Suzlon Energy के लिए आई बुरी खबर, SEBI ने ठोका ₹29 करोड़ का जुर्माना; सोमवार को शेयरों में दिखेगी हलचल?
बाजार नियामक SEBI ने Suzlon Energy और उसके पूर्व अधिकारियों पर लगभग 29 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं और लेन-देन मे ...और पढ़ें

SEBI ने Suzlon Energy पर लगाया करोड़ों का जुर्माना
HighLights
SEBI ने Suzlon Energy पर ₹15.95 करोड़ का जुर्माना।
पूर्व अधिकारियों पर भी ₹13 करोड़ से अधिक का जुर्माना।
वित्तीय अनियमितताओं, लेन-देन में हेरफेर का आरोप।
नई दिल्ली। भारत की प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Suzlon Energy को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। बैंक पर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) का डंडा चला है। सेबी ने कंपनी और उसके कुछ पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों पर कुल करीब 29 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इस कार्रवाई के बाद निवेशकों की नजर अब सोमवार को शेयर बाजार खुलने पर Suzlon के शेयरों की चाल पर टिकी हुई है। सोमवार को सुजलॉन के शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।
SEBI ने शुक्रवार 29 मई को जारी आदेश में जून 2025 के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें कंपनी और कुछ अधिकारियों को राहत दी गई थी। नियामक ने कहा कि पहले का आदेश प्रतिभूति बाजार के हित में नहीं था और मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था।
Suzlon Energy और उसके अधिकारियों पर कितना-कितना जुर्माना लगा?
SEBI ने Suzlon Energy पर 15.95 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा नियामक ने कंपनी के पूर्व एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन विनोद आर. तांती पर 5.75 करोड़ रुपये, गिरीश आर. तांती पर 5.45 करोड़ रुपये, पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) कीर्ति जे. वागड़िया पर 1.5 करोड़ रुपये और अमित अग्रवाल पर 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला वित्त वर्ष 2014 और 2021 के बीच सुजलॉन और उसकी कई सहायक कंपनियों के बीच हुए लेन-देन से जुड़ा है, जिसमें 2014 में इसके ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस सर्विसेज (OMS) कारोबार को सुजलॉन ग्लोबल सर्विसेज लिमिटेड को 2000 करोड़ रुपये हस्तांतरित करना भी शामिल है। इसे लेकर सेबी को दिसंबर 2019 में एक गुमनाम शिकायत मिली थी। इसके बाद सेबी ने वित्त वर्ष 2014-15 से 2020-21 तक के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच शुरू की और फॉरेंसिक ऑडिट भी कराया।
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सुजलॉन पर क्या आरोप?
SEBI का आरोप है कि इस सौदे से कंपनी ने करीब 1,923 करोड़ रुपये का अकाउंटिंग लाभ दिखाया, जबकि संबंधित कारोबार की बुक वैल्यू केवल लगभग 77 करोड़ रुपये थी।
नियामक के अनुसार, सौदे की रकम का एक बड़ा हिस्सा वास्तव में स्वतंत्र रूप से प्राप्त नहीं हुआ था। आरोप है कि लगभग 1,300 करोड़ रुपये समूह की विभिन्न कंपनियों के बीच कर्ज और अन्य वित्तीय साधनों के जरिए बार-बार घुमाए गए, जिससे भुगतान पूरा होने का आभास दिया गया।
SEBI ने एक अन्य लेन-देन पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें SGSL के शेयरों को Suzlon Structures Ltd को ट्रांसफर किया गया था। इस सौदे से कंपनी ने करीब 830 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ दर्ज किया। नियामक का कहना है कि एक ही संपत्ति के आधार पर समूह के भीतर पुनर्गठन करके दो बार बड़े लाभ दिखाए गए, जिससे वित्तीय तस्वीर वास्तविक स्थिति से अलग दिखाई दे सकती है।
इसके अलावा विदेशी इकाई से जुड़े दायित्वों, संपत्तियों के मूल्यांकन और कुछ फंड ट्रांसफर से संबंधित मामलों की भी जांच की गई।
Suzlon Energy के शेयरों में जारी है तेजी का दौर
पावर और रिन्यूएबल एनर्जी के शेयरों में बीते एक महीने से तेजी का तूफान जारी है। बीते 5 दिनों में Suzlon के शेयरों में लगभग 6 फीसदी तक का उछाल देखा गया है। शुक्रवार को इसके शेयर NSE पर -0.94 % गिरकर 56.99 रुपये के स्तर पर बंद हुए।
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(डिस्क्लेमर: यहां शेयर की जानकारी दी गई है। यह निवेश की सलाह नहीं है। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
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