मुकेश अंबानी की इस कंपनी का मिटा नामोनिशान, रिलायंस की इस विदेशी कंपनी में हो गया विलय
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी दो अंतरराष्ट्रीय सहायक कंपनियों, रेडिसिस केमैन लिमिटेड और रेडिसिस इंटरनेशनल एलएलसी का विलय कर दिया है। यह कदम वैश्विक कॉर्प ...और पढ़ें

रिलायंस ने अपनी दो अंतरराष्ट्रीय सहायक कंपनियों का विलय किया।
HighLights
रिलायंस ने अपनी दो अंतरराष्ट्रीय सहायक कंपनियों का विलय किया।
रेडिसिस केमैन लिमिटेड का रेडिसिस इंटरनेशनल एलएलसी में विलय।
वैश्विक कॉर्पोरेट संरचना को सुव्यवस्थित करने का महत्वपूर्ण कदम।
नई दिल्ली। दिग्गज कारोबारी मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Ltd) ने अपनी वैश्विक कॉर्पोरेट संरचना को और अधिक सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी ने शेयर बाजार को सूचित किया है कि उसने अपनी दो अंतरराष्ट्रीय सहायक कंपनियों (Subsidiaries) का आपस में विलय कर दिया है।
मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की RIL ने 1 अगस्त, 2026 को शेयर बाजारों को दी गई एक आधिकारिक सूचना में बताया कि उसकी एक स्टेप-डाउन सहायक कंपनी, रेडिसिस केमैन लिमिटेड (Radisys Cayman Limited) का विलय उसकी होल्डिंग कंपनी रेडिसिस इंटरनेशनल एलएलसी (Radisys International LLC) के साथ कर दिया गया है।
31 जुलाई से प्रभावी हुआ विलय
विलय की प्रभावी तिथि कंपनी के अनुसार, यह विलय 31 जुलाई, 2026 से प्रभावी हो गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज को इस विलय की आधिकारिक सूचना 1 अगस्त, 2026 को सुबह 10:41 बजे प्राप्त हुई, जिसके तुरंत बाद कंपनी ने सेबी (SEBI) के नियमों के तहत इसकी जानकारी सार्वजनिक की।
क्या करती है मुकेश अंबानी की विदेशी कंपनी
रेडिसिस केमैन लिमिटेड: यह कंपनी केमैन आइलैंड्स (Cayman Islands) के कानूनों के तहत पंजीकृत थी। यह रिलायंस की एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी के रूप में कार्य कर रही थी।
रेडिसिस इंटरनेशनल एलएलसी: यह कंपनी अमेरिका के डेलावेयर (Delaware) राज्य में पंजीकृत है और रेडिसिस केमैन की होल्डिंग कंपनी है।
Radisys International LLC एक होल्डिंग कंपनी के तौर पर काम करती है। यह अपनी पैरेंट कंपनी Radisys Corporation की ऑपरेटिंग सब्सिडियरीज में निवेश रखती है। Radisys Corporation खुद Reliance Industries Limited की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी है। अपने ऑपरेटिंग ग्रुप के ज़रिए, Radisys का बड़ा बिज़नेस ओपन टेलीकॉम सॉल्यूशन, 5G सॉफ़्टवेयर और अलग-अलग किए गए कोर और एक्सेस हार्डवेयर उपलब्ध कराता है।
खबरें और भी
नियमों का पालन रिलायंस इंडस्ट्रीज ने यह जानकारी 'सेबी (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2015' के रेगुलेशन 30 के तहत साझा की है। इस सूचना पर कंपनी की सचिव और अनुपालन अधिकारी (Company Secretary and Compliance Officer) सावित्री पारेख के हस्ताक्षर हैं।
विदेशी एक्सचेंजों को भी दी गई जानकारी
इस विलय की जानकारी न केवल भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों (BSE और NSE) को दी गई है, बल्कि इसकी प्रतियां लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज और सिंगापुर एक्सचेंज लिमिटेड को भी भेजी गई हैं, जहां रिलायंस के अन्य वित्तीय उपकरण सूचीबद्ध हो सकते हैं।
कॉर्पोरेट जगत में इस तरह के विलय अक्सर परिचालन दक्षता (Operational Efficiency) बढ़ाने और प्रशासनिक जटिलताओं को कम करने के लिए किए जाते हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा अपनी विदेशी इकाइयों का एकीकरण करना उसकी वैश्विक व्यापार रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। निवेशकों के लिए यह एक सामान्य कॉर्पोरेट पुनर्गठन की प्रक्रिया है, जिससे कंपनी के अंतरराष्ट्रीय ढांचे में अधिक स्पष्टता आएगी।
यह भी पढ़ें- JSW Steel की तीन कंपनियों का आज से खत्म हुआ वजूद, NCLT ने भी लगा दी मुहर; अब क्या होगा?
नोट- इस खबर को लिखने में AI की मदद ली गई है।
"शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।"
(डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी निवेश की राय नहीं है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)