इन 2 डिफेंस कंपनियों के हाथ लगा जैकपॉट! मिला एडवांस्ड हथियार बनाने का सरकारी लाइसेंस, आपने शेयर खरीदे क्या?
डिफेंस सेक्टर की दो कंपनियों, Apollo Micro Systems और Zen Technologies को सरकारी लाइसेंस मिले हैं। इन लाइसेंसों से कंपनियों को एडवांस्ड हार्डवेयर मैन् ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। डिफेंस सेक्टर पर केंद्रित दो कंपनियों को हाल ही में सरकारी लाइसेंस मिले हैं। ये लाइसेंस बेहद खास हैं, जिनकी मदद से ये कंपनियां एडवांस्ड हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग में अपना विस्तार कर सकेंगी। लाइसेंस के लिए ये मंजूरियां मिसाइलों, गोला-बारूद और वायु रक्षा प्रणालियों के स्वदेशी उत्पादन की दिशा में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही हैं। साथ ही, इससे महत्वपूर्ण सैन्य तकनीकों में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूती भी मिलेगी और देश की लॉन्ग टर्म डिफेंस सेक्टर ग्रोथ को मदद भी मिलेगी। कौन-सी हैं ये कंपनियां और इन लाइसेंस का इनके शेयर पर क्या असर पड़ सकता है, आइए समझते हैं।
ये हैं वे दोनों कंपनियां
जिन कंपनियों की हम बात कर रहे हैं, उनमें पहली है 10,334.68 करोड़ रुपये की मार्केट कैपिटल वाली Apollo Micro Systems, जिसका शेयर सोमवार को 6.30 रुपये या 2.23 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 289.25 रुपये पर बंद हुआ था। दूसरी कंपनी है 14,824.32 करोड़ रुपये की मार्केट कैपिटल वाली Zen Technologies, जिसका शेयर कल 25.75 रुपये या 1.60 फीसदी चढ़कर 1,640.10 रुपये पर बंद हुआ।
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स को मिले लाइसेंस में क्या है खास?
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स को 10 अप्रैल 2026 को DPIIT से एडवांस्ड एम्यूनिशन सिस्टम्स के निर्माण, असेम्बल, इंटीग्रेट और प्रूफ-टेस्ट के लिए आजीवन लाइसेंस प्राप्त हुआ है, जिससे भारत के रक्षा निर्माण इकोसिस्टम में इसकी स्थिति और मजबूत हुई है।
इस लाइसेंस के तहत Apollo Micro Systems Limited को हैदराबाद स्थित अपनी फैसिलिटीज में आधुनिक रक्षा प्रणालियों के निर्माण की अनुमति मिली है, जिसकी दो कैटेगरी हैं। Category I में मिसाइलें, ATGMs, टॉरपीडो, पानी के नीचे बिछाई जाने वाली बारूदी सुरंगें, सेफ्टी और आर्मिंग मैकेनिज्म, और चैफ, फ्लेयर्स तथा डिकॉय जैसी चीजें शामिल हैं।
वहीं Category II में हवाई बम, रॉकेट और सर्विलांस और सटीक मारक क्षमता वाले लोइटरिंग म्यूनिशंस शामिल हैं।
बिजनेस पर क्या पड़ेगा असर?
भारत सरकार से मिला लाइफटाइम लाइसेंस, Apollo Micro Systems के बिनेस मॉडल में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। कंपनी अब एम्बेडेड सिस्टम और सब-सिस्टम से हटकर, पूरी तरह से वेपन सिस्टम्स के निर्माण की ओर बढ़ रही है, जिसमें मिसाइलें, टॉरपीडो, सटीक बम और लोइटरिंग म्यूनिशन्स शामिल हैं।
इससे कंपनी की लॉन्ग टर्म रेवेन्यू क्षमता और रक्षा क्षेत्र में इसकी रणनीतिक स्थिति और भी मजबूत होगी।
जेन टेक्नोलॉजीज को क्या होगा फायदा?
Zen Technologies को भारत सरकार से Arms Act, 1959 के तहत हथियार बनाने का लाइसेंस मिला है। इस मंजूरी से कंपनी को 12.7mm से 40mm तक की तोपें बनाने की अनुमति मिल गई है, जिन्हें हवाई सुरक्षा, नौसेना के कामों और काउंटर-UAS (counter-UAS) इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया जाता है। इससे एडवांस्ड डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में कंपनी की स्थिति और मजबूत होगी।
ये तेजी से फायर करने वाले सिस्टम ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन्स और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों के खिलाफ आखिरी लास्ट-लाइन डिफेंस सिस्टम का काम करते हैं। जब इन्हें रडार, EO/IR सेंसर और फायर-कंट्रोल सिस्टम के साथ जोड़ा जाता है, तो ये भारत के स्वदेशी रक्षा इकोसिस्टम के तहत महत्वपूर्ण इंफ्रासट्रक्चर, सीमावर्ती क्षेत्रों और सैन्य टुकड़ियों को सटीक और किफायती सुरक्षा प्रदान करते हैं।
कारोबार और शेयर पर पॉजिटिव असर
Apollo Micro Systems और Zen Technologies ने एडवांस्ड डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए महत्वपूर्ण सरकारी लाइसेंस हासिल कर लिए हैं, जिससे उनका विस्तार सब-सिस्टम से लेकर वेपन सिस्टम्स और वायु रक्षा तोपों तक हो गया है।
इससे इनकी रणनीतिक स्थिति मजबूत हुई है। माना जा रहा है कि इन लाइसेंसों का दोनों कंपनियों के रेवेन्यू और शेयर पर पॉजिटिव असर देखने को मिल सकता है।
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(डिस्क्लेमर: यहां दो शेयरों की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
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