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    Income Tax New Rules: नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ा अलर्ट! HRA क्लेम पर आया बड़ा नियम, अब बतानी होगी ये बड़ी बात

    Updated: Wed, 25 Feb 2026 06:09 PM (IST)

    New Income Tax Rules 2026: नए इनकम टैक्स फॉर्म में HRA क्लेम और मकान मालिक को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। पढ़ें पूरी खबर। ...और पढ़ें

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    Income Tax New Rules: नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ा अलर्ट! HRA क्लेम पर आया बड़ा नियम, अब बतानी होगी ये बड़ी बात

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    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली| नए इनकम टैक्स फॉर्म में अब एचआरए क्लेम (New Income Tax HRA Rules) करना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि किराया भत्ता लेने के लिए मकान मालिक से आपका क्या रिश्ता है, यह भी बताना होगा।

    नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत जारी मसौदा नियमों और फॉर्म में यह बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। नया कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।

    सरकार ने हितधारकों के लिए ड्राफ्ट नियम और फॉर्म जारी किए हैं। इन्हीं के आधार पर अंतिम नियम और फॉर्म अगले महीने अधिसूचित किए जाएंगे। सबसे अहम बदलाव नए फॉर्म 124 में किया गया है।

    इसके तहत अगर कोई कर्मचारी एचआरए (HRA claim rules 2026) का दावा करता है तो उसे यह घोषित करना होगा कि जिस मकान मालिक को वह किराया दे रहा है, उससे उसका कोई पारिवारिक या अन्य संबंध तो नहीं है।

    मकान मालिक से क्या रिश्ता, बताना अनिवार्य

    फिलहाल व्यवस्था यह है कि कर्मचारी अपने नियोक्ता को अनुमानित किराए का ब्योरा देता है। लेकिन मकान मालिक से रिश्ते का खुलासा अनिवार्य (landlord relationship disclosure HRA) नहीं है।

    अब सरकार इस खामी को बंद करना चाहती है। टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि इससे फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए किराया दावों पर लगाम लगेगी। नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स के पार्टनर संदीप झुनझुनवाला ने बताया कि,

    यह प्रावधान असली और कृत्रिम दावों के बीच फर्क करने में मदद करेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत दावों को खारिज करना आसान होगा, जबकि वास्तविक व्यवस्थाओं पर इसका असर नहीं पड़ेगा।"

    विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट भी सख्ती

    सिर्फ HRA ही नहीं, विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट के दावों को लेकर भी सख्ती बढ़ाई गई है। प्रस्तावित फॉर्म 44 में ऑडिटर की भूमिका और जिम्मेदारी दोनों कड़ी की गई हैं।

    अब चार्टर्ड अकाउंटेंट को विदेशी टैक्स कटौती प्रमाणपत्र, भुगतान का सबूत, विनिमय दर का सही रूपांतरण और टैक्स संधि की पात्रता की स्वतंत्र जांच करनी होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियम उन मामलों में चुनौती बन सकता है जहां विदेशी देशों में एकीकृत टैक्स स्टेटमेंट जारी होते हैं या कर किसी अलग वित्त वर्ष में जमा किया गया हो।

    कंपनियों के लिए पैन आवेदन प्रक्रिया भी सख्त की गई है। अब आवेदन करते समय यह घोषणा देना अनिवार्य होगा कि कंपनी के पास पहले से कोई पैन नहीं है।

    अगर शाखा, प्रोजेक्ट ऑफिस या पुरानी इकाई के नाम पर पैन मौजूद है तो दोहराव से बचने के लिए आंतरिक जांच जरूरी होगी। झुनझुनवाला के अनुसार, इससे डेटाबेस साफ-सुथरा रहेगा, लेकिन जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।

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    न्यू इनकम टैक्स ऑडिट फॉर्म 26 बदलाव

    न्यू इनकम टैक्स ऑडिट फॉर्म 26 में भी अहम बदलाव किए गए हैं। अब अगर वैधानिक ऑडिटर की रिपोर्ट में कोई प्रतिकूल टिप्पणी, अस्वीकरण या पात्रता दी गई है तो उसका असर आय, हानि या बुक प्रॉफिट पर स्पष्ट बताना होगा।

    उदाहरण के तौर पर, अगर राजस्व मान्यता, शेयर मूल्यांकन या प्रावधान में कमी को लेकर आपत्ति है तो कर ऑडिटर को जांचना होगा कि इससे कर योग्य आय कम तो नहीं दिखाई गई।

    इसके अलावा, कर ऑडिट रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड या सर्वर का ब्योरा, आईपी एड्रेस, डेटा किस देश में स्टोर है और भारत में बैकअप सर्वर का पता भी बताना होगा।

    कुल मिलाकर नए इनकम टैक्स फॉर्म में HRA से लेकर विदेशी आय और ऑडिट तक हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश दिख रही है। हालांकि इससे अनुपालन की लागत बढ़ सकती है। लेकिन सरकार का फोकस साफ है कि गलत दावों पर सख्ती और सिस्टम में ज्यादा पारदर्शिता।

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