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    NSE ने F&O के लिए बढ़ाया मार्केट क्लोजिंग टाइम, 3 अगस्त से होगा लागू; जानें कब तक कर सकेंगे ट्रेडिंग

    Updated: Sun, 31 May 2026 04:48 PM (IST)

    NSE ने इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में बाजार बंद होने का समय 10 मिनट बढ़ाकर शाम 3:40 बजे कर दिया है। यह बदलाव क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की शुरुआत के त ...और पढ़ें

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    डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग होगी अब 3:40 बजे तक

    HighLights

    1. बाजार बंद होने का समय 3:40 बजे तक बढ़ा

    2. क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) अब लागू होगा

    3. बेहतर प्राइस डिस्कवरी, पारदर्शिता बढ़ाना लक्ष्य

    नई दिल्ली। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में बाजार बंद होने के समय को 10 मिनट बढ़ाकर शाम 3:40 बजे तक करने का फैसला किया है। यह बदलाव क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की शुरुआत के तहत किया जा रहा है। क्लोजिंग ऑक्शन सेशन बाजार बंद होने से पहले का एक निर्धारित ट्रेडिंग चरण होता है, जिसमें निवेशक खरीद और बिक्री के ऑर्डर देकर किसी शेयर का निष्पक्ष क्लोजिंग प्राइस तय करते हैं। यह व्यवस्था बाजार में बेहतर प्राइस डिस्कवरी और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से लाई जा रही है।

    डेरिवेटिव्स बाजार का समय बढ़ाया गया

    शुक्रवार को जारी सर्कुलर में NSE ने बताया कि इक्विटी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए सामान्य बाजार बंद होने का समय अब शाम 3:40 बजे होगा। यह बदलाव कैश मार्केट में लागू किए जा रहे क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के अनुरूप किया गया है।
    हालांकि, प्री-ओपन सेशन और ट्रेड मॉडिफिकेशन विंडो सहित अन्य सभी ट्रेडिंग सत्रों के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। एक्सचेंज का कहना है कि इस कदम से कैश और डेरिवेटिव्स बाजारों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित होगा।

    प्राइस बैंड और रिस्क कंट्रोल के नए नियम लागू

    NSE ने स्पष्ट किया है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के तहत लागू किए जा रहे प्राइस बैंड और प्री-ट्रेड रिस्क कंट्रोल से जुड़े प्रावधान अब इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट पर भी लागू होंगे। क्लोजिंग ऑक्शन शुरू होने के बाद यदि किसी स्टॉक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की ऑपरेटिंग प्राइस रेंज दोबारा निर्धारित की जाती है तो इसकी सूचना एक्सचेंज की ओर से प्रसारित की जाएगी।
    संशोधित प्राइस रेंज से बाहर मौजूद सभी लंबित ऑर्डर मौजूदा नियमों के तहत स्वतः रद्द कर दिए जाएंगे।

    क्लोजिंग प्राइस निर्धारण का तरीका नहीं बदलेगा

    एक्सचेंज ने कहा है कि डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के क्लोजिंग प्राइस निर्धारण की मौजूदा पद्धति में कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि, क्लोजिंग प्राइस निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाली वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) विंडो को संशोधित किया गया है।
    अब यह VWAP दोपहर 3:10 बजे से 3:40 बजे के बीच हुए सौदों के आधार पर तय होगी। इसके अलावा, इन बदलावों से जुड़े तकनीकी और कार्यात्मक संशोधनों को आगामी मॉक ट्रेडिंग सत्रों में परीक्षण के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। ब्रोकरों को प्रभावी तारीख से पहले अपने ट्रेडिंग एप्लिकेशन में आवश्यक कॉन्ट्रैक्ट फाइलें अपडेट करने की सलाह दी गई है।

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    ऐसे काम करेगा क्लोजिंग ऑक्शन सेशन

    SEBI के 16 जनवरी के सर्कुलर के अनुसार क्लोजिंग ऑक्शन सेशन को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। शुरुआती चरण में केवल डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट वाले शेयरों का क्लोजिंग प्राइस CAS के जरिए तय होगा, जबकि अन्य शेयरों के लिए अंतिम 30 मिनट के VWAP के आधार पर क्लोजिंग प्राइस निकाला जाएगा।
    क्लोजिंग ऑक्शन सेशन रोजाना शाम 3:15 बजे से 3:35 बजे तक चलेगा। 3:15 से 3:20 बजे तक ट्रांजिशन फेज होगा, जिसमें 3:00 से 3:15 बजे के VWAP के आधार पर रेफरेंस प्राइस तय होगी। 3:20 से 3:25 बजे तक मार्केट और लिमिट दोनों तरह के ऑर्डर डाले जा सकेंगे, जबकि 3:25 से 3:30 बजे तक केवल लिमिट ऑर्डर की अनुमति होगी।
    इस दौरान मार्केट ऑर्डर में संशोधन या रद्दीकरण नहीं किया जा सकेगा। ऑर्डर एंट्री सत्र 3:28 से 3:30 बजे के बीच किसी भी समय रैंडम तरीके से बंद कर दिया जाएगा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था प्राइस डिस्कवरी को मजबूत करने, बाजार की निष्पक्षता बढ़ाने और भारतीय बाजारों को वैश्विक मानकों के करीब लाने में मदद करेगी।

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    (डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)