IPO से पहले शेयर खरीदने का 'सीक्रेट': अनलिस्टेड मार्केट से मुनाफे का मौका, पर इन बातों से रहें सावधान!
यह लेख आईपीओ से पहले अनलिस्टेड या ग्रे-मार्केट में शेयर खरीदने की प्रक्रिया, फायदे और जोखिमों पर प्रकाश डालता है। इसमें बताया गया है कि कैसे निवेशक लि ...और पढ़ें

ग्रे-मार्केट में खरीदे जा सकते हैं शेयर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। भारत में आईपीओ (IPO) निवेशकों के लिए काफी आकर्षक ऑप्शन है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि किसी कंपनी के शेयर उसके आधिकारिक लिस्टिंग से पहले भी खरीदे जा सकते हैं। इसे अनलिस्टेड मार्केट या ग्रे-मार्केट कहा जाता है। हालांकि इसमें मौके के साथ जोखिम भी जुड़े होते हैं, इसलिए निवेश से पहले पूरी जानकारी जरूरी है।
अनलिस्टेड और ग्रे-मार्केट क्या है?
आईपीओ से पहले किसी कंपनी के शेयर जो स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं होते, उन्हें अनलिस्टेड शेयर कहा जाता है। वहीं, ग्रे-मार्केट एक अनौपचारिक बाजार है, जहां निवेशक आईपीओ आने से पहले ही शेयरों की खरीद-फरोख्त करते हैं। यह बाजार पूरी तरह रेगुलेटेड नहीं होता, इसलिए यहां कीमतें मांग और सप्लाई के आधार पर तय होती हैं।
आईपीओ से पहले शेयर क्यों खरीदे जाते हैं?
कई निवेशक लिस्टिंग के बाद संभावित मुनाफे को देखते हुए पहले ही निवेश करना चाहते हैं। अगर कंपनी मजबूत है और उसका बिजनेस मॉडल भरोसेमंद है, तो लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमत बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में शुरुआती निवेशक बेहतर रिटर्न कमा सकते हैं। हालांकि, अगर कंपनी उम्मीद पर खरी नहीं उतरती, तो नुकसान भी हो सकता है।
कहां से खरीद सकते हैं अनलिस्टेड शेयर?
अनलिस्टेड शेयर खरीदने के लिए निवेशक आमतौर पर विशेष ब्रोकर्स, वेल्थ मैनेजमेंट फर्म्स या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेते हैं। कुछ प्लेटफॉर्म ऐसे होते हैं जो प्री-आईपीओ शेयरों में डील करते हैं और खरीदार-बिक्रीदार को जोड़ते हैं।
इसके अलावा, कुछ हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) के नेटवर्क के जरिए भी ये सौदे होते हैं। ध्यान रहे कि हर प्लेटफॉर्म विश्वसनीय नहीं होता, इसलिए बैकग्राउंड चेक बेहद जरूरी है।
खरीदने की प्रक्रिया कैसे काम करती है?
सबसे पहले निवेशक को किसी भरोसेमंद ब्रोकर या प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध शेयरों की जानकारी लेनी होती है। इसके बाद कीमत पर सहमति बनती है और ऑफ-मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए शेयर ट्रांसफर किए जाते हैं। यह प्रक्रिया डीमैट अकाउंट के माध्यम से पूरी होती है। भुगतान आमतौर पर बैंक ट्रांसफर के जरिए किया जाता है और शेयर कुछ दिनों में अकाउंट में दिखाई देने लगते हैं।
क्या हैं जोखिम और सावधानियां?
ग्रे-मार्केट और अनलिस्टेड शेयरों में सबसे बड़ा जोखिम पारदर्शिता की कमी है। यहां किसी तरह का रेगुलेटरी प्रोटेक्शन नहीं होता, इसलिए धोखाधड़ी की संभावना बनी रहती है। इसके अलावा, लिक्विडिटी भी कम होती है, यानी जरूरत पड़ने पर तुरंत शेयर बेचना मुश्किल हो सकता है। इसलिए निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स, ब्रोकर की विश्वसनीयता और अपने जोखिम लेने की क्षमता का आकलन करना जरूरी है।
इस तरह, आईपीओ से पहले निवेश का यह विकल्प आकर्षक जरूर है, लेकिन समझदारी और सावधानी के साथ ही इसमें कदम रखना चाहिए।
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"शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।"
(डिस्क्लेमर: यहां अनलिस्टेड मार्केट की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
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