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    'राजा की तरह टैक्स भरो और भिखारी की तरह..', ITR Refund पर क्यों भड़के सीए, रिफंड में लगेंगे कितने और दिन?

    Updated: Wed, 21 Jan 2026 08:42 PM (IST)

    ITR refund pending 2026: लाखों टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स रिफंड का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन विभाग के पास 31 दिसंबर 2026 तक रिटर्न प्रोसेस करने का समय है। ...और पढ़ें

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    'राजा की तरह टैक्स भरो और भिखारी की तरह..', ITR Refund पर क्यों भड़के सीए, रिफंड में लगेंगे कितने और दिन?

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    नई दिल्ली| इनकम टैक्स रिफंड (income tax refund delay) का इंतजार कर रहे लाखों टैक्सपेयर्स के लिए राहत की बात यह है कि रिफंड में देरी का मतलब हमेशा कोई गड़बड़ी नहीं होता। वित्त वर्ष 2024-25 (आकलन वर्ष 2025-26) (income tax refund status AY 2025-26) के लिए रिटर्न फाइल करने वाले कई लोग अब भी रिफंड का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कानून के तहत आयकर विभाग के पास 31 दिसंबर 2026 तक रिटर्न प्रोसेस करने और रिफंड जारी करने का समय है। यानी फिलहाल विभाग तय समयसीमा के अंदर ही काम कर रहा है।

    'राजा की तरह टैक्स भरो और भिखारी की तरह..'

    सीए रुचिता वघानी आईटीआर रिफंड में देरी पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि, "नए भारत में स्वागत है। राजा की तरह टैक्स भरो और भिखारी की तरह रिफंड मांगो। 30,000 रुपए से बड़े अमाउंट के रिफंड अब भी लंबित हैं। टैक्सपेयर्स द्वारा इतनी शिकायतें करने के बाद भी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से कोई निर्णायक जवाब नहीं दिया गया।

    क्यों अटके लाखों टैक्सपेयर्स के रिफंड?

    इनकम टैक्स पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक 19 जनवरी 2026 तक 13.67 करोड़ यूजर्स रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 8.82 करोड़ ITR फाइल किए जा चुके हैं और 8.69 करोड़ रिटर्न वेरिफाई भी हो चुके हैं। वेरिफाइड रिटर्न में से 8.17 करोड़ ITR प्रोसेस हो गए हैं, इसके बावजूद लाखों टैक्सपेयर्स को अब तक रिफंड नहीं मिला है।

    यह भी पढ़ें- ITR डेडलाइन और रिफंड में देरी का झंझट होगा खत्म, बजट 2026 में टैक्सपेयर्स को मिल सकती है राहत, क्या हैं उम्मीदें

    हाई-वैल्यू क्लेम वाले रिटर्न भी बड़ी वजह

    एक बड़ी वजह हाई-वैल्यू क्लेम वाले रिटर्न हैं। ऐसे मामलों में ऑटोमेटेड जांच और अतिरिक्त वैलिडेशन किया जाता है, जिससे प्रोसेसिंग में समय लगता है। इसके अलावा आयकर अधिनियम की धारा 245(2) के तहत अगर किसी टैक्सपेयर पर पुराने टैक्स बकाया हैं, तो रिफंड को एडजस्ट किया जा सकता है या अस्थायी रूप से रोका भी जा सकता है।

    टैक्सपेयर्स की छोटी-छोटी गलतियां भी वजह

    कई बार देरी की वजह सिस्टम नहीं, बल्कि टैक्सपेयर्स की छोटी गलतियां होती हैं। ऐसे मामलों में आयकर विभाग नोटिस या इंटिमेशन भेजता है, जिसका जवाब देना जरूरी होता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कई सैलरीड कर्मचारी ITR में 80C, 80D या HRA जैसे डिडक्शन क्लेम कर देते हैं, लेकिन TDS कटते समय नियोक्ता को इसकी जानकारी नहीं देते, जिससे मिसमैच बन जाता है।

    सेक्शन 143(1) में छिपी है पूरी वजह

    सीए सिद्धार्थ केजरीवाल बताते हैं कि कई बार नया टैक्स रिजीम लागू होने के बावजूद टैक्सपेयर पुराने रिजीम में डिडक्शन के साथ रिटर्न फाइल कर देते हैं, जिससे रिफंड अटक जाता है। उनका मानना है कि आने वाले एक हफ्ते में आईटीआर रिफंड आ सकता है।

    अन्य सीए बताते हैं कि CPC को रिटर्न फाइल होने वाले वित्त वर्ष के अंत से 9 महीने के भीतर सेक्शन 143(1) के तहत प्रोसेस करना होता है। अगर 31 दिसंबर 2026 तक रिटर्न प्रोसेस नहीं होता, तो इसके बाद विभाग नोटिस जारी करने का अधिकार खो देता है।

    इसके अलावा दिसंबर 2025 में CBDT की 'Nudge' (income tax nudge) मुहिम के तहत संदिग्ध रिटर्न पर SMS और ईमेल के जरिए अलर्ट भेजे जा रहे हैं। जब तक टैक्सपेयर जवाब नहीं देता या संशोधित रिटर्न दाखिल नहीं करता, तब तक रिफंड रोका जा सकता है।