Tax Planning: 31 मार्च से पहले कहां करें निवेश, कैसे बचाएं टैक्स, 80c के अलावा क्या ऑप्शन? CA ने सारे बता दिए
वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले, करदाता टैक्स बचाने के लिए निवेश के तरीके खोज रहे हैं। सीए ने 80C के अलावा अन्य धाराओं जैसे 80D, 80E, 80JJAA और दिव्य ...और पढ़ें
नई दिल्ली। फाइनेंशियल ईयर (FY26), 31 मार्च को क्लोज होने वाला है। ऐसे में करदाता आखिरी वक्त में निवेश के जरिए टैक्स बचाने (Tax Planning) की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं टैक्स बचाने के क्या-क्या माध्यम और तरीके हैं, जिनके जरिए 12 लाख से ज्यादा की इनकम पर भी टैक्स बचाया जा सकता है। ओल्ड रिजीम (Old Regime) के अलावा, न्यू टैक्स रिजीम में कौन-से डिडक्शन शामिल हैं। क्या हाउसिंग लोन के ब्याज पर न्यू रिजीम में डिडक्शन का लाभ लिया जा सकता है? ऐसे कई सवाल और कर बचाने के तरीकों पर जागरण बिजनेस ने चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक जैन से खास बातचीत की। आइये आपको 5 बड़े सवालों के जवाब से टैक्स प्लानिंग के बारे में समझाते हैं।
सवाल- 80c के अलावा और कौन-से सेक्शन जहां टैक्स बचाया जा सकता है?
जवाब- सेक्शन 80c और उसमें मिलने वाली डेढ़ लाख रुपये की लिमिट और डिडक्शन के बारे में हम सभी जानते हैं। लेकिन 80C के अलावा भी इनकम टैक्स की कई ऐसी धाराएं हैं, जिनके जरिए हम और भी टैक्स बचा सकते हैं। ये डिडक्शन मुख्य रूप से इंडिविजुअल और HUF के लिए बने हैं। 80C के बाद अगर सबसे महत्वपूर्ण सेक्शन की बात करें, तो वह है सेक्शन 80D (मेडिकल इंश्योरेंस)। इसके तहत आप हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर 25,000 रुपये तक की टैक्स छूट ले सकते हैं।"डिकल इंश्योरेंस (सेक्शन 80D) के तहत, अगर आप या आपके माता-पिता सीनियर सिटीजन हैं, तो टैक्स छूट की यह लिमिट (25,000 रुपये से) और भी बढ़ जाती है।
सवाल- सेक्शन 80E और सेक्शन 80JJAA में क्या प्रावधान हैं?
जवाब- सेक्शन 80E, एजुकेशन लोन के ब्याज पर टैक्स छूट दिलाने के काम आता है। सेक्शन 80JJAA, यह सेक्शन खास तौर पर कंपनियों और बिज़नेस के लिए बनाया गया है। अगर कोई कंपनी नए कर्मचारियों को नौकरी पर रखती है, तो उसे उन कर्मचारियों की सैलरी के आधार पर अतिरिक्त टैक्स छूट मिल जाती है। इन सबके अलावा, दिव्यांग व्यक्तियों और कुछ गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए भी इनकम टैक्स में खास छूट है और सेक्शन 80U, 80DD और 80DDB) में यह उपलब्ध है।
सवाल- क्या पति, पत्नी को पैसे ट्रांसफर कर टैक्स बचा सकता है?
जवाब- मान लीजिए आपके पास 40 लाख रुपये हैं। आपने दिमाग लगाया और 20 लाख रुपये अपनी पत्नी के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए ताकि वो उसकी FD करा ले। आपने सोचा कि चूंकि पत्नी की इनकम टैक्स लिमिट से कम है, इसलिए FD के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट हमसे हमेशा एक कदम आगे चलता है! यहाँ आपको दो बातें समझनी होंगी:
रकम ट्रांसफर करने पर टैक्स: आपने जो 20 लाख रुपये पत्नी को दिए, क्या उस पर टैक्स लगेगा? बिल्कुल नहीं। इनकम टैक्स के नियमों के अनुसार, पति-पत्नी एक-दूसरे को कितना भी पैसा दे सकते हैं, वह पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है।
उस रकम से होने वाली कमाई पर टैक्स: असली पेंच यहीं है! अगर आप बिना किसी एवज (Without consideration) के पत्नी को पैसे गिफ्ट करते हैं और उस पैसे से कोई कमाई (जैसे FD का ब्याज) होती है, तो वह कमाई पत्नी की नहीं मानी जाएगी। अगर उन 20 लाख रुपयों पर 6% के हिसाब से साल का 1,20,000 रुपये ब्याज आता है, तो वह ब्याज आपकी (यानी पैसे देने वाले की) इनकम में जोड़ दिया जाएगा और टैक्स आपको ही चुकाना होगा। इसे टैक्स की भाषा में 'क्लबिंग ऑफ इनकम' कहते हैं।
सवाल- ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) में टैक्स बचाने के बहुत सारे ऑप्शंस हैं। लेकिन न्यू रिजीम वालों के पास क्या विकल्प हैं?
जवाब- जी हाँ, बिल्कुल ऑप्शंस अवेलेबल हैं! इनमें किराए वाली प्रॉपर्टी पर होम लोन (सेक्शन 24b): अगर आपने अपनी प्रॉपर्टी किराए (Rent) पर दी है, तो आप उस पर चल रहे होम लोन के ब्याज की छूट न्यू टैक्स रिजीम में भी ले सकते हैं। NPS में कंपनी का योगदान (सेक्शन 80CCD(2)): नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में अगर आपकी कंपनी (Employer) आपके खाते में पैसे डालती है, तो उस अमाउंट पर आपको नए रिजीम में भी टैक्स छूट मिलती है।
नए कर्मचारियों की भर्ती (सेक्शन 80JJAA): अगर आपका अपना बिज़नेस है और आप नए लोगों को नौकरी पर रखते हैं, तो उनकी सैलरी के आधार पर आपको नए रिजीम में भी डिडक्शन मिल जाती है। नौकरीपेशा लोगों के लिए पुराने रिजीम में 50,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन थी, जिसे अब नए रिजीम में बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है। अगर आप इन सभी छूटों का एक सही कॉम्बो (Combo) बना लें, तो आप अपनी काफी बड़ी इनकम (जैसे 10-12 लाख रुपये या उससे भी ऊपर) पर आसानी से टैक्स बचा सकते हैं।
सवाल- क्या आप दान (Donation) देकर भी अपना टैक्स बचा सकते हैं?
जवाब- टैक्स बचाने के लिए किए जाने वाले दान को हम मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांट सकते हैं। पहला पॉलिटिकल डोनेशन (राजनीतिक दलों को चंदा) इसके अलावा, धार्मिक या चैरिटेबल ट्रस्ट को दान (सेक्शन 80G) दूसरा तरीका है किसी रजिस्टर्ड ट्रस्ट, जैसे वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड या आपके आस-पास के किसी ऐसे मंदिर/संस्था में दान देना जो इनकम टैक्स के सेक्शन 80G के तहत रजिस्टर्ड हो। यहाँ दान देकर आप अपने अमाउंट पर 50% तक की टैक्स छूट (Rebate) ले सकते हैं।
जब भी आप दान दें, तो कागजात (Papers) जरूर चेक करें। क्या उस संस्था के पास वाकई 80G का अप्रूवल है? क्या दान देने के बाद आपको जो रसीद (Receipt/Form) मिली है, उस पर आपका नाम और PAN नंबर सही-सही लिखा है? अगर आपने बिना चेक किए दान दे दिया और बाद में वह रसीद या संस्था फर्जी निकली, तो लेने के देने पड़ सकते हैं! आपका टैक्स तो लगेगा ही, साथ ही उस पर 100% से 200% तक की पेनल्टी (जुर्माना) और 100% ब्याज भी लग सकता है। यानी, अगर आपने 10 लाख रुपये का दान दिया था, तो टैक्स और जुर्माने के रूप में आपके पूरे 10 लाख रुपये जा सकते हैं। इसलिए, दान हमेशा सावधानी से और सही जगह दें।"
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