Income Tax: आप भी छिपाते हैं ITR में अपनी ये कमाई तो मिसमैच पर 200% पेनाल्टी, इनकम टैक्स का आ जाएगा नोटिस!
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स बचाने और जुर्माने से बचने के लिए सही प्लानिंग, जरूरी कागजात और आय की सटीक जानकारी देना महत्वपूर्ण है। छोटी गलति ...और पढ़ें

नई दिल्ली। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स बचाने का सीधा सा फॉर्मूला है सही प्लानिंग, जरूरी कागजात और सही जानकारी देना। कई बार टैक्सपेयर्स ऊंचे टैक्स रेट की वजह से नहीं, बल्कि रिटर्न फाइल करते समय की गई छोटी-छोटी गलतियों की वजह से अपना पैसा गंवा बैठते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इनमें से कुछ गलतियां इतनी भारी पड़ सकती हैं कि आपको बकाया टैक्स का 200% तक जुर्माना भरना पड़ सकता है। एक सतर्क रवैया आपको टैक्स बचाने और परेशानी से दूर रखने में मदद कर सकता है। आइए जानते हैं कैसे...
टैक्स प्लानिंग की सही शुरुआत कैसे करें?
वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही अपने टैक्स की प्लानिंग करें। अपने निवेश के लिए आम टैक्स छूट का समझदारी से इस्तेमाल करें।
सेक्शन 80C: EPF, PPF, ELSS, लाइफ इंश्योरेंस और होम लोन का मूलधन।
सेक्शन 80D: हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम।
सेक्शन 24(b): होम लोन के ब्याज पर छूट।
सेक्शन 80CCD(1B): NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में निवेश।
सैलरी से HRA, LTA और स्टैंडर्ड डिडक्शन।
सिर्फ टैक्स बचाने के लिए ही निवेश न करें, बल्कि ऐसे प्रोडक्ट्स चुनें जो आपके भविष्य के लक्ष्यों के अनुकूल हों। सीए सुरेश सुराणा कहते हैं, "कई निवेशक सिर्फ हेडलाइन वाले टैक्स-सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स और डिडक्शन पर ध्यान देते हैं, लेकिन उन छिपे हुए शुल्कों को नजरअंदाज कर देते हैं जो चुपचाप आपके पोस्ट-टैक्स रिटर्न को कम कर सकते हैं। ये चार्ज तुरंत भले न दिखें, लेकिन लंबे समय में आपकी टैक्स-सेविंग रणनीति के असर को कम कर देते हैं।"
क्या आप भी अपनी आय के इन सोर्स को बताना भूल जाते हैं?
इनकम टैक्स विभाग की तरफ से नोटिस आने का सबसे बड़ा कारण आय की जानकारी छिपाना या उसे बताना भूल जाना है। आमतौर पर लोग इन इनकम को नजरअंदाज कर देते हैं।
खबरें और भी
- बचत खाते और FD से मिलने वाला ब्याज
- फ्रीलांस या साइड बिजनेस से होने वाली कमाई
- शेयर या म्यूचुअल फंड से होने वाला कैपिटल गेन्स
- प्राप्त किराया (Rent)
- विदेशी आय या संपत्तियां
अपनी आय का मिलान हमेशा AIS (Annual Information Statement) और फॉर्म 26AS से जरूर करें। अगर कोई कमाई इन दोनों में दिख रही है, तो उसे आपके ITR में भी जरूर होना चाहिए।
किन गलतियों पर लग सकता है भारी जुर्माना?
TDS और एडवांस टैक्स कटने के बाद अगर कोई टैक्स बनता है (Self-Assessment Tax), तो रिटर्न फाइल करने से पहले उसे चुका दें। पेमेंट या फाइलिंग में देरी करने पर आपको भारी पेनाल्टी देनी पड़ सकती है।
| सेक्शन | गलती की प्रकृति | जुर्माना |
|---|---|---|
| 140A(3) | सेल्फ-असेसमेंट टैक्स, ब्याज या फीस न चुकाना | बकाया टैक्स की रकम तक |
| 270A(1) | आय कम बताना | उस आय पर देय टैक्स का 50% |
| 270A(1) | आय की जानबूझकर गलत जानकारी देना | उस आय पर देय टैक्स का 200% |
| 234F | ITR फाइल करने में देरी | ₹5,000 (आय ₹5 लाख या उससे कम होने पर ₹1,000) |
| TDS/TCS स्टेटमेंट | समय पर स्टेटमेंट फाइल न करना | ₹200 प्रतिदिन (TDS/TCS की रकम तक सीमित) |
| 271AAD | टैक्स कम करने के लिए खातों में फर्जी एंट्री या जानकारी छिपाना | फर्जी/छिपाई गई एंट्री की 100% वैल्यू |
अगर ITR भरते समय कोई गलती हो जाए तो क्या करें?
गलत पैन कार्ड नंबर, गलत बैंक डिटेल्स, बिना सबूत के छूट मांगना या AIS/26AS से डेटा का मिसमैच होना भारी पड़ सकता है। फिर भी, अगर आपसे कोई गलती हो जाती है, तो कानून आपको डेडलाइन से पहले रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की अनुमति देता है।
- अगर कोई गलती नजर आए तो उसे तुरंत सुधारें।
- एक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करें।
- जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।
सही स्पष्टीकरण के साथ की गई वास्तविक गलतियों पर आमतौर पर जुर्माना नहीं लगता है, बशर्ते आप उसे समय रहते सुधार लें।
फाइलिंग के वक्त कौन-से जरूरी कागजात अपने पास रखें?
- इन्वेस्टमेंट प्रूफ (निवेश के सबूत)
- इंश्योरेंस की रसीदें
- लोन स्टेटमेंट
- किराये की रसीदें
- कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट
- बैंक इंटरेस्ट सर्टिफिकेट
सीए सुराणा सलाह देते हैं, "कई निवेशों में छिपे हुए चार्ज होते हैं, इसलिए उनके बारे में जागरूक रहना और बार-बार खरीदने-बेचने से बचना जरूरी है। एक अच्छी रणनीति सिर्फ सही टैक्स-सेविंग प्रोडक्ट चुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी लागत, वे कैसे काम करते हैं और उनकी एग्जिट शर्तों को समझने में भी है। इन लागतों को कम रखकर आप समय के साथ अपनी वेल्थ को बेहतर ढंग से बढ़ा सकते हैं।"
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