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    Vi Share Price: वोडाफोन आइडिया शेयर 9% उछला, लौट आए 'अच्छे दिन'? सरकार की बड़ी छूट सहित तेजी के 2 कारण

    Updated: Mon, 11 May 2026 01:20 PM (IST)

    वोडाफोन आइडिया के शेयरों में सोमवार को 9% की जबरदस्त तेजी आई, जो तीन महीने का उच्चतम स्तर है। यह उछाल वोडाफोन ग्रुप द्वारा हिस्सेदारी हस्तांतरण पर विच ...और पढ़ें

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली। वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea Share Price) के शेयरों में सोमवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कमजोर बाजार के बावजूद, भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम के बीच BSE पर इंट्रा-डे ट्रेड में शेयर करीब 9 फीसदी उछलकर ₹12.18 पर पहुंच गया, जो इसका पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है।

    यह 11 फरवरी, 2026 के बाद का कंपनी का सबसे ऊंचा स्तर है। गौरतलब है कि 31 दिसंबर, 2025 को शेयर (VI Share Price) ने ₹12.80 का 52-सप्ताह का उच्चतम स्तर छुआ था। 30 अप्रैल, 2026 के बाद से VI के बाजार मूल्य में अब तक 39 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। आइए समझते हैं कि इस टेलीकॉम कंपनी के शेयरों में आई इस बंपर तेजी और हलचल के पीछे क्या कारण हैं।

    शेयरों में इस भारी उछाल के पीछे क्या है मुख्य कारण?

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटेन की वोडाफोन ग्रुप पीएलसी (Vodafone Group Plc) अपनी लिस्टेड भारतीय इकाई (VI) की पूंजी बढ़ाने के प्रस्ताव पर काम कर रही है। ब्रिटेन की टेलीकॉम कंपनी अपनी 19 प्रतिशत हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा सीधे भारतीय कंपनी के ट्रेजरी में ट्रांसफर करने पर विचार कर रही है। यह शेयर ट्रांसफर वोडाफोन द्वारा भारतीय व्यवसाय में अतिरिक्त नकद निवेश के विकल्प के तौर पर किया जाएगा।

    बता दें कि भारत सरकार वोडाफोन आइडिया में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी शेयरधारक है, जबकि अरबपति कुमार मंगलम बिड़ला के आदित्य बिड़ला समूह के पास भी इसमें अल्पांश हिस्सेदारी है।

    सरकार ने AGR बकाये पर क्या दी है बड़ी राहत?

    टेलीकॉम कंपनी के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक खबर सरकार की ओर से आई है। 30 अप्रैल, 2026 को दूरसंचार विभाग (DoT) ने पुनर्मूल्यांकन के बाद आदित्य बिड़ला ग्रुप समर्थित VI के बकाया एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) को 27 प्रतिशत तक घटा दिया है। पहले यह बकाया ₹87,695 करोड़ था, जो अब घटकर ₹64,046 करोड़ रह गया है।

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    भुगतान का नया ढांचा के रूप में यह बकाया राशि 31 दिसंबर, 2025 तक के लिए फ्रीज कर दी गई है। FY 2031-32 से FY 2034-35 के दौरान कंपनी को 4 वर्षों तक सालाना कम से कम ₹100 करोड़ का भुगतान करना होगा। FY 2035-36 से FY 2040-41 के बीच शेष राशि का भुगतान अगले 6 वर्षों में 6 समान किस्तों में किया जाएगा।
    एनालिस्ट्स का मानना है कि इस कदम से टेलीकॉम ऑपरेटर की बैंकों से कर्ज जुटाने और अपने नेटवर्क में निवेश करने की क्षमता में सुधार होगा।

    यहां वीडियो में देखें एक्सपर्ट की राय

    ब्रोकरेज फर्म्स ने VI शेयर पर ₹14 का दिया टारगेट प्राइस

    सिटी रिसर्च (Citi Research) के विश्लेषकों का मानना है कि VI के शेयरों में अभी और तेजी आ सकती है। ब्याज न लगने और 10 साल के मोरेटोरियम (छूट) के लागू रहने से नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) के आधार पर VI का प्रभावी AGR बोझ अनुमानित ₹35,000 करोड़ से घटकर ₹26,000 करोड़ रह गया है।

    ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि रेगुलेटरी अनिश्चितता खत्म होने के बाद, VI अब अपना ₹25,000 करोड़ का बैंक कर्ज जुटाने की बेहतर स्थिति में है। इससे कंपनी अपने ₹45,000 करोड़ के तीन-वर्षीय कैपेक्स प्लान को शुरू कर सकेगी। सिटी रिसर्च ने इस शेयर के लिए ₹14 का टारगेट प्राइस तय किया है।

    कुमार मंगलम बिड़ला की वापसी का क्या होगा असर?

    वोडाफोन आइडिया के निदेशक मंडल ने पिछले हफ्ते कुमार मंगलम बिड़ला को गैर-कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह फैसला 5 मई, 2026 से प्रभावी हो गया है। बिड़ला ने हाल ही में मीडिया को बताया कि VI के ऑपरेशनल मेट्रिक्स में अब ठोस सुधार दिखना शुरू हो गया है और $5 बिलियन के कैपेक्स प्लान से इस गति को और समर्थन मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि कंपनी के पुनरुद्धार से बाजार में तीन निजी कंपनियों की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    कॉलर ट्यून मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने क्या दिया झटका?

    एक तरफ जहां कंपनी के लिए अच्छी खबरें हैं, वहीं 8 मई को कलकत्ता हाईकोर्ट से उसे एक मामले में निराशा हाथ लगी है। कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि वोडाफोन केवल साउंड रिकॉर्डिंग कंपनियों (जैसे सारेगामा) के साथ समझौते के आधार पर गानों को कॉलर ट्यून या रिंगटोन के रूप में नहीं दे सकती।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि इसके लिए वोडाफोन को इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी लिमिटेड (IPRS) से भी अनुमति लेनी होगी, जो लेखकों, संगीतकारों और पब्लिशर्स का प्रतिनिधित्व करती है। न्यायालय ने कहा कि कॉपीराइट संशोधन अधिनियम, 2012 के तहत IPRS ऐसी रॉयल्टी का दावा करने का अधिकार रखता है।

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    "शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।"

    (डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी निवेश की राय नहीं है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)