सर्च करे
Home

Trending

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    अगले हफ्ते तेल के दाम, RBI की बैठक और GDP डेटा से तय होगी शेयर बाजार की चाल; क्या करें निवेशक?

    Updated: Sun, 31 May 2026 11:10 AM (IST)

    बीता सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा, जिसमें निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में गिरावट दर्ज की गई। अगले सप्ताह आरबीआई की मौद्रिक नीति, भा ...और पढ़ें

    preferred source google
    News Article Hero Image

    अगले हफ्ते शेयर बाजार के लिए कई फैक्टर्स रहेंगे अहम

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    आईएएनएस, नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह बड़ा उतार-चढ़ाव भरा रहा। सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र की शुरुआत सकारात्मक हुई, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। इसके चलते निफ्टी शुरुआती दिनों में 24,000 के स्तर के ऊपर पहुंचने में सफल रहा। हालांकि जैसे-जैसे सप्ताह आगे बढ़ा, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदें कमजोर पड़ने लगीं और निवेशकों का रुख सतर्क हो गया।
    विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन में बिकवाली और तेज हो गई, खासकर बाजार बंद होने से पहले के अंतिम आधे घंटे में, जब एमएससीआई इंडेक्स रीबैलेंसिंग के चलते कई फंडों ने अपने पोर्टफोलियो में बदलाव किया।

    मौसम विभाग के चेतावनी ने बढ़ाई चिंता

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के कमजोर मानसून अनुमान ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। परिणामस्वरूप, सप्ताह के दौरान निफ्टी 50 में 0.72 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 23,547.75 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 0.85 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 74,775.74 के स्तर पर आ गया। अब अगला हफ्ता कैसा रहेगा, आइए जानते हैं।

    कौन-से फैक्टर्स होंगे अहम?

    अब निवेशकों की नजर अगले सप्ताह के घटनाक्रमों पर है। बता दें कि अगले हफ्ते यानी 1 जून से 5 जून के बीच कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े और नीतिगत फैसले आने वाले हैं, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति, भारत की जीडीपी रिपोर्ट, पीएमआई डेटा, अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े घटनाक्रमों पर रहेगी
    सप्ताह की शुरुआत मई के मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) के आंकड़ों से होगी। यह डेटा देश के विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति, मांग और कारोबारी गतिविधियों का शुरुआती संकेत देता है। इसके साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियों की मासिक बिक्री के आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी, क्योंकि ये उपभोक्ता मांग और आर्थिक गतिविधियों की झलक देते हैं।

    निवेशकों के लिए जरूरी संकेत

    राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) भी महत्वपूर्ण रहेगा, जो मैन्युफैक्चरिंग, खनन और बिजली क्षेत्रों की स्थिति को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई भी निवेशकों के लिए अहम संकेतक माना जा रहा है।

    खबरें और भी

    3 जून को अमेरिका से आने वाली कई महत्वपूर्ण आर्थिक रिपोर्ट्स बाजार की दिशा प्रभावित कर सकती हैं। एडीपी रोजगार रिपोर्ट, एसएंडपी ग्लोबल सर्विसेज पीएमआई और आईएसएम नॉन-मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई के आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और महंगाई के दबाव की तस्वीर पेश करेंगे। इन आंकड़ों के आधार पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की भविष्य की ब्याज दर नीति को लेकर अनुमान लगाए जाएंगे, जिसका असर वैश्विक पूंजी प्रवाह, उभरते बाजारों की मुद्राओं और विदेशी निवेशकों की रणनीति पर पड़ सकता है।

    आरबीआई की एमपीसी कब?

    भारतीय रिजर्व बैंक की 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 3 जून से 5 जून तक चलेगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 जून को सुबह 10 बजे बैठक के फैसलों की घोषणा करेंगे। निवेशक महंगाई, आर्थिक विकास, बैंकिंग प्रणाली में तरलता, वैश्विक जोखिमों और ब्याज दरों को लेकर आरबीआई के रुख पर खास नजर रखेंगे।
    बैंकिंग शेयरों, बॉन्ड यील्ड और रुपए की चाल पर इस बैठक का सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है। साथ ही खाद्य महंगाई, मानसून की स्थिति और वैश्विक कमोडिटी कीमतों को लेकर आरबीआई के आकलन को भी बाजार ध्यान से देखेगा।

    अगले सप्ताह आएगा जीडीपी डेटा

    5 जून को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की प्रारंभिक जीडीपी वृद्धि दर और मार्च तिमाही के आर्थिक आंकड़े जारी करेगा। इससे देश की आर्थिक स्थिति की व्यापक तस्वीर सामने आएगी और निवेशकों को विकास दर के नए संकेत मिलेंगे।
    उसी दिन अमेरिका का नॉन-फार्म पेरोल्स (एनएफपी) डेटा और बेरोजगारी दर भी जारी होगी। ये आंकड़े वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इनके आधार पर फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियों को लेकर अनुमान लगाए जाते हैं।

    अमेरिका-ईरान के बीच तनाव जारी


    अगले सप्ताह अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और उससे जुड़े कूटनीतिक प्रयासों पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी, जिसका सीधा असर वैश्विक जोखिम भावना और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे महंगाई, व्यापार घाटा और कंपनियों की लागत प्रभावित होती है।
    वहीं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल भी विदेशी निवेश प्रवाह और कई कंपनियों की आय पर असर डाल सकती है।

    ये भी पढ़ें - Upcoming IPO: अगले हफ्ते आएंगे 5 नए आईपीओ, ₹88 चल रहा एक का GMP; पैसा रखें तैयार

    "शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।"

    (डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)