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    ट्रंप लौटाने जा रहे हैं टैरिफ का 15 लाख करोड़, इन भारतीय कंपनियों के लिए राहत, शेयरों में दिखी जबरदस्त तेजी

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 02:44 PM (IST)

    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन टैरिफ की रकम लौटाने की तैयारी में है। इससे कपड़ा और समुद्री खाद्य पदार्थ कंपनियों के शेयरों में ते ...और पढ़ें

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    फाइल फोटो

    नई दिल्ली। ट्रंप प्रशासन के टैरिफ (Trump Tariff) पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब यूएस गवर्नमेंट इंपोर्ट ड्यूटी के नाम पर वसूली गई रकम (Tariff Refund) को लौटाने की तैयारी में है, जिसके चलते कुछ भारतीय शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। 21 अप्रैल के कारोबारी सत्र में कपड़ा और समुद्री खाद्य पदार्थ तैयार करने वाली कंपनियों के शेयर 5% तक चढ़ गए। दरअसल, अमेरिकी सरकार की ओर से जिन कंपनियों को ब्याज समेत 166 अरब डॉलर (15 लाख करोड़ से ज्यादा) की वापसी राशि मिलनी बाकी है, वे सोमवार से अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा (CBP) के नए पोर्टल के माध्यम से रिबंरसमेंट के लिए आवेदन करना शुरू कर सकती हैं।

    60 से 90 दिन में रिफंड

    सीबीपी का अनुमान है कि मंजूरी के बाद 60 से 90 दिनों के भीतर वापसी राशि जारी कर दी जाएगी, लेकिन कुछ मामलों में अतिरिक्त समीक्षा की आवश्यकता होने पर इसमें अधिक समय भी लग सकता है। भारत में कई कंपनीज हैं जो अमेरिका में अपना सामान निर्यात करती हैं और इनसे 50% तक टैरिफ वसूला गया है। ऐसे में टैरिफ के नाम वसूली गई यह रकम मिलने से उन्हें काफी राहत मिलेगी।

    अवंती फीड्स और एपेक्स फ्रोजन में तेजी

    अवंती फीड्स और एपेक्स फ्रोजन जैसी सी फूड निर्यात करने वाली कंपनियों के शेयरों में 2% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि गोकलदास एक्सपोर्ट्स और वेल्सपन लिविंग के शेयरों में क्रमशः 5.5% और 4% की वृद्धि हुई है।

    अमेरिकी सरकार की ओर से फेज वाइज रिफंड प्रोसेस शुरू करने की उम्मीद की जा रही है। हालांकि, पहले हाल ही में किए गए टैरिफ भुगतानों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा इसलिए किसी भी रिफंड का कंपनियों तक धीरे-धीरे पहुंचना संभव है।

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    बता दें कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि प्रेसिडेंट ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल में लगभग हर दूसरे देश से आने वाले उत्पादों पर नए टैरिफ लगाकर कांग्रेस के कर निर्धारण अधिकार का हनन किया था। उन्होंने अमेरिकी व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल बताते हुए 1977 के आपातकालीन शक्तियों कानून का हवाला दिया था।