Gold vs Stock Market: 1 अप्रैल से बढ़ेगा STT, शेयर बाजार में ट्रेडिंग होगी महंगी; निवेशक अब सोने में लगाएंगे पैसा?
STT Impact on Trading: 1 अप्रैल 2026 से सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ने से शेयर बाजार में ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर टैक ...और पढ़ें
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1 अप्रैल से ट्रेडिंग महंगी! क्या अब शेयर छोड़ गोल्ड में पैसा लगाएंगे निवेशक? जानें पूरा असर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| वित्त वर्ष 2025-26 खत्म होने के साथ ही 1 अप्रैल से सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT Increase 2026) में बढ़ोतरी लागू हो रही है, जिससे शेयर बाजार में ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। ऐसे में निवेशकों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या अब पैसा गोल्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर जाएगा? न्यूज एजेंसी IANS ने एक्सपर्ट्स से बात की, जिसे हम आसान भाषा में समझा रहे हैं। जानिए इसका आप पर क्या असर पड़ेगा?
फ्यूचर्स पर कितना बढ़ा टैक्स?
बजट में निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman Budget STT) द्वारा घोषित बदलावों के तहत फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर एसटीटी (F&O Securities Transaction Tax Hike) बढ़ाया गया है।
सेबी (SEBI) के नए नियमों के मुताबिक फ्यूचर्स पर टैक्स 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। वहीं ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज पर एसटीटी अब 0.15% होगा, जो पहले 0.10% और 0.125% था।
किस पर पड़ेगा सीधा असर?
इस बदलाव का सीधा असर एक्टिव ट्रेडर्स और खासतौर पर डेरिवेटिव्स सेगमेंट (STT Impact on Trading) पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी और शॉर्ट-टर्म निवेश पर मिलने वाला मुनाफा कम हो सकता है।
हाल के आंकड़े भी बाजार के दबाव को दिखाते हैं। जनवरी 2026 में ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से 41,000 करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल लिए थे। इसके पीछे ग्लोबल अनिश्चितता, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये पर दबाव जैसे कारण रहे।
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तो यहां गोल्ड की हो सकती है एंट्री
अब एसटीटी बढ़ने से यह दबाव और बढ़ सकता है। खासकर हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और डेरिवेटिव्स पर निर्भर विदेशी फंड्स के लिए भारत थोड़ा कम आकर्षक हो सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि निवेश का हिस्सा अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों की ओर शिफ्ट हो सकता है।
यहीं पर गोल्ड की एंट्री होती है। जब शेयर बाजार में लागत बढ़ती है और अस्थिरता बढ़ती है, तो निवेशक आमतौर पर सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्प की ओर रुख करते हैं। गोल्ड को हमेशा से “सेफ हेवन” माना जाता है, खासकर तब जब बाजार में अनिश्चितता हो।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
हालांकि, IANS को एक्सपर्ट्स ने बताया कि
यह असर ज्यादा लंबा नहीं रहेगा। लॉन्ग-टर्म निवेशकों पर इसका प्रभाव सीमित होगा, क्योंकि उनके फैसले कंपनी के फंडामेंटल, नीतियों और आर्थिक स्थिरता पर आधारित होते हैं। सरकार के लिए यह कदम टैक्स कलेक्शन बढ़ाने में मददगार हो सकता है, लेकिन ट्रेडिंग वॉल्यूम पर हल्का दबाव देखने को मिल सकता है। खासतौर पर रिटेल और डे-ट्रेडर्स को इसका असर ज्यादा महसूस होगा।
कुल मिलाकर, 1 अप्रैल से बाजार में नए नियमों के साथ नई रणनीति की जरूरत होगी और इसमें गोल्ड एक बार फिर निवेशकों के रडार पर आ सकता है।
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