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    ये तो गिरावट का ट्रेलर है! ईरान-अमेरिका युद्ध से 10% तक टूट सकता है बाजार, मशहूर मार्केट एक्सपर्ट की चेतावनी

    Updated: Mon, 09 Mar 2026 11:37 AM (IST)

    ईरान-अमेरिका संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण ग्लोबल बाजारों में गिरावट जारी है। इस बीच मार्केट एक्सपर्ट विकास खेमानी ने कहा है कि इस मौजूद ...और पढ़ें

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    9 मार्च को तगड़ी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं शेयर बाजार

    नई दिल्ली। जब से ईरान और अमेरिका-इजरायल (Iran-America War) के बीच जंग की शुरुआत हुई है तब से भारत समेत दुनियाभर के बाजारों में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया। लेकिन, 9 मार्च को यह गिरावट और गहरा गई, क्योंकि कच्चा तेल 117 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है इसलिए निवेशक परेशान हैं। सवाल है कि क्या मार्केट में गिरावट और बढ़ सकती है? इस सवाल का जवाब मशहूर मार्केट एक्सपर्ट विकास खेमानी ने दिया है

    मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, कार्नेलियन एसेट मैनेजमेंट के विकास खेमानी ने कहा, मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल की कीमतों में 100 डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी के बीच बाजारों में 10 प्रतिशत की गिरावट देखी जा सकती है।

    क्या यह निवेश करने का सही समय?

    विकास खेमानी ने यह भी कहा है कि गिरावट के बीच में यह निवेश करने का सही समय है, लेकिन निवेशक को हर गिरावट पर खरीदारी की रणनीति के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, "ईरान जबरदस्त नुकसान के बावजूद जवाबी एक्शन यह दर्शाता है कि तेहरान के मौजूदा नेतृत्व के पास आगे भी कार्रवाई जारी रखने की योजना है। ऐसे में स्थितियां आमतौर पर बाजारों को स्थायी नुकसान पहुंचाने के बजाय अस्थायी अनिश्चितता की ओर ले जाती हैं।"

    विकास खेमानी ने कहा कि पिछले वीकेंड में हुए घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष अनुमान से अधिक समय तक जारी रह सकता है। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को भारी नुकसान होने के बावजूद उसके द्वारा जारी जवाबी कार्रवाई को इस बात का संकेत बताया कि यह दुश्मनी जल्द खत्म नहीं होने वाली है।

    शॉर्ट टर्म में कमजोरी, लॉन्ग टर्म में मजबूती

    ईरान-अमेरिका युद्ध से भारतीय बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव अल्पकालिक हैं, और लॉन्ग टर्म में भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। उनका मानना है कि सबसे बड़ी चिंता सप्लाई चेन में व्यवधान और तेल की बढ़ती कीमतें हैं। उन्होंने अनुमान लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में बाजारों में 5-7% की गिरावट आ सकती है, जो कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने पर 10% तक बढ़ सकती है।

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    (डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी एक्सपर्ट की राय पर आधारित है, यह किसी भी तरह से निवेश की सलाह नहीं है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)