ITR Filling 2026: AIS और TIS के चक्कर में फंसे टैक्सपेयर्स! ITR जमा करने के बाद दोबारा क्यों भरना पड़ रहा है फॉर्म?
ITR Filling 2026: असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। डेटा मैचिंग, नियमों में ...और पढ़ें
-1782127792542_m.webp)
क्यों बढ़ रहे Revised Return के मामले?
HighLights
रिवाइज्ड ITR फाइलिंग में बड़ी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
AIS और डेटा मैचिंग मुख्य कारण हैं इस बदलाव के।
रिवाइज्ड रिटर्न की समयसीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ी।
नई दिल्ली: आकलन वर्ष (Assesment Year) 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग के दौरान इस बार एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। टैक्सपेयर्स बड़ी संख्या में रिवाइज्ड रिटर्न (Revised Return) दाखिल कर रहे हैं। इसके पीछे कई अहम कारण हैं, जिनमें नियमों में बदलाव, डेटा मैचिंग का दबाव और नई सुविधाएं शामिल हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं Revised Return के मामले?
इस साल रिवाइज्ड रिटर्न फाइलिंग में तेजी आने की सबसे बड़ी वजह है डेटा की सख्त निगरानी और पारदर्शिता। अब टैक्सपेयर्स के पास AIS(Annual information system) और अन्य रिपोर्ट्स के जरिए उनकी आय और ट्रांजैक्शन का पूरा रिकॉर्ड होता है। ऐसे में गलती भी पकड़ में आ जाती है।
* कई लोग पहली बार ITR फाइल करते समय इनकम या डिडक्शन मिस कर देते हैं, जिसे बाद में सुधारना पड़ता है।
* AIS, Form 26AS और अन्य डेटा के बीच मिसमैच सामने आता है
* नए ITR फॉर्म्स में ज्यादा डिटेल भरनी पड़ रही है, जिससे गलती की संभावना बढ़ी है
* कई टैक्सपेयर्स बाद में टैक्स बचत के अवसर (deductions) पहचानते हैं
इसके अलावा, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती डिजिटल ट्रैकिंग और स्क्रूटनी के कारण लोग अब गलती सुधारने के लिए ज्यादा सतर्क हो गए हैं।
Revised Return फाइल करने की सुविधा ने बढ़ाया ट्रेंड
Budget 2026 के बाद सरकार ने टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देते हुए रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की समयसीमा बढ़ा दी है।
* पहले रिवाइज्ड रिटर्न की आखिरी तारीख 31 दिसंबर होती थी
* अब इसे बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है।
इस बदलाव के कारण टैक्सपेयर्स के पास अपनी गलतियां सुधारने का ज्यादा समय है, जिससे रिवाइज्ड रिटर्न की संख्या बढ़ी है।
खबरें और भी
ITR फाइल करने की जरूरी डेडलाइन
असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अलग-अलग कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए अलग डेडलाइन तय की गई हैं:
* 31 जुलाई 2026 – सैलरीड और नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर्स (ITR-1, ITR-2)
* 31 अगस्त 2026 – बिजनेस/प्रोफेशन (ITR-3, ITR-4, नॉन-ऑडिट)
* 31 अक्टूबर 2026 – ऑडिट वाले केस
* 31 दिसंबर 2026 – Belated Return (लेट फाइलिंग)
* 31 मार्च 2027 – Revised Return की अंतिम तारीख
क्या है संदेश?
ITR फाइलिंग का सिस्टम अब पहले से ज्यादा डेटा-ड्रिवन और सख्त हो गया है। ऐसे में एक छोटी गलती भी नोटिस का कारण बन सकती है। यही वजह है कि टैक्सपेयर्स पहले रिटर्न फाइल करने के बाद भी उसे रिवाइज करके सही करना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं।
देखा जाए तो ITR Filing 2026 में revised returns का बढ़ता ट्रेंड यह दिखाता है कि टैक्सपेयर्स अब ज्यादा जागरूक और सावधान हो गए हैं। बढ़ी हुई समयसीमा और डिजिटल डेटा ट्रैकिंग ने इस प्रक्रिया को आसान तो बनाया है, लेकिन साथ ही सही और सटीक जानकारी देना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।