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    Tax Harvesting: समझदारी से टैक्स बचाने का जुगाड़, घाटे से मुनाफे को कैसे करें मैनेज? CA से समझें

    Updated: Sun, 15 Mar 2026 05:11 PM (IST)

    टैक्स हार्वेस्टिंग एक कुशल रणनीति है जो इक्विटी और म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन टैक्स को कम करने में मदद करती है। इसमें 31 मार्च से पहले निवेश की समीक्ष ...और पढ़ें

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    टैक्स हार्वेस्टिंग, कैपिटल गैन टैक्स बचाने का तरीका है।

    ई दिल्ली। 31 मार्च से पहले करोड़ों करदाता, टैक्स बचाने और बेहतर टैक्स प्लानिंग (Tax Planning) के लिए CA और इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह लेते हैं। यह फैक्ट है कि बेहतर प्लानिंग के साथ टैक्स के बोझ को कम किया जा सकता है, क्योंकि टैक्स बचाने और टैक्स लायबिलिटी कम करने के कई तरीके होते हैं उन्हीं में से एक तरीका है 'टैक्स हार्वेस्टिंग', क्या आप इससे वाकिफ हैं? अगर नहीं तो इसके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए। आइये आपको बताते हैं क्या होती है टैक्स हार्वेस्टिंग और कैसे इसके जरिए टैक्स बचाया जा सकता है?

    क्या है टैक्स हार्वेस्टिंग?

    टैक्स हार्वेस्टिंग (Tax Harvesting), इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो स्ट्रेटेजी है इसका मकसद कैपिटल गैन टैक्स पर टैक्स लायबिलिटी (देय कर) को कम करना है, विशेष रूप से इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड से होने वाले मुनाफे पर।

    सरल शब्दों में टैक्स हार्वेस्टिंग का मतलब, साल खत्म होने से पहले अपने इक्विटी व म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट की समीक्षा करना और मुनाफे या नुकसान को योजनाबद्ध तरीके से बुक करना, ताकि टैक्स देनदारी कम से कम रहे। यह पूरी तरह वैध टैक्स प्लानिंग का हिस्सा है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

    टैक्स गैन और टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग

    टैक्स हार्वेस्टिंग के दो प्रकार होते हैं — पहला टैक्स गैन हार्वेस्टिंग और दूसरा टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग। इन दोनों तरीकों को बाजार से जुड़ी अलग-अलग परिस्थितियों में लागू किया जाता है।

    टैक्स-गेन हार्वेस्टिंग एक ऐसी रणनीति है जिसमें निवेशक 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए इक्विटी शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड यूनिट बेचकर टैक्स-फ्री लिमिट के अंदर लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन टैक्स बुक करते हैं, और बाद में दोबारा इसे रिइन्वेस्ट कर देते हैं। इससे टैक्स लायबिलिटी कम करने में मदद मिलती है।

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    टैक्स-लॉस हार्वेस्टिंग में इक्विटी शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड यूनिट को नुकसान में बेचा जाता है। इसमें होने वाले लॉस की भरपाई कैपिटल गैन टैक्स को सेट ऑफ करने के लिए किया जा सकता है, जिससे कुल टैक्स भुगतान कम हो जाता है।

    कैसे काम करता है टैक्स हार्वेस्टिंग?

    दिल्ली स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक जैन ने बताया कि शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस (STCL) को उसी फाइनेंशियल ईयर में शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) दोनों के खिलाफ सेट ऑफ किया जा सकता है। टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग प्रोसेस में आप उन इक्विटी या म्यूच्यूअल फंड्स को बेचते हैं जिनमें नुकसान हो रहा है। इससे टैक्सपेयर्स ऐसे नुकसान को साल के दौरान कमाए गए कैपिटल गेन इनकम के खिलाफ सेट ऑफ कर सकते हैं, जिससे साल के लिए कुल टैक्सेबल इनकम कम हो जाती है।

    उन्होंने कहा कि किसी भी एक्स्ट्रा नुकसान को टैक्स कानूनों में दिए गए दायरे में अगले फाइनेंशियल ईयर में आगे ले जाया जा सकता है। ध्यान रखें कि लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस (LTCL) को उसी फाइनेंशियल ईयर में सिर्फ लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) के खिलाफ सेट ऑफ किया जा सकता है, शॉर्ट-टर्म गेन या दूसरी इनकम के खिलाफ नहीं। टैक्स लॉस बेनिफिट्स का इस्तेमाल करने के लिए ड्यू डेट के अंदर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना ज़रूरी है।

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    उन्होंने कहा कि टैक्सपेयर को ऊपर बताए गए टैक्स हार्वेस्टिंग मेथड के साथ सेट-ऑफ प्रोविजन्स का इस्तेमाल करना चाहिए। सेट ऑफ और टैक्स हार्वेस्टिंग मेथड का इस्तेमाल इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स पुराने और नए टैक्स सिस्टम में कर सकते हैं। टैक्सपेयर को टैक्स हार्वेस्टिंग का इस्तेमाल लीगल फ्रेमवर्क के अनुसार करना चाहिए।