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    Top Gainer: गिरते बाजार में 'मीठा' मुनाफा! क्रूड ऑयल महंगा होते ही इन शेयरों को खरीदने वालों की लगी लॉटरी

    Updated: Mon, 09 Mar 2026 04:03 PM (IST)

    अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय चीनी कंपनियों के शेयरों में भारी तेजी आई है। एथेनॉल की बढ़ती मांग की उम्मीद में धामपु ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली। पश्चिमी एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे एथेनॉल की मांग बढ़ने की उम्मीद में भारतीय चीनी कंपनियों के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली है।

    सोमवार, 9 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के बावजूद, कई भारतीय चीनी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। इस तेजी का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें हैं, जिसने इस सेक्टर के सेंटिमेंट को काफी मजबूती दी है।

    धामपुर शुगर मिल्स, डालमिया भारत शुगर, द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज और प्राज इंडस्ट्रीज जैसे स्टॉक्स आज के टॉप गेनर्स में शामिल रहे। बाजार पर दबाव होने के बावजूद इन शेयरों में 6% से 10% के बीच उछाल देखा गया।

    प्रमुख चीनी शेयर का प्रदर्शन

    द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज: 8.5%
    डालमिया भारत शुगर: 7.7%
    धामपुर शुगर मिल्स: 7.5%
    बजाज हिंदुस्तान शुगर: 6.8%
    उत्तम शुगर मिल्स: 6.2%
    प्राज इंडस्ट्रीज: 6.0%
    श्री रेणुका शुगर्स: 4.8%
    बलरामपुर चीनी मिल्स: 3.5%

    कच्चे तेल में उबाल से एथेनॉल की मांग को समर्थन

    शुगर स्टॉक्स में इस जबरदस्त रैली का मुख्य ट्रिगर मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका-ईरान के बीच गहराता युद्ध है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की चिंताएं बढ़ गई हैं।

    9 मार्च को ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent crude) 25% से अधिक उछलकर $119.50 प्रति बैरल के पार पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड ने भी $119.48 प्रति बैरल के स्तर को छुआ।

    बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है। रिसर्च फर्म रिस्टैड एनर्जी के अनुसार, दुनिया भर की तेल आपूर्ति का लगभग 20% (करीब 1.5 करोड़ बैरल) हर दिन इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और निर्यात में कठिनाइयों के कारण इराक, कुवैत और यूएई जैसे देशों ने अपने तेल उत्पादन में कटौती कर दी है।

    कच्चे तेल का शुगर स्टॉक्स पर क्या असर होता है?

    एथेनॉल की बढ़ती मांग: जब कच्चा तेल महंगा हो जाता है, तो ईंधन आपूर्तिकर्ताओं के लिए पेट्रोल में एथेनॉल (Ethanol) मिलाना आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद और सस्ता हो जाता है।

    गन्ने का डाइवर्जन: बढ़ती मांग को देखते हुए, चीनी मिलें अपना ज्यादातर गन्ना चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ देती हैं।

    मुनाफे में वृद्धि: एथेनॉल की अधिक बिक्री और वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति कम होने से कीमतों में सुधार होता है, जिससे अंततः इन कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ती है।

    एथेनॉल ब्लेंडिंग क्या है?

    एथेनॉल एक रिन्यूएबल बायोफ्यूल (जैव ईंधन) है जिसे मुख्य रूप से कृषि स्रोतों जैसे गन्ना, मक्का और अन्य अनाजों से तैयार किया जाता है। यह (What is Ethanol Blending) पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ रूप से जलता है और पर्यावरण के अनुकूल है।

    भारत सरकार ने कच्चे तेल के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन को घटाने के लिए पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना (ब्लेंडिंग) अनिवार्य कर दिया है। यह नीति न केवल देश के आयात बिल को कम करती है, बल्कि गन्ने और मक्के की मांग बढ़ाकर सीधे तौर पर किसानों की आय बढ़ाने और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद करती है।

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    (डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी निवेश की राय नहीं है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)