है।
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