ITR भरने में ना दिखाएं तेजी, 15 जून से पहले भरा तो आएगा Income Tax का नोटिस! अटक जाएगा रिफंड, नौकरी वाले समझें माजरा
आयकर रिटर्न (ITR) जल्दी भरने से बचें, खासकर 15 जून से पहले, क्योंकि इससे अधूरा डेटा और आयकर विभाग से नोटिस आ सकता है। साथ ही जिससे रिफंड अटकने का जोखि ...और पढ़ें
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ITR भरने से पहले जानें 15 जून का नियम (AI Image)
HighLights
15 जून से पहले ITR भरने से बचें, नोटिस का खतरा।
फॉर्म 16, 26AS जैसे दस्तावेज जून मध्य तक अपडेट होते हैं।
अधूरी जानकारी देने पर रिफंड अटक सकता है।
नई दिल्ली| अगर आप भी ITR (Income Tax Return) फाइल करते हैं तो छोटी-छोटी बारीकियां जानना जरूरी होता है। ITR दाखिल करने का समय आते ही अधिकांश लोग अपने डाक्यूमेंट्स जुटाने लगते हैं। ITR भरने की आदत एकदम सही है लेकिन उसे भरने का सही समय भी बहुत मायने रखता है, लोग जल्दी के चक्कर में अप्रैल या मई में ही रिटर्न भर देते हैं उन्हें 15 जून तक का इंतजार करना चाहिए। ये जल्दबाजी आपके लिए तकनीकी रूप से जोखिम भरा हो सकता है, और आपका रिफंड भी अटक सकता है।
क्यों जरूरी है 15 जून का इंतजार?
रिटर्न भरने के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज फॉर्म 16, फॉर्म 26AS और वार्षिक सूचना विवरण (AIS) होते हैं। बैंकों और कंपनियों को आपके टैक्स (TDS) की जानकारी विभाग को देने के लिए 31 मई तक का समय मिलता है। लेकिन महत्वपूर्ण कर दस्तावेज आमतौर पर जून के मध्य तक अपडेट या जारी किए जाते हैं। इन रिकॉर्डों के पूरी तरह से अपडेट होने से पहले रिटर्न दाखिल करने से आय या TDS विवरण में अनियमितता की संभावना बढ़ सकती है।
इनकम टैक्स भेजेगा नोटिस?
फॉर्म 16 एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है क्योंकि इसमें वेतन आय, छूट, कटौतियां, काटे गए TDS और Tax का पूरा विवरण होता है। 15 जून से पहले ITR फाइल करने पर आपकी जानकारी अधूरी हो सकती है। जल्दबाजी में गलत या अधूरी जानकारी देने पर इनकम टैक्स विभाग आपको नोटिस भेज सकता है। इसके अलावा डेटा मैच ना होने की स्थिति में आपका रिफंड भी फंस सकता है। अगर आप 15 जून के बाद आईटीआर फाइल करते हैं तो आपका सारा डेटा पोर्टल पर दिखने लगेगा। इसीलिए 31 जुलाई तक का वक्त मिलता है।
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इन लोगों की बढ़ेंगी मुश्किलें
जिन लोगों की आय के स्रोत यानि कमाई के जरिए एक से ज्यादा हैं, उन्हें खास सावधानी रखनी चाहिए। अगर आप शेयर बाजार, ब्याज या बिजनेस से कमाते हैं, तो आपका डेटा अपडेट होने में ज्यादा समय लग सकता है। कई बार बैंक अपनी रिपोर्ट में देरी से सुधार करते हैं। ऐसे में अगर आपके द्वारा दी गई जानकारी और विभाग के पास मौजूद डेटा में अलग-अलग मिलते हैं, तो आपका रिटर्न अटक सकता है।
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