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    Income Tax 2026: ITR फाइल करने में भारी पड़ेगी ये लापरवाही, इनकम टैक्स विभाग की AI तकनीक ऐसे पकड़ेगी आपकी हर गड़बड़ी

    Updated: Sat, 23 May 2026 08:10 PM (IST)

    आयकर विभाग 2026-27 के लिए ITR फाइलिंग में AI और ऑटोमैटिक डेटा मैचिंग का उपयोग कर रहा है, जिससे छोटी-बड़ी गड़बड़ियां भी पकड़ी जा सकती हैं। टैक्स नोटिस ...और पढ़ें

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    ITR फाइल करने में भारी पड़ेगी ये लापरवाही, IT विभाग की AI तकनीक ऐसे पकड़ेगी आपकी हर गड़बड़ी

    HighLights

    1. AI और ऑटोमैटिक डेटा मैचिंग से पकड़ी जाएंगी गड़बड़ियां।

    2. AIS को फॉर्म 16, बैंक स्टेटमेंट से जरूर मिलाएं।

    3. सैलरी, ब्याज, TDS, कैपिटल गेन्स की गलतियां टालें।

    नई दिल्ली। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अब आपकी हर छोटी-बड़ी कमाई को पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमैटिक डेटा मैचिंग का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बिना सोचे-समझे ITR फाइल करना मुसीबत को न्यौता देने जैसा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आपके AIS (Annual Information Statement) और असल डाक्यूमेंट्स में जरा सा भी मिसमैच हुआ तो टैक्स नोटिस सीधे आपके घर पहुंचेगा। अगर आप इस कानूनी पचड़े से बचना चाहते हैं, तो रिटर्न दाखिल करने से पहले 6 कड़े नियमों और गड़बड़ियों के बारे में जरूर जान लें।

    अक्सर लोग पोर्टल पर लॉगिन करते ही डिटेल चेक करे बिना ही सबमिट कर देते हैं। कई बार तो सारी जानकारी मैच कर जाती है, पर कई बार ऐसा भी होता है कि पोर्टल पर किसी जानकारी में मामूली सा अंतर आ जाए, और यही मामूली अंतर आपके लिए बड़ा संकट पैदा कर दे।

    क्या है एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट?

    एआईएस (AIS) में आपकी सैलरी, बैंक ब्याज, इनवेस्टमेंट, प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त और कटे हुए टैक्स (TDS) का पूरा कच्चा-चिट्ठा होता है। लेकिन इस पर बिना देखे भरोसा करना भारी पड़ सकता है। टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, एआईएस को सिर्फ एक रेफरेन्स के तौर पर देखना चाहिए, क्योंकि कई बार इसमें अधूरी जानकारी, दोहरी एंट्री या रिपोर्टिंग की गलतियां हो सकती हैं। रिटर्न भरने से पहले इसे अपने फॉर्म 16, फॉर्म 26AS, बैंक स्टेटमेंट और इनवेस्टमेंट प्रूफ से जरूर मिला लें।

    इन 6 गलतियों की वजह से आ सकता है टैक्स नोटिस

    आजकल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए ऑटोमैटिक डेटा मैचिंग और एआई (AI) बेस्ड सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए कुछ बातों को ध्यान में रखकर में गलतियों से बच सकते हैं:

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    सैलरी को लेकर न करें गलती: अगर आपके आईटीआर में दिखाई गई सैलरी, आपके फॉर्म 16 या एआईएस में दर्ज सैलरी से अलग है, तो टैक्स विभाग आपसे सवाल-जवाब कर सकता है। इसलिए ध्यान रखें कि सारी जगह आपकी सैलरी एक जैसी हो।

    बैंक ब्याज को छिपाना या भूल जाना: कई लोग सेविंग्स अकाउंट, एफडी (FD), आरडी (RD) या टैक्स रिफंड पर मिलने वाले ब्याज को रिटर्न में दिखाना भूल जाते हैं। बैंक इसकी पूरी जानकारी एआईएस में दे देते हैं, इसलिए इसे छिपाना मुमकिन नहीं है।

    TDS या TCS का गलत दावा: अगर आप फॉर्म 26AS या एआईएस से ज्यादा टीडीएस क्रेडिट का दावा करते हैं, तो आपका रिफंड अटक सकता है या स्क्रूटनी का नोटिस आ सकता है।

    बड़े लेन-देन पर नजर: म्यूचुअल फंड में बड़ा निवेश, प्रॉपर्टी की खरीद, भारी-भरकम क्रेडिट कार्ड बिल, विदेश पैसे भेजना या शेयर मार्केट के बड़े ट्रांजैक्शन सीधे एआईएस में दर्ज होते हैं। अगर ये आपकी घोषित कमाई से मेल नहीं खाते, तो भी आप विभाग के रडार पर आ सकते हैं।

    कैपिटल गेन्स में गड़बड़: शेयर, म्यूचुअल फंड या कोई प्रॉपर्टी बेचने पर जो मुनाफा (Capital Gains) होता है, उसे सही-सही न दिखाना या छिपाना जांच का कारण बन सकता है।

    GST और बिजनेस इनकम का अंतर: कारोबारियों और प्रोफेशनल्स के लिए यह बेहद जरूरी है। अगर आपके जीएसटी रिटर्न में दिखाया गया टर्नओवर, आपके आईटीआर में दिखाए गए टर्नओवर से ज्यादा मिलता है, तो सिस्टम तुरंत इस गड़बड़ी को पकड़ लेगा।

    ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए आप आसानी से किसी भी गड़बड़ी से बच सकते हैं। पहले से फॉर्म के भरे होने का मतलब ये बिलकुल नहीं कि फॉर्म में सारी जानकारी सही हो, इसलिए हमेशा सारी जानकारी दो बार चेक करें, और उसके बाद ही सबमिट करें।

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